जनरल धीरज सेठ का AI-निर्मित फर्जी वीडियो वायरल, भारतीय सेना ने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा बताकर खारिज किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नाम पर सोशल मीडिया पर एक AI-निर्मित फर्जी वीडियो तेज़ी से प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर उनके हवाले से यह दावा किया गया है कि भारत अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और आईएसकेपी को समर्थन देगा। भारतीय सेना ने 29 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से इस वीडियो को पूरी तरह मनगढ़ंत और पाकिस्तान प्रायोजित प्रोपेगेंडा का हिस्सा बताते हुए खारिज किया है। स्वतंत्र फैक्ट-चेक में भी यही पुष्टि हुई है।
वायरल वीडियो में क्या दावा किया गया
फर्जी वीडियो में जनरल सेठ के हवाले से आरोप लगाया गया कि भारत, पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य इलाकों को निशाना बनाने के लिए चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने की योजना बना रहा है। यह दावे न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि भारत की स्थापित विदेश नीति के भी सर्वथा विपरीत हैं।
सेना के अनुसार, वायरल वीडियो में जनरल धीरज सेठ के एक वास्तविक भाषण के दृश्यों का उपयोग किया गया है। हालाँकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की सहायता से उनकी मूल आवाज़ को बदलकर मनगढ़ंत बयान डाल दिए गए हैं — जिसे तकनीकी भाषा में 'डीपफेक' कहा जाता है।
फैक्ट-चेक में क्या सामने आया
स्वतंत्र फैक्ट-चेकर्स ने मूल भाषण और वायरल वीडियो की तुलना की, जिसमें दोनों के बीच स्पष्ट विसंगतियाँ पाई गईं। AI जाँच उपकरणों ने भी वीडियो और आवाज़ में डिजिटल हेरफेर के अनिभ्रामक संकेत दिए। गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई 2026 में भी जनरल सेठ के नाम से एक अन्य AI-निर्मित वीडियो सामने आया था, जो झूठा पाया गया था। यानी यह दूसरी ऐसी घटना है जब सेना प्रमुख के नाम पर डीपफेक प्रचार का प्रयास हुआ।
पाकिस्तानी सोशल मीडिया नेटवर्क की भूमिका
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान आधारित कई सोशल मीडिया अकाउंट — जिनमें क्वांटम पल्स, टैक्टिकल ट्रिब्यून, इंशाल सिद्दीकी और जरयाब अली720 शामिल हैं — नियमित रूप से भारत और भारतीय सशस्त्र बलों को बदनाम करने के उद्देश्य से मनगढ़ंत सामग्री साझा करते हैं। मौजूदा मामले में असली वीडियो के दृश्य, बनावटी आवाज़, गढ़े हुए बयान और भ्रामक संदर्भ को मिलाकर एक कपटपूर्ण कथानक तैयार किया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में दोनों देशों की सूचना-युद्ध गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक तकनीक अब पारंपरिक प्रोपेगेंडा का सबसे खतरनाक नया हथियार बन चुकी है।
सेना की अपील और सरकार की चेतावनी
भारतीय सेना ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी वीडियो को बिना आधिकारिक सत्यापन के साझा न करें। सरकार पहले भी चेता चुकी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए वीडियो वास्तविक व्यक्तियों की आवाज़ और चेहरे की नकल करके भ्रामक सूचनाएँ फैलाने में सक्षम हैं। सेना की फैक्ट-चेक प्रणाली ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और 'पहले जाँचें, फिर साझा करें' की नीति पर बल दिया है।
आने वाले समय में रक्षा अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस तरह के डीपफेक नेटवर्क के खिलाफ साइबर कूटनीतिक और कानूनी कदम उठाएँगे, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी झूठी सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाई जा सके।