29 सितंबर 2026
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जनरल धीरज सेठ का AI-निर्मित फर्जी वीडियो वायरल, भारतीय सेना ने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा बताकर खारिज किया

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जनरल धीरज सेठ का AI-निर्मित फर्जी वीडियो वायरल, भारतीय सेना ने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा बताकर खारिज किया

सारांश

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का एक AI-निर्मित डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा नेटवर्क द्वारा फैलाया जा रहा है। जुलाई 2026 के बाद यह दूसरा ऐसा प्रयास है। सेना और फैक्ट-चेकर्स ने इसे मनगढ़ंत करार दिया है।

मुख्य बातें

जनरल धीरज सेठ के नाम पर AI-निर्मित डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर 29 सितंबर 2026 को वायरल हुआ।
वीडियो में कथित तौर पर दावा था कि भारत अफगान तालिबान, TTP और ISKP को समर्थन देगा — भारतीय सेना ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया।
वास्तविक भाषण के दृश्यों में AI तकनीक से आवाज़ और बयान बदले गए; फैक्ट-चेक और AI जाँच उपकरणों ने हेरफेर की पुष्टि की।
इससे पहले जुलाई 2026 में भी जनरल सेठ के नाम से एक AI-निर्मित फर्जी वीडियो सामने आया था।
पाकिस्तानी अकाउंट्स क्वांटम पल्स, टैक्टिकल ट्रिब्यून, इंशाल सिद्दीकी और जरयाब अली720 पर प्रसार के आरोप।
सेना ने नागरिकों से बिना सत्यापन के वीडियो साझा न करने की अपील की।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नाम पर सोशल मीडिया पर एक AI-निर्मित फर्जी वीडियो तेज़ी से प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर उनके हवाले से यह दावा किया गया है कि भारत अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और आईएसकेपी को समर्थन देगा। भारतीय सेना ने 29 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से इस वीडियो को पूरी तरह मनगढ़ंत और पाकिस्तान प्रायोजित प्रोपेगेंडा का हिस्सा बताते हुए खारिज किया है। स्वतंत्र फैक्ट-चेक में भी यही पुष्टि हुई है।

वायरल वीडियो में क्या दावा किया गया

फर्जी वीडियो में जनरल सेठ के हवाले से आरोप लगाया गया कि भारत, पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य इलाकों को निशाना बनाने के लिए चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने की योजना बना रहा है। यह दावे न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि भारत की स्थापित विदेश नीति के भी सर्वथा विपरीत हैं।

सेना के अनुसार, वायरल वीडियो में जनरल धीरज सेठ के एक वास्तविक भाषण के दृश्यों का उपयोग किया गया है। हालाँकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की सहायता से उनकी मूल आवाज़ को बदलकर मनगढ़ंत बयान डाल दिए गए हैं — जिसे तकनीकी भाषा में 'डीपफेक' कहा जाता है।

फैक्ट-चेक में क्या सामने आया

स्वतंत्र फैक्ट-चेकर्स ने मूल भाषण और वायरल वीडियो की तुलना की, जिसमें दोनों के बीच स्पष्ट विसंगतियाँ पाई गईं। AI जाँच उपकरणों ने भी वीडियो और आवाज़ में डिजिटल हेरफेर के अनिभ्रामक संकेत दिए। गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई 2026 में भी जनरल सेठ के नाम से एक अन्य AI-निर्मित वीडियो सामने आया था, जो झूठा पाया गया था। यानी यह दूसरी ऐसी घटना है जब सेना प्रमुख के नाम पर डीपफेक प्रचार का प्रयास हुआ।

