पनामा बन सकता है भारतीय कंपनियों का लैटिन अमेरिका गेटवे: राजदूत अलोंसो कोरिया मिगुएल
सारांश
मुख्य बातें
भारत में पनामा के राजदूत अलोंसो कोरिया मिगुएल ने 27 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित एक उच्चस्तरीय व्यापार संवाद में कहा कि भारतीय कंपनियाँ पनामा को महज एक निर्यात गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि लैटिन अमेरिका, कैरिबियन और समूचे अमेरिकी महाद्वीप में प्रवेश के लिए एक रीजनल बिजनेस हब के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं। यह बातचीत एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई में हुई, जहाँ दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधियों ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊँचाई देने पर विचार-विमर्श किया।
पनामा की रणनीतिक ताकत
राजदूत मिगुएल ने रेखांकित किया कि पनामा नहर, सुदृढ़ समुद्री और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम, स्पेशल इकोनॉमिक जोन और कोलोन फ्री ट्रेड जोन मिलकर भारतीय उद्यमों के लिए क्षेत्रीय वितरण, वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और वाणिज्यिक परिचालन की असाधारण संभावनाएँ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा, "पनामा की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, पनामा नहर, मजबूत समुद्री और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम, स्पेशल इकोनॉमिक जोन और कोलोन फ्री ट्रेड जोन भारतीय कंपनियों के लिए क्षेत्रीय वितरण, वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल कामकाज शुरू करने के बड़े अवसर प्रदान करते हैं।"
गौरतलब है कि पनामा भौगोलिक रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका के संगम पर स्थित है, जो इसे एकाधिक बाज़ारों तक पहुँच के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय कंपनियाँ अपने निर्यात आधार में विविधता लाने और पश्चिमी बाज़ारों पर निर्भरता घटाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
किन क्षेत्रों को सबसे ज़्यादा फायदा
राजदूत मिगुएल के अनुसार, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल, इंजीनियरिंग, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों की भारतीय कंपनियाँ पनामा में रीजनल हेडक्वार्टर और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर स्थापित करने की सबसे बड़ी उम्मीदवार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पनामा लॉजिस्टिक्स जटिलताओं, स्थानीय नियामक ढाँचे, वितरण नेटवर्क और बाज़ार-विशिष्ट व्यावसायिक चुनौतियों से निपटने में भारतीय व्यवसायों का सहयोग कर सकता है।
द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष डॉ. विजय कलंत्री ने बताया कि फिलहाल भारत और पनामा के बीच वस्तुओं का वार्षिक व्यापार लगभग 60 करोड़ डॉलर है। मजबूत बी2बी संपर्क, बेहतर बाज़ार जानकारी और उच्च-संभावना वाले क्षेत्रों में विशेष सहयोग के ज़रिये अगले दो वर्षों में इसे दोगुना करके 1.2 अरब डॉलर से अधिक तक पहुँचाने की संभावना है।
डॉ. कलंत्री ने कहा, "पनामा की रणनीतिक स्थिति और अमेरिका के साथ कनेक्टिविटी भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय विस्तार के लिए एक असरदार मंच दे सकती है।"
कॉन्सल जनरल का आह्वान
मुंबई में पनामा के कॉन्सल जनरल रॉबर्टो रोड्रिग्ज प्राडा ने दोनों देशों के व्यवसायों के बीच सीधे जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में पनामा के स्पेशल इकोनॉमिक रिजीम के तहत वेयरहाउसिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, असेंबली, टेस्टिंग, फिनिशिंग और मैन्युफैक्चरिंग के व्यापक अवसरों को रेखांकित किया।
आगे की राह
यह उच्चस्तरीय संवाद भारत-पनामा व्यापार संबंधों में एक नई ऊर्जा का संकेत देता है। आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के बीच क्षेत्र-विशिष्ट सहयोग की रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद है, जो भारतीय कंपनियों के लैटिन अमेरिकी विस्तार को ठोस दिशा दे सकती है।