सेंसेक्स 905 अंक उछला, 74,151 पर बंद; रियल्टी-FMCG सेक्टर में सबसे तेज़ उछाल
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को 905.01 अंक (1.24 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 74,151.04 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 237.90 अंक (1.05 प्रतिशत) की मज़बूती के साथ 22,936.75 पर बंद हुआ। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और संस्थागत निवेशकों की वापसी ने बाज़ार को व्यापक समर्थन दिया।
सूचकांकों का प्रदर्शन
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 566.95 अंक (0.99 प्रतिशत) की तेज़ी के साथ 57,841.65 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 176.45 अंक (0.95 प्रतिशत) की मज़बूती के साथ 18,811.35 पर बंद हुआ। मिड-कैप और स्मॉल-कैप दोनों वर्गों में तेज़ी बाज़ार की चौड़ाई में सुधार का संकेत देती है।
सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी (2.75 प्रतिशत) सबसे आगे रहा, इसके बाद निफ्टी FMCG (2.34 प्रतिशत), निफ्टी PSU बैंक (2.20 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज़ (1.61 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (1.24 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (1.18 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.18 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ (1.17 प्रतिशत) और निफ्टी PSE (1.15 प्रतिशत) रहे। केवल निफ्टी ऑटो (0.24 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स के प्रमुख गेनर और लूज़र
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, इटरनल, बजाज फाइनेंस, HUL, SBI, टाइटन, NTPC, BEL, इन्फोसिस, ITC, भारती एयरटेल, M&M, L&T, TCS, ICICI बैंक, HCL टेक और बजाज फिनसर्व प्रमुख लाभ में रहे। दूसरी ओर, ट्रेंट, मारुति सुज़ुकी, टेक महिंद्रा और HDFC बैंक घाटे में बंद हुए।
विशेषज्ञों की राय
बाज़ार जानकारों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विराम लगाने के संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी ने घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। मज़बूत उपभोक्ता माँग के चलते FMCG सेक्टर ने सर्वाधिक बढ़त दर्ज़ की। फाइनेंशियल, IT, रियल्टी और पावर सेक्टर में भी उल्लेखनीय सुधार रहा।
जानकारों ने यह भी कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हालिया वापसी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के निरंतर समर्थन से बाज़ार में तरलता (लिक्विडिटी) की स्थिति बेहतर हुई है। कंपनियों की कमाई में लचीलापन और घरेलू माँग में स्थिरता सकारात्मक संकेत हैं।
प्रमुख जोखिम बरकरार
हालाँकि बाज़ार में तेज़ी रही, लेकिन जानकारों ने चेताया कि ब्रेंट क्रूड की ऊँची कीमतें, रुपये में कमज़ोरी, घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। इसके अलावा, इनपुट लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका है। गौरतलब है कि बाहरी माहौल अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, और वैश्विक संकेतों पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।