फैक्ट चेक: 15वीं कोर कमांडर को हटाने का दावा झूठा, भारतीय सेना ने AI-निर्मित फर्जी दस्तावेज का भंडाफोड़ किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 2 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक कथित सैन्य आदेश पूरी तरह से AI की मदद से तैयार किया गया फर्जी दस्तावेज है। इस जाली दस्तावेज में दावा किया जा रहा था कि भारतीय सेना की 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उनके पद से हटाकर तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है। सेना ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया और यह दुष्प्रचार पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स से फैलाया गया।
फर्जी दस्तावेज की असलियत
फैक्ट चेक में सामने आया कि प्रसारित दस्तावेज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से तैयार किया गया था। सेना ने इस दस्तावेज में मौजूद भाषा, प्रारूप और अन्य विवरणों में कई स्पष्ट विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया, जिन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। नकली आधिकारिक मुहर, गलत हेडिंग फॉर्मेट और असंगत शब्दावली इस दस्तावेज के फर्जी होने के प्रमुख संकेत थे।
पाकिस्तानी प्रॉपेगेंडा से जोड़ने की कोशिश
सेना के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित प्रॉपेगेंडा अकाउंट्स ने इस फर्जी दस्तावेज को पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी की कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ने का प्रयास किया। इसके जरिए यह भ्रामक माहौल बनाने की कोशिश की गई कि लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उक्त प्रेसवार्ता के बाद 15वीं कोर की कमान से हटाया गया है। यह बात पूरी तरह निराधार और असत्य है।
सेना ने इस दुष्प्रचार के पीछे एक सुनियोजित पैटर्न की पहचान की है — पहले AI से फर्जी दस्तावेज तैयार करना, फिर उन दावों को सच ठहराने के तर्क गढ़ना और अंत में एक साथ कई खातों से नकली आधिकारिक सामग्री का समन्वित प्रसार करना।
लश्कर आतंकी के खात्मे से जोड़ा गया दुष्प्रचार
गौरतलब है कि यह पूरा दुष्प्रचार अभियान उस समय चला जब भारतीय सेना ने 29 सितंबर को एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई बडगाम के यूसमर्ग क्षेत्र में हुई। सेना का कहना है कि इस सफल अभियान के बाद माहौल को भड़काने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तेजी से फैलाए गए।
पहचाने गए पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स
सेना और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संज्ञान में ऐसे कई खातों की जानकारी रखी गई है जिन्होंने एक ही सामग्री को लगभग एक ही समय में प्रसारित किया। इनमें रिटर्नबाबाएस, शैडोफॉक्स11, रिमलैंड इंटेल, खोरासानघाग, वारअपडेट्सपीपी, जरब-ए-जुल्फिकार, कॉन्फ्लिक्टवॉचएक्स, उथमानरूमी2025 और क्रूसिबल0001 जैसे हैंडल्स शामिल हैं। सेना के अनुसार, इन खातों से रात 9:22 बजे से 11:22 बजे IST के बीच एकसमान संदेशों का समन्वित प्रसार किया गया।
सेना की अपील और आगे की राह
भारतीय सेना ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर सैन्य अधिकारियों, सक्रिय अभियानों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी दस्तावेज को बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएं। केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की पृष्ठभूमि में डिजिटल दुष्प्रचार अभियानों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI-जनित नकली दस्तावेजों की पहचान आम नागरिकों के लिए क्रमशः कठिन होती जा रही है, जिससे मीडिया साक्षरता और सतर्कता की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।