29 अक्टूबर 2026
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जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने GFCB की 19वीं बैठक में गंगा बेसिन बाढ़ नियंत्रण योजनाओं की समीक्षा की

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जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने GFCB की 19वीं बैठक में गंगा बेसिन बाढ़ नियंत्रण योजनाओं की समीक्षा की

सारांश

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने GFCB की 19वीं बैठक में गंगा बेसिन की बाढ़ और कटाव समस्याओं पर राज्यों के साथ उच्च-स्तरीय समीक्षा की। जोखिम-आधारित मास्टर प्लान, आधुनिक तकनीक और केंद्र-राज्य समन्वय पर बल — करोड़ों बेसिन निवासियों के लिए अहम कदम।

मुख्य बातें

जल शक्ति मंत्री सी.आर.
पाटिल ने 29 अक्टूबर 2026 को GFCB की 19वीं बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान , DPR गुणवत्ता सुधार और आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया।
पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित गंगा बेसिन राज्यों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और केंद्रीय अधिकारी बैठक में शामिल हुए।
मंत्री ने रिवर मॉर्फोलॉजी , जल निकासी, फ्लड रेजिलिएंस और केंद्र-राज्य समन्वय को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
GFCB केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में गंगा बेसिन बाढ़ प्रबंधन के लिए उच्च-स्तरीय संस्थागत मंच के रूप में कार्य करता है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (GFCB) की 19वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए गंगा बेसिन में बाढ़, कटाव और जल निकासी की समस्याओं से निपटने के लिए तैयार योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब देश के कई गंगा बेसिन राज्य हर वर्ष मानसून के दौरान भयावह बाढ़ की चपेट में आते हैं और दीर्घकालिक संरचनात्मक समाधान की माँग लंबे समय से उठती रही है।

बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

अधिकारियों के बयान के अनुसार, मंत्री पाटिल ने बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। इनमें जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान तैयार करना, पुलों के नीचे जलमार्गों और वेंटवे की पर्याप्तता का आकलन करना, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की गुणवत्ता में सुधार लाना, बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं को समय पर लागू करना और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना शामिल था।

मंत्री ने रिवर मॉर्फोलॉजी (नदी की संरचना), जल निकासी की पुरानी समस्याओं, बुनियादी ढाँचे के विकास और बाढ़ से निपटने की दीर्घकालिक क्षमता (फ्लड रेजिलिएंस) से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का निर्देश दिया।

केंद्र-राज्य समन्वय पर विशेष जोर

बैठक में पाटिल ने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि एक एकीकृत, जोखिम-आधारित और तकनीक-सक्षम दृष्टिकोण के बिना बाढ़ प्रबंधन की कोई भी योजना प्रभावी नहीं हो सकती। गौरतलब है कि गंगा बेसिन उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से होकर गुजरता है, जहाँ बाढ़ का प्रभाव करोड़ों लोगों की आजीविका पर पड़ता है।

मंत्री ने आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों, ठोस तकनीकी जाँच, आवश्यक कानूनी मंजूरियों और परियोजनाओं को लागू करने में आने वाली बाधाओं को समय रहते दूर करने के महत्व को भी रेखांकित किया।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस उच्च-स्तरीय बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य के. वी. राजू, बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, गंगा बेसिन राज्यों के प्रतिनिधि, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

GFCB की भूमिका और महत्व

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता वाला गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड केंद्र-राज्य सहयोग को सुदृढ़ करने और गंगा बेसिन में बाढ़ प्रबंधन के लिए समन्वित नीति निर्माण हेतु एक उच्च-स्तरीय संस्थागत मंच के रूप में कार्य करता है। यह बोर्ड राज्यों की परियोजना योजनाओं की समीक्षा करता है और केंद्रीय वित्त पोषण के लिए सिफारिशें करता है।

आगे की राह

इस बैठक में चल रही पहलों की समीक्षा, राज्यों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन के लिए नए तौर-तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जोखिम-आधारित मास्टर प्लान और तकनीकी नवाचारों को ज़मीन पर लागू करने की गति यह तय करेगी कि आने वाले मानसून सत्रों में गंगा बेसिन के करोड़ों निवासियों को राहत मिल पाएगी या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राज्यों के बीच समन्वय की खाई और कानूनी मंजूरियों में देरी परियोजनाओं की असली अड़चन बनती रही है। असली कसौटी यह होगी कि इस बैठक के निर्देश अगले मानसून से पहले कितनी परियोजनाओं को ज़मीन पर उतारते हैं।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GFCB की 19वीं बैठक में क्या हुआ?
29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने गंगा बेसिन में बाढ़, कटाव और जल निकासी की समस्याओं से निपटने की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की। बैठक में जोखिम-आधारित मास्टर प्लान, DPR गुणवत्ता और आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया गया।
गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (GFCB) क्या है?
GFCB केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में काम करने वाला एक उच्च-स्तरीय संस्थागत मंच है, जो केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत करता है और गंगा बेसिन में बाढ़ प्रबंधन के लिए समन्वित नीति बनाने में मदद करता है। यह राज्यों की परियोजनाओं की समीक्षा और केंद्रीय वित्त पोषण की सिफारिश भी करता है।
बैठक में किन राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए?
बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और गंगा बेसिन के अन्य राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा नीति आयोग और केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
बाढ़ प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग क्यों जरूरी है?
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकें और तकनीक-सक्षम दृष्टिकोण परियोजनाओं की सटीकता और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं। रिवर मॉर्फोलॉजी और वेंटवे की पर्याप्तता के आकलन के लिए भी आधुनिक तकनीक आवश्यक है, जो पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है।
गंगा बेसिन में बाढ़ नियंत्रण के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
बैठक में चल रही पहलों की समीक्षा, राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने और नए तरीकों पर विचार किया गया। प्राथमिकता में जोखिम-आधारित मास्टर प्लान, DPR गुणवत्ता सुधार, कानूनी मंजूरियों में तेजी और परियोजनाओं की बाधाओं को समय पर दूर करना शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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