रक्षाबंधन 2025: भद्रा और ग्रहण का असर नहीं, पर राखी बांधने से पहले करें ये ज्योतिषीय उपाय
सारांश
मुख्य बातें
रक्षाबंधन का पावन पर्व इस वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाएगा। प्रयागराज की ज्योतिषी पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर न भद्रा का साया रहेगा और न ही चंद्रग्रहण का सूतक काल लागू होगा — फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ विशेष उपाय करने की सलाह दी गई है। भाई-बहन के इस अटूट रिश्ते के पर्व पर शुभ मुहूर्त में राखी बांधना सनातन परंपरा का अभिन्न अंग है।
भद्रा और चंद्रग्रहण की स्थिति
शिप्रा सचदेव ने बताया कि इस वर्ष भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन पूरे दिन बिना किसी बाधा के राखी बांधी जा सकती है। इसके अलावा, यद्यपि उस दिन सुबह चंद्रग्रहण है, किंतु यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और इसका प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हालाँकि, ज्योतिषी सचदेव का कहना है कि ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रग्रहण का कुंडली पर आंशिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक विशेष उपाय सुझाया है।
राखी बांधने का विशेष क्रम
शिप्रा सचदेव के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन सबसे पहला रक्षा सूत्र भगवान शिव को बांधना चाहिए। उनका तर्क है कि शिव जी ने विष को धारण किया है और चंद्रमा को अपने मस्तक पर स्थान दिया है, इसलिए वे नकारात्मकता को दूर करने में सक्षम हैं।
इसके बाद दूसरा रक्षा सूत्र भगवान विष्णु को और तीसरा अपने गुरु को बांधना चाहिए। इस क्रम के पश्चात ही भाई की कलाई पर राखी बांधें। ज्योतिषी का मानना है कि इस विधि से धन और व्यय संबंधी समस्याएँ दूर होती हैं और भाई-बहन के संबंध में सकारात्मकता आती है।
रक्षाबंधन 2025 के शुभ मुहूर्त
शिप्रा सचदेव ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर सुबह से ही शुभ समय उपलब्ध है। मुहूर्त का विवरण इस प्रकार है:
पहला शुभ मुहूर्त: सुबह से 7:30 बजे तक।
दूसरा और सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 9:25 बजे से 10:30 बजे तक — इस समय राखी बांधना सबसे शुभ माना गया है।
तीसरा मुहूर्त: दोपहर 2:30 बजे से 3:00 बजे तक, और उसके बाद पूरे दिन।
राहु काल में राखी बांधने से बचें
ज्योतिषी ने विशेष रूप से आगाह किया है कि राहु काल के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए। इस बार राहु काल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। इस अवधि में राखी बांधना ज्योतिषीय दृष्टि से अशुभ माना जाता है।
पर्व का महत्त्व और आगे की तैयारी
रक्षाबंधन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भाई-बहन के रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। इस वर्ष भद्रा और सूतक दोनों की अनुपस्थिति में यह पर्व और अधिक सहज रूप से मनाया जा सकेगा। ज्योतिषी सचदेव की सलाह है कि शुभ मुहूर्त और उचित क्रम का पालन कर रक्षाबंधन मनाने से पर्व का फल और भी अधिक मिलता है।