29 जुलाई 2026
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कांवड़ यात्रा 2025: स्वामी रामदेव ने कांवड़ियों से माँगा नशामुक्ति का संकल्प, बताया सच्ची शिवभक्ति का अर्थ

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कांवड़ यात्रा 2025: स्वामी रामदेव ने कांवड़ियों से माँगा नशामुक्ति का संकल्प, बताया सच्ची शिवभक्ति का अर्थ

सारांश

स्वामी रामदेव का संदेश इस बार केवल आध्यात्मिक नहीं था — यह एक सामाजिक चेतावनी भी थी। हरिद्वार में श्रावण मास के अवसर पर उन्होंने कांवड़ियों से नशामुक्ति का संकल्प माँगा और कहा कि भांग-गांजा शिवभक्ति नहीं, बल्कि महादेव का अनादर है। पतंजलि का निशुल्क भंडारा भी आयोजित।

मुख्य बातें

स्वामी रामदेव ने 29 जुलाई 2025 को हरिद्वार में कांवड़ियों से अनुशासन, स्वच्छता और सात्विक जीवन अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भांग, गांजा या कोई भी नशा शिवभक्ति नहीं, बल्कि भगवान शिव का अनादर है।
नशे की आदत से ग्रस्त श्रद्धालुओं से कांवड़ यात्रा के दौरान ही जीवनभर नशामुक्त रहने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
पतंजलि की ओर से देशी गाय के घी से बनी जलेबी, लड्डू और बूंदी का निशुल्क भंडारा आयोजित।
CM पुष्कर सिंह धामी , CM योगी आदित्यनाथ और PM नरेंद्र मोदी के प्रति कांवड़ यात्रा को सम्मान देने पर आभार व्यक्त किया।

योগগुरु स्वामी रामदेव ने 29 जुलाई 2025 को हरिद्वार में श्रावण मास और कांवड़ यात्रा के अवसर पर शिवभक्तों से अनुशासन, स्वच्छता और सात्विक आचरण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा महज एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के जीवन-आदर्शों को आत्मसात करने का सुअवसर है।

नशा और उपद्रव शिवभक्ति नहीं — स्वामी रामदेव

स्वामी रामदेव ने कहा कि श्रावण मास देवाधिदेव महादेव की उपासना का पवित्रतम काल है। उनके अनुसार गंगा स्वयं शिव का प्रवाहमान स्वरूप है और गंगाजल से अभिषेक कर श्रद्धालु उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। उन्होंने कहा, भांग, गांजा या किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन शिवभक्ति नहीं, बल्कि भगवान शिव का अनादर है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस प्रकार भगवान कृष्ण के नाम पर दुराचार और भगवान राम के नाम पर छल-कपट धर्म की मूल भावना के विरुद्ध है, उसी प्रकार शिव के नाम पर यात्रा के दौरान हुड़दंग मचाना पूरे सनातन समाज की छवि को नुकसान पहुँचाता है।

राम, कृष्ण और शिव के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान

स्वामी रामदेव ने कहा कि भगवान राम सत्य, मर्यादा और धर्म के प्रतीक हैं — उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने पर ही रामराज्य की कल्पना साकार होगी। उन्होंने आगे कहा कि कृष्णत्व और शिवत्व को जीवन में धारण करने से ही सनातन संस्कृति की वास्तविक प्रतिष्ठा संभव है। उनका संदेश था कि श्रद्धालु अपनी यात्रा को भक्ति, सेवा और अनुशासन का माध्यम बनाएँ।

नशे की आदत छोड़ने का संकल्प लें — कांवड़ियों से अपील

स्वामी रामदेव ने विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं से अपील की जो किसी प्रकार के नशे की आदत से ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा का यह पावन अवसर ही सर्वोत्तम समय है जब वे जीवनभर नशामुक्त रहने का संकल्प लें। महादेव के आदियोगी स्वरूप के योग और संयम को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची शिवभक्ति है।

पतंजलि का निशुल्क भंडारा

पतंजलि की ओर से कांवड़ियों के लिए देशी गाय के घी से बनी जलेबी, लड्डू और बूंदी का निशुल्क भंडारा आयोजित किया गया है। स्वामी रामदेव ने सभी श्रद्धालुओं से इस प्रसाद को ग्रहण करने और पूरी श्रद्धा के साथ यात्रा संपन्न करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री के प्रति आभार

स्वामी रामदेव ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा और शिवभक्ति को वर्तमान समय में जो सम्मान मिला है, वह पहले कभी नहीं मिला था। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी कांवड़िये स्वच्छता, अनुशासन और सनातन संस्कृति के शाश्वत मूल्यों का पालन करते हुए इस यात्रा की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार एक प्रमुख योग-गुरु का सार्वजनिक हस्तक्षेप इस मुद्दे को नई वैधता देता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रामदेव ने तीन मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए एक राजनीतिक संदर्भ भी स्थापित किया — जो यह संकेत देता है कि धार्मिक अनुशासन का यह संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सत्ता-समर्थित सामाजिक अभियान का भी हिस्सा है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी रामदेव ने कांवड़ियों से क्या अपील की?
स्वामी रामदेव ने 29 जुलाई 2025 को हरिद्वार में कांवड़ियों से अनुशासन, स्वच्छता और नशामुक्ति का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि भांग, गांजा या किसी भी नशे का सेवन शिवभक्ति नहीं बल्कि भगवान शिव का अनादर है।
कांवड़ यात्रा के दौरान नशा क्यों वर्जित माना जाता है?
स्वामी रामदेव के अनुसार श्रावण मास आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। नशा और उपद्रव न केवल व्यक्ति को, बल्कि पूरे सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुँचाते हैं, इसलिए यह पवित्र यात्रा के मूल उद्देश्य के विरुद्ध है।
पतंजलि का कांवड़ियों के लिए क्या आयोजन है?
पतंजलि की ओर से कांवड़ियों के लिए देशी गाय के घी से बनी जलेबी, लड्डू और बूंदी का निशुल्क भंडारा लगाया गया है। स्वामी रामदेव ने सभी श्रद्धालुओं से इस प्रसाद को ग्रहण कर पूरी श्रद्धा से यात्रा पूरी करने का आग्रह किया।
स्वामी रामदेव ने किन नेताओं का आभार व्यक्त किया?
स्वामी रामदेव ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा और शिवभक्ति को वर्तमान समय में जो सम्मान मिला है वह अभूतपूर्व है।
सच्ची शिवभक्ति क्या है — स्वामी रामदेव के अनुसार?
स्वामी रामदेव के अनुसार महादेव के आदियोगी स्वरूप के योग और संयम को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची शिवभक्ति है। भक्ति, सेवा और अनुशासन के साथ यात्रा संपन्न करना और नशे से दूर रहना ही भगवान शिव की वास्तविक आराधना है।
राष्ट्र प्रेस
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