27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अयोध्या: कांवड़ यात्रियों से गैर-हिंदुओं का सामान न खरीदें — साधु-संतों की अपील पर मुस्लिम धर्मगुरुओं का कड़ा विरोध

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अयोध्या: कांवड़ यात्रियों से गैर-हिंदुओं का सामान न खरीदें — साधु-संतों की अपील पर मुस्लिम धर्मगुरुओं का कड़ा विरोध

सारांश

अयोध्या में काली सेना के अध्यक्ष आनंद स्वरूप महाराज की गैर-हिंदुओं से सामान न खरीदने की अपील पर साधु-संत और मुस्लिम धर्मगुरु आमने-सामने हैं। एक पक्ष इसे सनातन पवित्रता की जरूरत बता रहा है, दूसरा इसे देश को तोड़ने वाली सोच।

मुख्य बातें

काली सेना के अध्यक्ष आनंद स्वरूप महाराज ने कांवड़ यात्रियों से गैर-हिंदुओं से सामान न खरीदने की अपील की।
विनयनानंद महाराज , महंत सीता राम दास और जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अपील का समर्थन करते हुए इसे सनातन धर्म की शुचिता से जोड़ा।
मौलाना मुहिब्बे अली नईमी ने इसे 'फूट डालो और राज करो' वाली मानसिकता बताया और सख्त कानून की माँग की।
लखनऊ के शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि व्यापार का कोई धर्म नहीं और ऐसे बयानों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
यह विवाद सावन माह के दौरान अयोध्या से उठा और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैल गया।

अयोध्या में काली सेना के अध्यक्ष आनंद स्वरूप महाराज के उस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है, जिसमें उन्होंने कांवड़ यात्रियों से गैर-हिंदुओं से सामान न खरीदने की अपील की थी। एक ओर जहाँ साधु-संतों ने इस अपील का समर्थन करते हुए इसे सनातन धर्म की पवित्रता से जोड़ा, वहीं मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसे देश को विभाजित करने वाली मानसिकता बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

साधु-संतों का पक्ष: पवित्रता और शुचिता की दलील

आध्यात्मिक गुरु विनयनानंद महाराज ने अपील का समर्थन करते हुए कहा, 'पूरी सावधानी जरूरी है। सावन का महीना पूजा-अर्चना का पवित्र समय है और भगवान शिव को पवित्र जल चढ़ाने वाले भक्तों से धार्मिक नियमों का सख्ती से पालन करने की उम्मीद की जाती है। पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। अक्सर होटलों और खाने-पीने की जगहों पर परोसे जाने वाले भोजन में स्वच्छता और अशुद्धि को लेकर चिंताएं रहती हैं। इसलिए शुरू से ही सतर्क रहना बेहतर है।'

साकेत भवन के महंत सीता राम दास ने कहा कि सनातन धर्म में स्वच्छता और धार्मिक शुचिता का अत्यधिक महत्व है। उनके अनुसार, 'यदि श्रद्धालु गैर-हिंदुओं से भोजन या अन्य सामान खरीदते हैं तो यात्रा की पवित्रता प्रभावित हो सकती है।' उन्होंने सभी कांवड़ यात्रियों से यात्रा के दौरान शुचिता बनाए रखने की अपील की।

तपस्वी छावनी के जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी इस अपील का समर्थन किया और कहा कि यह सनातन धर्म की मर्यादा और पवित्रता की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पहले भी देखी गई हैं, इसलिए मुसलमानों से सामान न खरीदने की अपील उचित है।

मुस्लिम धर्मगुरुओं की आपत्ति: 'देश को बाँटने वाली सोच'

मौलाना मुहिब्बे अली नईमी ने इस अपील पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, 'जो कोई भी ऐसे बयान देता है, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम, उसे देश का सच्चा शुभचिंतक नहीं माना जा सकता। ऐसी बातें देश को बांटती हैं और कमजोर करती हैं। यह अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो वाली सोच को दर्शाता है।' उन्होंने ऐसे बयानों के विरुद्ध सख्त कानून बनाने की माँग की और कहा कि व्यापार का कोई धर्म नहीं होता।

लखनऊ के शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने तीखे अंदाज में कहा कि ऐसे विचार रखने वालों को पहले पेट्रोल और गैस का उपयोग बंद कर देना चाहिए, क्योंकि ये मुस्लिम देशों से आते हैं। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा धर्म है, लेकिन कुछ लोगों की मानसिकता बंटवारे वाली है और ऐसे बयानों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सावन माह के दौरान कांवड़ यात्रा को लेकर धार्मिक दुकानदारी और व्यापार पर विवाद नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में कांवड़ मार्गों पर दुकानदारों के नाम प्रदर्शित करने संबंधी निर्देशों को लेकर भी विवाद उठ चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

आगे क्या

इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता के बीच की बारीक रेखा को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल किसी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों पक्षों के बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वह भी इस बहस को केवल प्रतिक्रिया तक सीमित रखती है, समाधान की दिशा में नहीं ले जाती। प्रशासन की चुप्पी इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काली सेना के अध्यक्ष आनंद स्वरूप महाराज ने क्या अपील की?
उन्होंने कांवड़ यात्रियों से गैर-हिंदुओं से कोई भी सामान न खरीदने की अपील की, जिसे उन्होंने सनातन धर्म की पवित्रता बनाए रखने के लिए जरूरी बताया। इस बयान पर साधु-संतों ने सहमति जताई है।
साधु-संतों ने इस अपील का समर्थन क्यों किया?
विनयनानंद महाराज, महंत सीता राम दास और जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इसे सावन माह की धार्मिक शुचिता और सनातन धर्म की मर्यादा से जोड़ा। उनका तर्क है कि गैर-हिंदुओं से सामान खरीदने से कांवड़ यात्रा की पवित्रता प्रभावित हो सकती है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस अपील पर क्या आपत्ति जताई?
मौलाना मुहिब्बे अली नईमी ने इसे देश को बाँटने वाली सोच और 'फूट डालो और राज करो' की मानसिकता बताया। शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि व्यापार का कोई धर्म नहीं होता और ऐसे बयानों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
यह विवाद कहाँ और कब सामने आया?
यह विवाद अयोध्या में 27 जुलाई को सावन माह के दौरान कांवड़ यात्रा के मौसम में सामने आया। इस तरह के बयान हर सावन में कांवड़ यात्रा शुरू होते ही उठते रहे हैं।
क्या इस मामले में कोई कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई हुई है?
फिलहाल किसी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। मौलाना नईमी ने ऐसे बयानों के विरुद्ध सख्त कानून बनाने की माँग जरूर की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 11 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले