'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' का वायरल पत्र फर्जी, पीआईबी फैक्ट चेक ने किया खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने बुधवार, 17 जून 2026 को सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रहे एक पत्र को पूरी तरह फर्जी घोषित किया। इस कथित पत्र में दावा किया गया था कि इसे रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' की तैयारियों के संदर्भ में जारी किया है। पीआईबी ने स्पष्ट किया कि न रक्षा सचिव ने और न ही रक्षा मंत्रालय ने ऐसा कोई दस्तावेज़ जारी किया है।
क्या था वायरल दावा
सोशल मीडिया पर प्रसारित उस कथित दस्तावेज़ का शीर्षक था — 'विषय: ऑपरेशन सिंदूर 2.0; प्रधानमंत्री का निर्देश, रणनीतिक उद्देश्य।' दस्तावेज़ को रक्षा सचिव के नाम से जारी बताया जा रहा था और इसमें एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारियों का उल्लेख था। यह पत्र एक्स (पूर्व में ट्विटर) सहित कई प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से वायरल हो गया था।
पीआईबी फैक्ट चेक की प्रतिक्रिया
पीआईबी फैक्ट चेक ने एक्स पर पोस्ट कर इस दस्तावेज़ की तस्वीर साझा की और साफ शब्दों में कहा, 'यह लेटर फर्जी है।' यूनिट ने नागरिकों को चेताया कि वे सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि की जानकारी पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे शेयर करें। यूनिट ने कहा, 'फर्जी खबरों पर भरोसा न करें! ऑनलाइन फैल रही भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहें और हमेशा भरोसेमंद आधिकारिक स्रोतों पर निर्भर रहें।'
आम नागरिकों पर असर
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस तरह के फर्जी दस्तावेज़ समाज में भय और भ्रम पैदा करने की क्षमता रखते हैं। गौरतलब है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' पहले से ही एक संवेदनशील और चर्चित विषय रहा है, जिसके चलते इस नाम से जुड़ी कोई भी सूचना तेज़ी से वायरल होने की आशंका रहती है। पीआईबी ने नागरिकों से अपील की कि वे भारत सरकार से जुड़ी किसी भी संदिग्ध जानकारी की रिपोर्ट पीआईबी फैक्ट चेक पोर्टल पर करें।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब पीआईबी फैक्ट चेक को इस तरह के फर्जी दावों का भंडाफोड़ करना पड़ा हो। इससे पहले यूनिट ने एक वायरल दावे को भी गलत बताया था, जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जजों के साथ लंदन में एक बैडमिंटन इवेंट में हिस्सा लेने जा रहे हैं। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि सरकारी हस्तियों और संवेदनशील विषयों को निशाना बनाकर फर्जी सूचनाएँ फैलाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
क्या होगा आगे
पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना पुष्टि के फैलने वाले दावों की निगरानी जारी रखेगी। नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी सरकारी आदेश या पत्र की प्रामाणिकता जाँचने के लिए केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों और चैनलों पर भरोसा करें।