बाबा रामदेव का शिव भक्तों से आह्वान: भांग-गांजा समेत हर नशा छोड़ें, नशा शिव आराधना के विरुद्ध
सारांश
मुख्य बातें
योग गुरु बाबा रामदेव ने 4 अगस्त 2026 को हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिव भक्तों से हर प्रकार के नशे को त्यागने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीड़ी, सिगरेट, शराब, हुक्का, भांग, सुल्फा और गांजा जैसे सभी नशे शिव आराधना की भावना के विरुद्ध हैं। रामदेव ने यह भी कहा कि योग और आयुर्वेद को स्वस्थ जीवनशैली का आधार बनाया जाना चाहिए।
नशे पर रामदेव का संदेश
रामदेव ने शिव भक्तों को संबोधित करते हुए कहा, 'भगवान शिव ने स्वयं भांग, गांजा, धतूरा या कोई अन्य नशा नहीं किया।' उनके अनुसार किसी भी प्रकार की हिंसा, तोड़-फोड़ या नशा — शिव आराधना के विरुद्ध है, शिव के सच्चे भक्त के विरुद्ध है और शिवतत्व की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने सभी से शिवत्व को आत्मसात करने का आग्रह किया।
सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर विचार
रामदेव ने आर्थिक और वैचारिक स्तर पर राष्ट्र को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जात-पात, ऊंच-नीच और भेद-भाव की दीवारें गिराना अनिवार्य है, क्योंकि 'हम सबके पूर्वज एक हैं।' उनका मानना है कि जब समाज को तोड़ने का काम बंद होगा, तभी देश एक सूत्र में बंध सकेगा। उन्होंने अखंड भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया और कहा कि भारत को जातियों, मजहबों और समुदायों में बंटने नहीं दिया जाएगा।
गो रक्षा और सांस्कृतिक पहचान
योग गुरु ने कहा कि भारत के पूर्वज गो हत्यारे नहीं, बल्कि गो रक्षक थे। उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताया। उनके अनुसार 'पूरी दुनिया एक परिवार है' — यही भारत की मूल भावना है।
पप्पू यादव प्रकरण पर प्रतिक्रिया
संसद परिसर में पप्पू यादव द्वारा साधु वेश धारण करने के मामले पर रामदेव ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र पहनकर सनातन का अपमान करना धार्मिक, सामाजिक, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दृष्टि से अपराध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों को मुद्दे उठाने की स्वतंत्रता है, किंतु संविधान हिंदुत्व, सनातन, भगवा, ब्राह्मण या पुजारी का अपमान करने की अनुमति नहीं देता। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सनातन धर्म से जुड़े प्रतीकों के उपयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।