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भारतीय सेना पर फर्जी खबर: पाकिस्तानी अकाउंट ने जामिया के पुराने वीडियो को गलत संदर्भ में फैलाया

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भारतीय सेना पर फर्जी खबर: पाकिस्तानी अकाउंट ने जामिया के पुराने वीडियो को गलत संदर्भ में फैलाया

सारांश

पाकिस्तान से जुड़े अकाउंट ने जामिया मिल्लिया के 17 अक्टूबर के पुराने विरोध प्रदर्शन के वीडियो को 23 अक्टूबर की सेना कार्रवाई बताया, दो मौतों का झूठा दावा जोड़ा, और सेना को जेन-ज़ी विरोधी बताने की कोशिश की। भारतीय सेना की तथ्य-जांच इकाई ने इसे पूरी तरह खारिज किया।

मुख्य बातें

भारतीय सेना की तथ्य-जांच इकाई ने 23 अक्टूबर 2026 को एक फर्जी दावे का खंडन किया।
वायरल वीडियो 23 अक्टूबर का नहीं, बल्कि 17 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शन का है।
फर्जी पोस्ट में दो मौतों और सात घायलों का झूठा दावा किया गया; वास्तविक घटना में कोई हताहत नहीं था।
पोस्ट 'इंडियन तिवारी 011' अकाउंट से फैलाई गई, जिसे सेना ने पाकिस्तान से जुड़ा बताया।
यह अकाउंट पहले बंद हो चुके 'इंडियन तिवारी 01' का वैकल्पिक संस्करण बताया गया है।
सेना ने नागरिकों से सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने से पहले सत्यापन की अपील की।

भारतीय सेना की तथ्य-जांच इकाई ने 23 अक्टूबर 2026 को एक संगठित दुष्प्रचार अभियान का भंडाफोड़ किया, जिसमें पाकिस्तान से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के एक पुराने विरोध प्रदर्शन के वीडियो को सेना की कार्रवाई बताकर साझा किया। इस झूठे दावे में कहा गया कि सेना ने 'कॉकरोच पार्टी' के खिलाफ अभियान चलाया जिसमें दो युवाओं की मौत हुई और सात अन्य घायल हुए — जबकि सेना के अनुसार यह दावा पूर्णतः निराधार और मनगढ़ंत है।

वीडियो की असलियत क्या है

सेना की जांच के अनुसार, वायरल पोस्ट के साथ साझा किया गया वीडियो 23 अक्टूबर का नहीं, बल्कि 17 अक्टूबर 2026 का है। यह वीडियो नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में यूनियन की बहाली की माँग को लेकर चल रही भूख हड़ताल के दौरान हुई घटना से संबंधित है। वीडियो में स्थानीय सुरक्षा एजेंसी के कर्मियों को स्थिति संभालते देखा जा सकता है — सेना की कोई उपस्थिति या तैनाती उस घटनास्थल पर नहीं थी।

गौरतलब है कि 17 अक्टूबर को जामिया परिसर में हुई उस घटना में किसी के हताहत होने की कोई पुष्ट सूचना नहीं थी, जबकि फर्जी पोस्ट में दो मौतों और सात घायलों का अपुष्ट दावा जोड़ा गया।

दुष्प्रचार का तरीका

सेना ने इस दुष्प्रचार अभियान की कार्यप्रणाली का विस्तार से खुलासा किया है। पहले एक पुरानी घटना का वीडियो चुना गया, फिर उसे नई और हिंसक घटना बताकर पेश किया गया। इसके बाद मृत्यु और घायलों के अपुष्ट आँकड़े जोड़े गए और अंततः पूरे मामले को भारतीय सेना की कार्रवाई से जोड़ दिया गया।

इस पोस्ट में एक और झूठा कोण भी शामिल था — यह धारणा फैलाने की कोशिश की गई कि सेना जेन-ज़ी यानी नई पीढ़ी के युवाओं के विरुद्ध खड़ी हो गई है। यह कोण स्पष्ट रूप से सेना और युवा वर्ग के बीच अविश्वास उत्पन्न करने के इरादे से जोड़ा गया था।

अकाउंट की पहचान

भारतीय सेना की तथ्य-जांच इकाई के अनुसार, यह भ्रामक पोस्ट 'इंडियन तिवारी 011' नामक अकाउंट से प्रसारित की गई, जिसे पाकिस्तान से जुड़ा बताया गया है। उल्लेखनीय यह है कि इससे पहले 'इंडियन तिवारी 01' नाम का एक अकाउंट अफवाहें फैलाने के कारण रोका जा चुका था।

