जनरल धीरज सेठ को हटाने का दावा झूठा: भारतीय सेना ने पाकिस्तानी दुष्प्रचार का किया खंडन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 14 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को पद से हटाए जाने संबंधी सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे पूरी तरह मनगढ़ंत और निराधार हैं। सेना ने इन्हें पाकिस्तान समर्थित अकाउंट्स द्वारा संचालित सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा बताया है। सेना के अनुसार, इस फर्जी अभियान का उद्देश्य सैन्य नेतृत्व को लेकर भ्रम फैलाना और सेना के भीतर आंतरिक मतभेदों की झूठी धारणा बनाना है।
क्या था वायरल दावा
सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्टों में यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कथित बयान देने के कारण जनरल धीरज सेठ को सेना प्रमुख पद से हटाने की तैयारी कर रहे हैं। इन पोस्टों में यह भी दावा किया गया कि सेना के अधिकारियों को सेना प्रमुख के आदेशों की अवहेलना करने के निर्देश दिए गए हैं।
भारतीय सेना के फैक्ट-चेक संदेश के अनुसार, ये दावे किसी भी आधार पर सत्य नहीं हैं और इन्हें जानबूझकर सेना की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाने के इरादे से फैलाया गया है।
संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान
सेना ने इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी अवगत कराया है। फैक्ट-चेक संदेश में इंडियनतिवारी01 और दीक्षाशर्मा03 नाम के सोशल मीडिया खातों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। सेना के अनुसार, ये खाते भारत के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को लेकर भ्रामक और आपत्तिजनक आरोप प्रसारित कर रहे हैं।
इससे पहले भी हो चुका है ऐसा प्रयास
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान समर्थित खातों ने भारतीय सेना के खिलाफ इस तरह का दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश की हो। कुछ दिन पूर्व ही सोशल मीडिया पर एक कथित सैन्य दस्तावेज प्रसारित किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि भारतीय सेना की 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उनके पद से हटाकर तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है।
सेना ने उस दस्तावेज को भी पूरी तरह फर्जी घोषित किया था। जाँच में सामने आया कि पाकिस्तान समर्थित प्रॉपेगेंडा अकाउंट्स ने उस जाली दस्तावेज को पाकिस्तान के किसी सैन्य अधिकारी की कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ने की कोशिश की थी — ताकि यह आभास हो कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद भारतीय सेना में बदलाव हुए। यह सूचना भी पूरी तरह निराधार पाई गई थी।
सेना की नागरिकों से अपील
भारतीय सेना ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे तीन प्रकार की सामग्री को बिना सत्यापन के साझा न करें: अपुष्ट राजनीतिक आरोप, सैन्य आदेशों की अवहेलना से जुड़े मनगढ़ंत दावे और सेना में आंतरिक मतभेदों की झूठी कहानियाँ। सेना का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी जानकारी को आगे साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि अवश्य की जाए।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच डिजिटल सूचना युद्ध के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाने वाले ऐसे दुष्प्रचार अभियान जनमानस में अविश्वास पैदा करने और सेना की जनसमर्थन-आधार को कमजोर करने के व्यापक रणनीतिक उद्देश्य से संचालित किए जाते हैं।