29 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सेना का फर्जी वीडियो पर्दाफाश: लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर पाकिस्तान समर्थित दुष्प्रचार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेना का फर्जी वीडियो पर्दाफाश: लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर पाकिस्तान समर्थित दुष्प्रचार

सारांश

भारतीय सेना ने एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान का भंडाफोड़ किया — अक्टूबर 2025 के पुराने वीडियो में डिजिटल हेरफेर कर लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर झूठे बयान जोड़े गए और पाकिस्तान समर्थित खातों से अरुणाचल-चीन मुद्दे पर सेना की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश की गई।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 29 अक्टूबर 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर प्रसारित फर्जी वीडियो का पर्दाफाश किया।
वायरल वीडियो मूलतः अक्टूबर 2025 का पुराना क्लिप है, जिसमें डिजिटल बदलाव कर झूठे बयान जोड़े गए।
पाकिस्तान से जुड़े दुष्प्रचार सोशल मीडिया खातों से यह वीडियो प्रसारित किया जा रहा था।
वीडियो में अरुणाचल प्रदेश में चीन की मौजूदगी और भारतीय सेना की कथित कमज़ोरी को लेकर भ्रामक दावे किए गए।
सेना ने नागरिकों से किसी भी संवेदनशील वीडियो का मूल स्रोत जाँचने के बाद ही साझा करने की अपील की।

भारतीय सेना ने 29 अक्टूबर 2026 को एक गंभीर दुष्प्रचार अभियान का भंडाफोड़ किया, जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया गया एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा था। इस वीडियो में अरुणाचल प्रदेश में चीन की सैन्य मौजूदगी और भारतीय सेना की तैयारियों को लेकर भ्रामक दावे किए गए थे। सेना के अनुसार, यह वीडियो पाकिस्तान से जुड़े दुष्प्रचार सोशल मीडिया खातों के ज़रिए प्रसारित किया गया।

फर्जी वीडियो में क्या दावे किए गए

डिजिटल रूप से बदले गए इस वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम से कथित बयान दिखाए गए, जिनमें यह झूठा दावा था कि भारत चीन की उन्नत सैन्य तकनीकों और अरुणाचल प्रदेश में उसकी बढ़ती मौजूदगी का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में संघर्ष कर रहा है। वीडियो में यह भी झूठा प्रचार किया गया कि सरकार सेना के हितों से ऊपर अपने हितों को रखती है।

इसके अतिरिक्त, पुराने सैन्य उपकरणों को जवानों की मृत्यु और उनमें बढ़ती निराशा से जोड़ने की कोशिश की गई। इन दावों का मक़सद भारतीय सेना की क्षमता और सरकार के प्रति जवानों के विश्वास पर सवालिया निशान लगाना था।

सेना का फैक्ट-चेक: असली वीडियो अक्टूबर 2025 का

भारतीय सेना के फैक्ट-चेक के मुताबिक, जिस वीडियो को फर्जी बयानों के साथ प्रसारित किया गया, वह मूलतः अक्टूबर 2025 का पुराना वीडियो है। इसके मूल रूप में डिजिटल बदलाव कर लेफ्टिनेंट जनरल शुक्ला के नाम से ऐसे बयान जोड़ दिए गए जो उन्होंने कभी नहीं दिए।

सेना ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में प्रसारित कोई भी कथित बयान वास्तविक नहीं है और इसे सच्चाई का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह तकनीक — पुराने वीडियो में डिजिटल छेड़छाड़ कर उसे नए और भ्रामक संदर्भ में पेश करना — आधुनिक सूचना युद्ध की एक प्रचलित रणनीति बन चुकी है।

दुष्प्रचार का तरीका और उद्देश्य

सेना के अनुसार इस दुष्प्रचार अभियान की कार्यप्रणाली सुनियोजित थी। पहले एक पुराना वीडियो लिया गया, फिर उसमें डिजिटल तरीके से बदलाव किए गए और कथित सैन्य बयानों के रूप में उसे प्रसारित किया गया। इसके बाद भारत-चीन सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को जोड़कर लोगों के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा करने की कोशिश की गई।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा पर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद जारी है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे दुष्प्रचार अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी सार्वजनिक बहस को जानबूझकर विकृत करने के लिए चलाए जाते हैं।