सेना ने 'इंडियन तिवारी 011' को उसी बंद अकाउंट का वैकल्पिक संस्करण बताया है। यह इस बात का संकेत है कि संबंधित संचालकों ने पुराने अकाउंट पर प्रतिबंध के बाद तुरंत नया अकाउंट बनाकर अभियान जारी रखा। भारतीय नाम का उपयोग कर भारत के भीतर से संचालन का भ्रम देना इस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

सेना की अपील और आगे की राह

भारतीय सेना ने नागरिकों से आग्रह किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या खबर को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की स्वतंत्र जाँच करें। सेना ने स्पष्ट किया कि केवल वीडियो देखकर उसके समय, स्थान या उसमें दिखाई देने वाली घटना के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान सेना से जुड़ी फर्जी खबरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैलती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गलत संदर्भ में पेश किया गया वास्तविक वीडियो भी समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा करने में उतना ही प्रभावी होता है जितना पूरी तरह मनगढ़ंत कंटेंट। इस मामले में सेना की त्वरित तथ्य-जाँच ने आगे होने वाले संभावित नुकसान को रोकने का प्रयास किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सोची-समझी सूचना युद्ध की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है — पहले अकाउंट बंद हो, फिर नया खुले, और अभियान जारी रहे। चिंताजनक यह है कि पुराने 'इंडियन तिवारी 01' के बंद होने के बावजूद '011' वर्जन तुरंत सक्रिय हो गया, जो दर्शाता है कि मंच-स्तरीय प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। जामिया जैसे संवेदनशील परिसरों से जुड़े वीडियो को सेना की हिंसा से जोड़ना स्पष्ट रूप से सामाजिक ध्रुवीकरण का प्रयास है। सेना की त्वरित तथ्य-जाँच सराहनीय है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए सोशल मीडिया मंचों को ऐसे समन्वित अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ अधिक सक्रिय और स्थायी कार्रवाई करनी होगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना पर वायरल हो रही फर्जी खबर का सच क्या है?
भारतीय सेना की तथ्य-जांच इकाई के अनुसार, पाकिस्तान से जुड़े एक अकाउंट ने 17 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो को 23 अक्टूबर की सेना कार्रवाई बताकर साझा किया। इस पोस्ट में दो मौतों और सात घायलों का दावा किया गया जो पूरी तरह निराधार है।
जामिया मिल्लिया का वह वीडियो किस घटना से जुड़ा था?
यह वीडियो 17 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में यूनियन की बहाली की माँग को लेकर चल रही भूख हड़ताल के दौरान की घटना से संबंधित है। उस दिन स्थानीय सुरक्षा एजेंसी के कर्मी मौजूद थे, सेना की कोई तैनाती नहीं थी और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी।
'इंडियन तिवारी 011' अकाउंट क्या है?
भारतीय सेना ने 'इंडियन तिवारी 011' को पाकिस्तान से जुड़ा अकाउंट बताया है जिसने यह फर्जी पोस्ट फैलाई। यह उसी 'इंडियन तिवारी 01' अकाउंट का वैकल्पिक संस्करण है जिसे इससे पहले अफवाहें फैलाने के कारण रोका जा चुका था।
इस दुष्प्रचार का मकसद क्या था?
सेना के अनुसार, इस पोस्ट का उद्देश्य दो स्तरों पर भ्रम फैलाना था — पहला, सेना को हिंसक कार्रवाई से जोड़ना, और दूसरा, यह धारणा बनाना कि सेना जेन-ज़ी यानी नई पीढ़ी के युवाओं के खिलाफ है। भारतीय नाम वाले अकाउंट का उपयोग घरेलू स्रोत का भ्रम पैदा करने के लिए किया गया।
सेना ने नागरिकों को क्या सलाह दी है?
भारतीय सेना ने अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या खबर को साझा करने से पहले उसकी सत्यता स्वतंत्र रूप से जाँचें। सेना ने विशेष रूप से कहा कि केवल वीडियो देखकर उसके समय, स्थान या घटना के बारे में निष्कर्ष न निकालें, क्योंकि गलत संदर्भ में पेश किया गया वास्तविक वीडियो भी समाज में भ्रम उत्पन्न कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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