केरल हाईकोर्ट ने जज की गिरफ्तारी पर रोक लगाई, बेटे की कार से स्कूटर सवार की हुई थी मौत
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को कोच्चि के चेरानेल्लूर सड़क हादसे में आरोपी बनाए गए एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। इस हादसे में न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से एक स्कूटर सवार की जान चली गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह दुर्घटना 25 अक्टूबर 2026 को तड़के रात करीब 2 बजकर 20 मिनट पर कोच्चि के चेरानेल्लूर कंटेनर रोड पर हुई। आरोप है कि नाबालिग द्वारा चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार ने एक स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
संबंधित न्यायाधीश त्रिशूर जिले के इरिंजालाकुडा स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में कार्यरत हैं। अपनी अग्रिम जमानत याचिका में उन्होंने दावा किया कि हादसे के समय वह घर पर सो रहे थे और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनकी कार बाहर ले जाई गई है। उनके अनुसार फोन पर सूचना मिलने पर ही उन्हें पता चला कि उनका बेटा उनकी अनुमति के बिना गाड़ी लेकर निकला था।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने न्यायाधीश की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को अगले आदेश तक गिरफ्तारी से रोक दिया। अदालत ने न्यायाधीश को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि पूछताछ सर्वोच्च न्यायालय के निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार ही की जाए।
हाईकोर्ट ने जांच दल से सीधे सवाल पूछा — 'उन्हें चार घंटे तक पूछताछ करने की क्या जरूरत थी और अब आगे पूछताछ क्यों की जा रही है? उनकी गिरफ्तारी क्यों जरूरी है? वह एक न्यायिक अधिकारी हैं और जांच में सहयोग करेंगे।' अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम राहत देते समय उसे कानून के प्रावधानों के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा।
पक्ष-विपक्ष के तर्क
न्यायाधीश की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विजया भानु ने बताया कि उनके मुवक्किल बुधवार को स्वयं पुलिस के सामने पेश हुए थे और उनसे चार घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। उन्होंने तर्क दिया कि जांच में पूर्ण सहयोग दिए जाने की स्थिति में गिरफ्तारी अनावश्यक है।
दूसरी तरफ, पीड़ित के कानूनी वारिसों की ओर से पेश अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद न्यायाधीश ने सबूतों से छेड़छाड़ की, जो उनकी गिरफ्तारी को जरूरी बनाती है।
कानूनी धाराएँ और किशोर की जमानत
इस मामले में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 लगाई गई है, जो गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है। इसके अलावा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A भी लगाई गई है, जो किशोरों द्वारा किए गए अपराधों में अभिभावकों और वाहन मालिकों की जवाबदेही तय करती है।
किशोर न्याय बोर्ड ने 26 अक्टूबर को आरोपी नाबालिग को जमानत दे दी थी। हालाँकि, राज्य सरकार की ओर से नाबालिग की जमानत रद्द करने की माँग वाली याचिका सत्र न्यायालय में अभी भी लंबित है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने इस मामले में केरल राज्य सरकार से भी जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत का रुख और राज्य का पक्ष, दोनों इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे की दिशा तय करेंगे। यह मामला न्यायपालिका के भीतर जवाबदेही और न्यायिक अधिकारियों पर लागू कानूनी प्रक्रिया के व्यापक सवाल भी खड़े करता है।