2 अक्टूबर 2026
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फैक्ट चेक: 15वीं कोर कमांडर को हटाने का दावा झूठा, भारतीय सेना ने AI-निर्मित फर्जी दस्तावेज का भंडाफोड़ किया

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फैक्ट चेक: 15वीं कोर कमांडर को हटाने का दावा झूठा, भारतीय सेना ने AI-निर्मित फर्जी दस्तावेज का भंडाफोड़ किया

सारांश

पाकिस्तान समर्थित हैंडल्स ने AI से बना नकली सैन्य आदेश फैलाया — दावा था कि 15वीं कोर कमांडर हटाए गए। सेना ने इसे पूरी तरह झूठ बताया। यह दुष्प्रचार उस रात शुरू हुआ जब भारतीय सेना ने लश्कर आतंकी को यूसमर्ग में मार गिराया था।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 2 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि 15वीं कोर के लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को हटाने का दावा पूरी तरह झूठा है।
वायरल दस्तावेज AI की मदद से तैयार किया गया नकली सैन्य आदेश है, जिसमें भाषा, प्रारूप और विवरण में स्पष्ट विसंगतियाँ हैं।
दुष्प्रचार 29 सितंबर को बडगाम के यूसमर्ग में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के खात्मे के बाद शुरू हुआ।
रात 9:22 से 11:22 बजे IST के बीच रिटर्नबाबाएस, शैडोफॉक्स11, जरब-ए-जुल्फिकार सहित कई पाकिस्तानी हैंडल्स ने एक साथ फर्जी सामग्री फैलाई।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इन खातों की जानकारी दे दी गई है।
सेना ने नागरिकों से सैन्य दस्तावेजों को बिना सत्यापन शेयर न करने की अपील की है।

भारतीय सेना ने 2 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक कथित सैन्य आदेश पूरी तरह से AI की मदद से तैयार किया गया फर्जी दस्तावेज है। इस जाली दस्तावेज में दावा किया जा रहा था कि भारतीय सेना की 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उनके पद से हटाकर तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है। सेना ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया और यह दुष्प्रचार पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स से फैलाया गया।

फर्जी दस्तावेज की असलियत

फैक्ट चेक में सामने आया कि प्रसारित दस्तावेज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से तैयार किया गया था। सेना ने इस दस्तावेज में मौजूद भाषा, प्रारूप और अन्य विवरणों में कई स्पष्ट विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया, जिन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। नकली आधिकारिक मुहर, गलत हेडिंग फॉर्मेट और असंगत शब्दावली इस दस्तावेज के फर्जी होने के प्रमुख संकेत थे।

पाकिस्तानी प्रॉपेगेंडा से जोड़ने की कोशिश

सेना के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित प्रॉपेगेंडा अकाउंट्स ने इस फर्जी दस्तावेज को पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी की कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ने का प्रयास किया। इसके जरिए यह भ्रामक माहौल बनाने की कोशिश की गई कि लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उक्त प्रेसवार्ता के बाद 15वीं कोर की कमान से हटाया गया है। यह बात पूरी तरह निराधार और असत्य है।

सेना ने इस दुष्प्रचार के पीछे एक सुनियोजित पैटर्न की पहचान की है — पहले AI से फर्जी दस्तावेज तैयार करना, फिर उन दावों को सच ठहराने के तर्क गढ़ना और अंत में एक साथ कई खातों से नकली आधिकारिक सामग्री का समन्वित प्रसार करना।

लश्कर आतंकी के खात्मे से जोड़ा गया दुष्प्रचार

गौरतलब है कि यह पूरा दुष्प्रचार अभियान उस समय चला जब भारतीय सेना ने 29 सितंबर को एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई बडगाम के यूसमर्ग क्षेत्र में हुई। सेना का कहना है कि इस सफल अभियान के बाद माहौल को भड़काने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तेजी से फैलाए गए।

पहचाने गए पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स

सेना और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संज्ञान में ऐसे कई खातों की जानकारी रखी गई है जिन्होंने एक ही सामग्री को लगभग एक ही समय में प्रसारित किया। इनमें रिटर्नबाबाएस, शैडोफॉक्स11, रिमलैंड इंटेल, खोरासानघाग, वारअपडेट्सपीपी, जरब-ए-जुल्फिकार, कॉन्फ्लिक्टवॉचएक्स, उथमानरूमी2025 और क्रूसिबल0001 जैसे हैंडल्स शामिल हैं। सेना के अनुसार, इन खातों से रात 9:22 बजे से 11:22 बजे IST के बीच एकसमान संदेशों का समन्वित प्रसार किया गया।

सेना की अपील और आगे की राह

भारतीय सेना ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर सैन्य अधिकारियों, सक्रिय अभियानों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी दस्तावेज को बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएं। केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की पृष्ठभूमि में डिजिटल दुष्प्रचार अभियानों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI-जनित नकली दस्तावेजों की पहचान आम नागरिकों के लिए क्रमशः कठिन होती जा रही है, जिससे मीडिया साक्षरता और सतर्कता की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि व्यवस्थित ऑपरेशन था। चिंताजनक यह है कि AI-जनित नकली दस्तावेज अब इतने परिष्कृत हो गए हैं कि साधारण नागरिक तो दूर, प्रशिक्षित पत्रकार भी धोखा खा सकते हैं। भारत सरकार को केवल 'जागरूकता अपील' से आगे बढ़कर ऐसे समन्वित दुष्प्रचार नेटवर्क के विरुद्ध ठोस कानूनी और तकनीकी ढाँचा तैयार करना होगा।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

15वीं कोर कमांडर को हटाने का दावा क्यों फर्जी है?
भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को हटाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। वायरल दस्तावेज AI से तैयार किया गया जाली दस्तावेज है जिसमें भाषा, प्रारूप और आधिकारिक विवरणों में कई विसंगतियाँ पाई गई हैं।
यह फर्जी दस्तावेज कहाँ से और कब फैला?
सेना के अनुसार, यह दस्तावेज 29 सितंबर की रात पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स से रात 9:22 बजे से 11:22 बजे IST के बीच समन्वित तरीके से फैलाया गया। यह समय भारतीय सेना द्वारा बडगाम के यूसमर्ग में लश्कर आतंकी के खात्मे के ठीक बाद का था।
हाशिम मूसा कौन था और सेना ने उसे कैसे मार गिराया?
मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सेना ने 29 सितंबर को बडगाम जिले के यूसमर्ग क्षेत्र में एक संयुक्त अभियान में उसे मार गिराया।
इस दुष्प्रचार में कौन-से सोशल मीडिया हैंडल्स शामिल थे?
सेना ने रिटर्नबाबाएस, शैडोफॉक्स11, रिमलैंड इंटेल, खोरासानघाग, वारअपडेट्सपीपी, जरब-ए-जुल्फिकार, कॉन्फ्लिक्टवॉचएक्स, उथमानरूमी2025 और क्रूसिबल0001 हैंडल्स की पहचान की है। इन सभी ने एक ही सामग्री को एक साथ प्रसारित किया।
नागरिक ऐसे फर्जी सैन्य दस्तावेजों से कैसे सावधान रहें?
भारतीय सेना ने अपील की है कि सैन्य अधिकारियों, अभियानों या सुरक्षा से जुड़े किसी भी दस्तावेज को सत्यापन के बिना शेयर न करें। केवल सेना की आधिकारिक वेबसाइट, PIB या सत्यापित सरकारी माध्यमों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।
राष्ट्र प्रेस
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