रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव का आह्वान: जातिगत भेदभाव मिटाओ, प्रकृति बचाओ
सारांश
मुख्य बातें
योग गुरु बाबा रामदेव को 28 अगस्त को हरिद्वार में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर महिलाओं ने राखी बाँधी। इस अवसर पर उन्होंने पर्व के धार्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए जातिगत भेदभाव समाप्त करने और पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
रक्षाबंधन का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व
बाबा रामदेव ने रक्षाबंधन की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि द्रौपदी ने भगवान कृष्ण को राखी बाँधी थी और प्राचीन परंपरा में ब्राह्मणों द्वारा क्षत्रियों को राखी बाँधने का भी वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा, 'भारत ज्ञान और वीरता का उपासक रहा है और यह पर्व भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।' उनके अनुसार रक्षाबंधन समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को सुदृढ़ करने का संदेश देता है।
जातिगत भेदभाव के विरुद्ध स्पष्ट संदेश
बाबा रामदेव ने जातिगत भेदभाव के विरुद्ध अपनी बात स्पष्ट शब्दों में रखी। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, दलित, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति — किसी भी भारतीय को जाति या समुदाय के नाम पर भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए। वैदिक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि समाज में जाति, समुदाय, लिंग या किसी भी आधार पर असमानता अस्वीकार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जाति-आधारित जनगणना और आरक्षण की बहस तेज़ है।
नेपाल बाढ़ पर संवेदना और राहत कार्य
नेपाल में अचानक आई बाढ़ और उससे हुए जान-माल के नुकसान पर दुख जताते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि यह त्रासदी अत्यंत दुखद है और इसमें भारतीय, नेपाली नागरिक तथा अन्य लोगों ने अपनी जान गँवाई है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पतंजलि योग समिति और पतंजलि योगपीठ से जुड़े कार्यकर्ता आपदा-पीड़ितों की सेवा में समर्पित हैं।
पर्यावरण संरक्षण पर वैश्विक जिम्मेदारी का आग्रह
बाबा रामदेव ने पर्यावरण संकट को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि प्रकृति किसी एक देश की नहीं, बल्कि सभी की साझा धरोहर है। उन्होंने चीन, नेपाल और भारत सहित सभी देशों से मिलकर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से ऐसे विकास के स्वरूप से बचने की अपील की जो प्रकृति के विनाश का कारण बनता है। गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हाल के वर्षों में लगातार बढ़ी हैं, जिसे विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हैं।
आगे का संदेश
बाबा रामदेव ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति के प्रति सम्मान रखते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्यावरणीय या प्राकृतिक कारणों से किसी देश, जाति, वर्ग या समुदाय को नुकसान न पहुँचे। रक्षाबंधन का यह संदेश सामाजिक एकता और पर्यावरणीय चेतना को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।