पाकिस्तानी सोशल मीडिया नेटवर्क की भूमिका

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान आधारित कई सोशल मीडिया अकाउंट — जिनमें क्वांटम पल्स, टैक्टिकल ट्रिब्यून, इंशाल सिद्दीकी और जरयाब अली720 शामिल हैं — नियमित रूप से भारत और भारतीय सशस्त्र बलों को बदनाम करने के उद्देश्य से मनगढ़ंत सामग्री साझा करते हैं। मौजूदा मामले में असली वीडियो के दृश्य, बनावटी आवाज़, गढ़े हुए बयान और भ्रामक संदर्भ को मिलाकर एक कपटपूर्ण कथानक तैयार किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में दोनों देशों की सूचना-युद्ध गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक तकनीक अब पारंपरिक प्रोपेगेंडा का सबसे खतरनाक नया हथियार बन चुकी है।

सेना की अपील और सरकार की चेतावनी

भारतीय सेना ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी वीडियो को बिना आधिकारिक सत्यापन के साझा न करें। सरकार पहले भी चेता चुकी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए वीडियो वास्तविक व्यक्तियों की आवाज़ और चेहरे की नकल करके भ्रामक सूचनाएँ फैलाने में सक्षम हैं। सेना की फैक्ट-चेक प्रणाली ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और 'पहले जाँचें, फिर साझा करें' की नीति पर बल दिया है।

आने वाले समय में रक्षा अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस तरह के डीपफेक नेटवर्क के खिलाफ साइबर कूटनीतिक और कानूनी कदम उठाएँगे, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी झूठी सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाई जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित सूचना-युद्ध अभियान का संकेत है। चिंताजनक यह है कि वायरल होने के बाद खंडन हमेशा पीछे रह जाता है — झूठ पहले पहुँचता है, सच्चाई बाद में। भारतीय साइबर और रक्षा एजेंसियों को केवल प्रतिक्रियात्मक फैक्ट-चेक से आगे बढ़कर इन नेटवर्कों के विरुद्ध सक्रिय कूटनीतिक और तकनीकी कार्रवाई की ज़रूरत है। डीपफेक को राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में वर्गीकृत किए बिना, ऐसे अभियान बेरोकटोक जारी रहेंगे।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल धीरज सेठ का वायरल वीडियो क्या है?
यह एक AI-निर्मित डीपफेक वीडियो है जिसमें भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के वास्तविक भाषण के दृश्यों में कृत्रिम आवाज़ और मनगढ़ंत बयान जोड़े गए हैं। भारतीय सेना ने इसे पूरी तरह फर्जी और पाकिस्तान प्रायोजित प्रोपेगेंडा करार दिया है।
फैक्ट-चेक में वीडियो के बारे में क्या पता चला?
स्वतंत्र फैक्ट-चेकर्स और AI जाँच उपकरणों ने मूल भाषण एवं वायरल वीडियो की तुलना में स्पष्ट डिजिटल हेरफेर के संकेत पाए। मूल दृश्यों और आवाज़ के बीच की विसंगति ने वीडियो को डीपफेक प्रमाणित किया।
इस फर्जी वीडियो को किसने फैलाया?
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान आधारित सोशल मीडिया अकाउंट्स — क्वांटम पल्स, टैक्टिकल ट्रिब्यून, इंशाल सिद्दीकी और जरयाब अली720 — नियमित रूप से भारत और भारतीय सशस्त्र बलों को बदनाम करने के लिए ऐसी सामग्री प्रसारित करते हैं।
क्या जनरल धीरज सेठ के नाम पर पहले भी ऐसा हुआ है?
हाँ, जुलाई 2026 में भी जनरल धीरज सेठ के नाम पर एक अन्य AI-निर्मित फर्जी वीडियो सामने आया था, जिसे जाँच में झूठा पाया गया था। यह वर्ष 2026 में दूसरा ऐसा प्रयास है।
भारतीय सेना और सरकार ने लोगों से क्या अपील की है?
भारतीय सेना ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे किसी वीडियो को बिना आधिकारिक सत्यापन के साझा न करें। सरकार ने भी पहले चेताया है कि AI से बने डीपफेक वीडियो वास्तविक व्यक्तियों की नकल कर झूठी जानकारी फैलाने में सक्षम हैं।
राष्ट्र प्रेस
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