चेरानल्लूर हादसा: जांच में लापरवाही पर केरल पुलिस के 4 अधिकारी निलंबित, जज का नाबालिग बेटा था चालक
सारांश
मुख्य बातें
केरल पुलिस ने 27 अक्टूबर 2026 को कोच्चि के चेरानल्लूर में हुए घातक सड़क हादसे की जांच में गंभीर चूक बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। 25 अक्टूबर की रात इस हादसे में 55 वर्षीय जया बालकृष्णन की मौत हो गई थी, जिन्हें एक मर्सिडीज-बेंज ने टक्कर मार दी थी। यह कार कथित तौर पर एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे द्वारा चलाई जा रही थी।
मुख्य घटनाक्रम
दुर्घटना 25 अक्टूबर की रात करीब 2:20 बजे कोच्चि के पास चेरानल्लूर कंटेनर रोड पर हुई। जया बालकृष्णन सड़क किनारे अपनी खाने-पीने की दुकान बंद करके स्कूटर से घर लौट रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज ने उन्हें टक्कर मार दी। पुलिस के अनुसार, वाहन त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा की अदालत में तैनात एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के नाम पर पंजीकृत है।
शुरुआत में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत लापरवाही से वाहन चलाने और लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया। बाद में BNS की धारा 105, जो गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है, भी जोड़ी गई।
निलंबित पुलिसकर्मी और वरिष्ठ अधिकारी की जांच
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में सीआई श्याम कुमार, स्टेशन हाउस ऑफिसर विश्वजीत, ग्रेड एसआई मनोज और सिविल पुलिस ऑफिसर अरुणजीत शामिल हैं। यह कार्रवाई एडीजीपी पी. विजयन के घटनास्थल पर पहुँचने और निरीक्षण करने के बाद हुई। इसके बाद वे पीड़ित के परिवार से मिले और जांच टीम के साथ विस्तृत चर्चा की।
गौरतलब है कि गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने मंगलवार को केरल विधानसभा में स्वयं स्वीकार किया कि इस दुर्घटना की जांच में पुलिस से गलतियाँ हुईं। यह स्वीकारोक्ति विपक्षी दलों और पीड़ित परिवार की लगातार बढ़ती माँग के बाद आई।
न्यायिक अधिकारी पर कार्रवाई
कोच्चि सिटी पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत संबंधित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को भी आरोपी बनाया है, क्योंकि दुर्घटना में शामिल कार उन्हीं के नाम पर पंजीकृत है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि कोई नाबालिग मोटर वाहन से जुड़ा अपराध करता है तो वाहन का मालिक या अभिभावक जिम्मेदार ठहराया जा सकता है — हालाँकि इसमें कुछ कानूनी अपवाद भी हैं।
पुलिस ने बताया कि न्यायिक अधिकारी के खिलाफ यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप उठाया जा रहा है। इस संबंध में जिला न्यायपालिका और केरल उच्च न्यायालय को भी सूचित किया जाएगा। इस बीच, सोमवार को एर्नाकुलम स्थित किशोर न्याय बोर्ड ने 17 वर्षीय आरोपी को जमानत दे दी।
सार्वजनिक आक्रोश और राजनीतिक दबाव
पीड़ित परिवार और कई राजनीतिक एवं युवा संगठनों ने जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की माँग की थी। व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को कार्रवाई करने पर विवश किया। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में प्रभावशाली परिवारों से जुड़े सड़क हादसों में पुलिस की तटपरता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे की राह
यह मामला एक बड़े सवाल को उजागर करता है — जब किसी घातक दुर्घटना में न्यायिक अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति का परिवार संलिप्त हो, तो पुलिस की निष्पक्षता और कानून का समान प्रयोग कितना सुनिश्चित हो पाता है। आलोचकों का कहना है कि यह निलंबन जनदबाव की प्रतिक्रिया है, न कि पुलिस की स्वतःस्फूर्त जवाबदेही का प्रमाण। अब सभी की नज़रें न्यायिक और विभागीय जांच के परिणाम पर टिकी हैं।