सेना की अपील और सतर्कता का आह्वान

भारतीय सेना ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील वीडियो को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत और वास्तविक संदर्भ की पुष्टि ज़रूर करें। केवल किसी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का नाम या चेहरा दिखने भर से वीडियो में कही गई बातें सत्य नहीं हो जातीं।

सेना का यह फैक्ट-चेक संदेश एक व्यापक चेतावनी है — ऐसे भ्रामक वीडियो, जिनमें पुराने दृश्यों और डिजिटल हेरफेर के ज़रिए झूठे दावों को प्रामाणिक दिखाने की कोशिश की जाती है, राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श को नुकसान पहुँचा सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सेना इस मामले में साइबर अपराध एजेंसियों के साथ मिलकर संबंधित खातों के विरुद्ध कोई कार्रवाई करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित सूचना युद्ध की रणनीति का है जो भारत-चीन सीमा विमर्श को घरेलू स्तर पर कमज़ोर करने के इरादे से चलाई जाती है। चिंताजनक बात यह है कि पुराने वीडियो में डिजिटल हेरफेर की यह तकनीक तेज़ी से परिष्कृत हो रही है और आम नागरिक के लिए असली-नकली की पहचान कठिन होती जा रही है। सेना का फैक्ट-चेक तंत्र सक्रिय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत के पास ऐसे अभियानों को समय रहते रोकने के लिए पर्याप्त साइबर-कानूनी ढाँचा है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और संबंधित खातों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे अभियान बार-बार दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर फैलाया गया फर्जी वीडियो क्या है?
यह एक डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया गया वीडियो है जिसमें भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर झूठे बयान जोड़े गए हैं। इसमें अरुणाचल प्रदेश में चीन की मौजूदगी और भारतीय सेना की कथित कमज़ोरी को लेकर भ्रामक दावे हैं जो सेना के अनुसार पूरी तरह असत्य हैं।
भारतीय सेना ने इस वीडियो को फर्जी कैसे साबित किया?
भारतीय सेना के फैक्ट-चेक के अनुसार, वायरल वीडियो दरअसल अक्टूबर 2025 का एक पुराना वीडियो है जिसमें डिजिटल बदलाव कर कथित सैन्य बयान जोड़े गए। मूल वीडियो की तुलना में यह स्पष्ट हो गया कि लेफ्टिनेंट जनरल शुक्ला ने वे बातें कभी नहीं कही जो वीडियो में दिखाई जा रही हैं।
यह फर्जी वीडियो किसने फैलाया?
भारतीय सेना के अनुसार, पाकिस्तान से जुड़े दुष्प्रचार सोशल मीडिया खातों के ज़रिए यह वीडियो प्रसारित किया जा रहा था। यह एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा प्रतीत होता है जिसका लक्ष्य भारतीय सेना और सरकार के प्रति आम जनता का विश्वास कमज़ोर करना है।
नागरिकों को इस तरह के फर्जी वीडियो से कैसे बचना चाहिए?
भारतीय सेना ने अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील वीडियो को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत और संदर्भ की जाँच अवश्य करें। केवल किसी सैन्य अधिकारी का नाम या चेहरा दिखने से वीडियो की सत्यता नहीं मानी जानी चाहिए।
इस दुष्प्रचार अभियान का भारत-चीन सीमा विवाद से क्या संबंध है?
वीडियो में अरुणाचल प्रदेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी और भारत की उससे निपटने में कथित अक्षमता को लेकर भ्रामक दावे किए गए, जो भारत-चीन सीमा तनाव के संवेदनशील संदर्भ का फायदा उठाते हैं। सेना के अनुसार इसका उद्देश्य सीमा से जुड़े मुद्दों पर जनता में भ्रम और घबराहट पैदा करना था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 6 दिन पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले