29 अक्टूबर 2026
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बाबा रामदेव का बड़ा ऐलान: सनातन ग्रंथों की मिलावट हटाई जाएगी, वेद जातिभेद नहीं सिखाते

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बाबा रामदेव का बड़ा ऐलान: सनातन ग्रंथों की मिलावट हटाई जाएगी, वेद जातिभेद नहीं सिखाते

सारांश

बाबा रामदेव ने हरिद्वार में एलान किया कि मुगल-ब्रिटिश काल की मिलावट से सनातन ग्रंथों को शुद्ध किया जाएगा। शंकराचार्यों और जगद्गुरुओं की अध्यक्षता में विद्वानों की समिति स्मृतियों, पुराणों, रामायण और महाभारत का परिशोधन करेगी। रामदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि वेद किसी प्रकार के जातिभेद का समर्थन नहीं करते।

मुख्य बातें

स्वामी रामदेव ने 29 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में सनातन ग्रंथों के परिशोधन की बड़ी घोषणा की।
वेदों को छोड़कर स्मृतियों, पुराणों, रामायण और महाभारत में मुगल-ब्रिटिश काल की मिलावट हटाई जाएगी।
पतंजलि योगपीठ में शंकराचार्यों, जगद्गुरुओं और सभी संप्रदायों के धर्माचार्यों की उपस्थिति में विद्वानों की बड़ी समिति गठित होगी।
रामदेव ने कहा कि वेदों में जातिभेद नहीं है ; ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य-शूद्र जातियाँ नहीं बल्कि सामाजिक व्यवस्थाएँ हैं।
परिशोधन प्रक्रिया की विधिवत रूपरेखा शुक्रवार को पतंजलि में होने वाली बड़ी बैठक में तय होगी।

योग गुरु स्वामी रामदेव ने 29 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आयोजित अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन में सनातन ग्रंथों के व्यापक परिशोधन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुगल और ब्रिटिश काल में स्मृतियों, पुराणों, रामायण और महाभारत में जो मिलावट और गलत व्याख्याएँ की गईं, उन्हें विद्वानों की एक विशेष समिति के माध्यम से दूर किया जाएगा। रामदेव के अनुसार, सनातन धर्म भारत की आत्मा है और वेद किसी भी प्रकार के जातिभेद का समर्थन नहीं करते।

परिशोधन का स्वरूप और समिति का गठन

स्वामी रामदेव ने घोषणा की कि पतंजलि योगपीठ और पतंजलि विश्वविद्यालय के परिसर में पूज्य शंकराचार्यों, जगद्गुरुओं तथा सभी मठ-पंथ-संप्रदायों के प्रमुख धर्माचार्यों की उपस्थिति में विद्वानों की एक बड़ी समिति गठित की जाएगी। यह समिति शास्त्रों में हुए प्रक्षेप — चाहे वह स्मृति ग्रंथों में हो, पुराणों में हो या रामायण-महाभारत में — को चिह्नित कर उसका निवारण करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेदों में किसी प्रकार की मिलावट की आशंका नहीं है; शेष ग्रंथों में बाहरी हस्तक्षेप की संभावना को लेकर यह पहल की जा रही है।

जाति और सनातन दर्शन पर रामदेव का मत

स्वामी रामदेव ने अपने संबोधन में कहा, 'ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जातियाँ नहीं हैं।' उनके अनुसार वेदों में जड़-चेतन, जीव-जगत, स्त्री-पुरुष अथवा शूद्र के नाम पर किसी प्रकार का भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि सनातन दर्शन, उपनिषद, रामायण, महाभारत और पुराणों का मूल तत्वार्थ यही है कि 'सभी जातियाँ, सभी संप्रदाय, सारा ब्रह्मांड और सभी देवी-देवता हमारे भीतर हैं।' गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत जनगणना और आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तीव्र है।

सनातन को 'भारत की आत्मा' बताने का संदर्भ

रामदेव ने कहा कि 'भारत की आत्मा सनातन है' और जो लोग इस पर प्रहार करते हैं वे 'बौद्धिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आतंकवादी' हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत को विश्व में सम्मान के साथ खड़ा होना है, तो जात-पात, ऊँच-नीच और मजहबी विभाजनों से ऊपर उठकर देश को आर्थिक, वैज्ञानिक और सैन्य रूप से सबसे शक्तिशाली बनाने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे 'मैं भारत हूँ, मैं भारत का लोकतंत्र हूँ, मैं भारत का संविधान हूँ' की भावना को आत्मसात करें।

सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य

स्वामी रामदेव के अनुसार इस अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का मूल उद्देश्य यह है कि सनातन धर्म शाश्वत होने के साथ-साथ वर्तमान चुनौतियों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सनातन की विरासत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर एक विकसित और परम वैभवशाली भारत का निर्माण किया जाएगा। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब सनातन धर्म को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक विमर्श तेज हो रहा है।

आगे क्या होगा

शुक्रवार को पतंजलि योगपीठ में शंकराचार्यों, जगद्गुरुओं और विद्वानों की उपस्थिति में इस परिशोधन प्रक्रिया की विधिवत रूपरेखा तय करने के लिए एक बड़ा निर्णय लिए जाने की घोषणा रामदेव ने की है। इस पहल का स्वरूप और समिति की संरचना उसी बैठक में स्पष्ट होने की संभावना है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि विभिन्न सम्प्रदायों के धर्माचार्य इस प्रक्रिया में किस हद तक सहमति और सहभागिता दिखाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इसकी व्यावहारिक चुनौतियाँ कम नहीं हैं — शास्त्रों में 'प्रक्षेप' और 'मूल पाठ' के बीच की रेखा तय करना सदियों से विद्वानों के बीच विवाद का विषय रहा है। यह भी गौरतलब है कि ऐसी किसी समिति को सभी संप्रदायों की सर्वसम्मति मिलना ऐतिहासिक रूप से दुरूह रहा है। जातिभेद के विरुद्ध रामदेव का वक्तव्य राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, लेकिन बिना स्वतंत्र शैक्षणिक भागीदारी के इस पहल की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी रामदेव ने सनातन ग्रंथों के परिशोधन की क्या घोषणा की?
रामदेव ने 29 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में घोषणा की कि वेदों को छोड़कर शेष सनातन ग्रंथों — स्मृतियों, पुराणों, रामायण और महाभारत — में मुगल और ब्रिटिश काल में हुई मिलावट और गलत व्याख्याओं को हटाया जाएगा। इसके लिए पतंजलि योगपीठ में शंकराचार्यों व जगद्गुरुओं की उपस्थिति में विद्वानों की एक बड़ी समिति गठित होगी।
रामदेव के अनुसार वेदों में जाति के बारे में क्या कहा गया है?
रामदेव ने स्पष्ट कहा कि वेदों में मनुष्य-मनुष्य के बीच जातिगत भेद नहीं है। उनके अनुसार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जातियाँ नहीं हैं, और वेद, उपनिषद व पुराणों का मूल तत्वार्थ यही है कि सभी प्राणी और संप्रदाय एक ही चेतना के अंश हैं।
परिशोधन समिति कब और कहाँ गठित होगी?
रामदेव ने बताया कि शुक्रवार को पतंजलि योगपीठ और पतंजलि विश्वविद्यालय के परिसर में शंकराचार्यों, जगद्गुरुओं और विभिन्न मठ-संप्रदायों के धर्माचार्यों की उपस्थिति में इस समिति की रूपरेखा तय करने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया जाएगा।
इस सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य क्या है?
अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का मूल उद्देश्य सनातन धर्म के शुद्धतम स्वरूप को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करना और उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा तय करना है। रामदेव ने जातिगत और मजहबी विभाजनों से ऊपर उठकर राष्ट्र को आर्थिक व सैन्य रूप से सशक्त बनाने का आह्वान भी किया।
रामदेव ने 'सनातन भारत की आत्मा है' कहकर क्या संदेश दिया?
रामदेव ने कहा कि हर देश का एक मूल वैचारिक और सांस्कृतिक आधार होता है, और भारत के लिए वह सनातन है। उन्होंने कहा कि इस आत्मा पर प्रहार करने वाले 'बौद्धिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आतंकवादी' हैं, और सभी नागरिकों को पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर देश को विश्व में सर्वशक्तिमान बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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