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गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 19वीं बैठक: सीआर पाटिल ने 'पुनः भरण मोबाइल ऐप' लॉन्च किया

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गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 19वीं बैठक: सीआर पाटिल ने 'पुनः भरण मोबाइल ऐप' लॉन्च किया

सारांश

गंगा बेसिन में बाढ़ और भूजल संकट से निपटने की दिशा में एक ठोस कदम — जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने भारत मंडपम में 19वीं GFCB बैठक में 'पुनः भरण मोबाइल ऐप' लॉन्च किया और बोर्ड के पुनर्गठन पर सहमति बनी।

मुख्य बातें

गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (GFCB) की 19वीं बैठक 27 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में हुई।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने भूजल पुनर्भरण हेतु 'पुनः भरण मोबाइल ऐप' लॉन्च किया।
ऐप को राष्ट्रीय जल मिशन के सहयोग से भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान ने विकसित किया।
बैठक में पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और नीति आयोग के सदस्य उपस्थित रहे।
गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के संशोधित कार्यादेश, पुनर्गठन और जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान पर सहमति बनी।
GFCB की स्थापना 18 अप्रैल 1972 को गंगा बेसिन में बाढ़, कटाव और जल निकासी समस्याओं के समन्वित समाधान के लिए हुई थी।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (GFCB) की 19वीं बैठक 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में संपन्न हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में गंगा बेसिन से जुड़े राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित एजेंसियाँ शामिल हुईं। बैठक में भूजल पुनर्भरण, बाढ़ प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के एकीकरण पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

प्रमुख उपस्थिति और संस्थागत महत्व

बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य प्रो. के. वी. राजू, बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी तथा उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि GFCB का गठन केंद्र सरकार द्वारा 18 अप्रैल 1972 को गंगा बेसिन में बाढ़, कटाव और जल निकासी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित योजना बनाने और उनके क्रियान्वयन को सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया था। यह बोर्ड केंद्र और राज्यों के बीच उच्चस्तरीय संस्थागत समन्वय का मंच है।

'पुनः भरण मोबाइल ऐप' का शुभारंभ

बैठक की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही 'पुनः भरण मोबाइल ऐप' का शुभारंभ, जिसे केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने लॉन्च किया। यह ऐप राष्ट्रीय जल मिशन के सहयोग से भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान द्वारा विकसित किया गया है।

ऐप का मुख्य उद्देश्य भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थलों की वैज्ञानिक पहचान में सहायता प्रदान करना है। यह ऐसे समय में आया है जब गंगा बेसिन के कई हिस्सों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट एक गंभीर चिंता बनी हुई है।

बोर्ड के पुनर्गठन और कार्यादेश पर चर्चा

बोर्ड ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के संशोधित कार्यादेश और पुनर्गठन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। संशोधित ढाँचे में बेसिन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन योजना को सुदृढ़ करना, बाढ़ प्रबंधन योजनाओं का मूल्यांकन, नदी की आकृति एवं अवसादन संबंधी अध्ययन और बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली का विकास शामिल है।

इन संशोधित संस्थागत व्यवस्थाओं से समन्वय, तकनीकी मूल्यांकन और समयबद्ध निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार होने की उम्मीद जताई गई।

आधुनिक तकनीक और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण

बैठक में जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान तैयार करने, पुलों के नीचे जलमार्गों की पर्याप्तता का आकलन करने और विस्तृत परियोजना रिपोर्टों की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष ज़ोर दिया गया। आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों, सुदृढ़ तकनीकी जाँच और आवश्यक वैधानिक मंजूरियों को समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

नदी की आकृति में बदलाव, जल निकासी में अवरोध, बुनियादी ढाँचे के विकास और बाढ़ से निपटने की क्षमता बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर केंद्र-राज्य स्तर पर बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर सहमति बनी।

आगे की राह

बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि गंगा बेसिन में बाढ़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समन्वित, जोखिम-आधारित और आधुनिक तकनीकों से समर्थित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। बाढ़ नियंत्रण उपायों का समयबद्ध और समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संस्थागत सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 19वीं बैठक में 'पुनः भरण ऐप' और बोर्ड के पुनर्गठन का एक साथ आना इस क्षेत्र में तकनीकी-संस्थागत दृष्टिकोण की ओर बदलाव का संकेत देता है। असली परीक्षा यह है कि ऐप-आधारित स्थल-पहचान ज़मीनी स्तर पर कृत्रिम पुनर्भरण परियोजनाओं में कितनी तेज़ी से तब्दील होती है, क्योंकि अतीत में तकनीकी घोषणाएँ क्रियान्वयन में पिछड़ती रही हैं। बहु-राज्यीय समन्वय की ज़रूरत — उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य — इस पहल को प्रशंसनीय बनाती है, पर उतनी ही जटिल भी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (GFCB) की 19वीं बैठक कब और कहाँ हुई?
GFCB की 19वीं बैठक 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें गंगा बेसिन राज्यों के वरिष्ठ मंत्री और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल हुए।
'पुनः भरण मोबाइल ऐप' क्या है और इसे किसने बनाया?
'पुनः भरण मोबाइल ऐप' भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थलों की वैज्ञानिक पहचान में सहायता करने वाला एक डिजिटल उपकरण है। इसे राष्ट्रीय जल मिशन के सहयोग से भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान ने विकसित किया है।
गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड का गठन कब और क्यों हुआ था?
GFCB का गठन केंद्र सरकार ने 18 अप्रैल 1972 को किया था। इसका उद्देश्य गंगा बेसिन में बाढ़, कटाव और जल निकासी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित योजना बनाना और उनके क्रियान्वयन को सुगम बनाना है।
बैठक में गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के पुनर्गठन पर क्या निर्णय हुआ?
बोर्ड ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के संशोधित कार्यादेश और पुनर्गठन पर विचार-विमर्श किया। इसमें बेसिन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन योजना को सुदृढ़ करना, बाढ़ प्रबंधन योजनाओं का मूल्यांकन, नदी की आकृति एवं अवसादन अध्ययन और बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली का विकास शामिल है।
इस बैठक में किन नई पहलों पर ज़ोर दिया गया?
बैठक में जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान, पुलों के नीचे जलमार्गों की पर्याप्तता का आकलन, आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ज़ोर दिया गया। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।
राष्ट्र प्रेस
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