लॉस एंजिल्स महावाणिज्य दूतावास बना भारत-अमेरिका साझेदारी का नया केंद्र, तकनीक-निवेश पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
लॉस एंजिल्स स्थित भारत के नवस्थापित महावाणिज्य दूतावास ने परंपरागत कूटनीतिक दायरे से बाहर निकलकर खुद को व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार के एक सक्रिय केंद्र के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है। भारतीय महावाणिज्य दूत डॉ. के.जे. श्रीनिवास के अनुसार, अमेरिका के प्रशांत दक्षिणपश्चिम क्षेत्र में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने की अपार संभावनाएँ हैं। भारतीय प्रवासी समुदाय और अमेरिकी कारोबारी जगत, दोनों ने दूतावास की स्थापना का उत्साहपूर्वक स्वागत किया है।
दूतावास की प्राथमिकताएँ और गतिविधियाँ
महावाणिज्य दूतावास के गठन के बाद से निवेश प्रोत्साहन से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। भारतीय उद्योग प्रतिनिधिमंडलों और स्थानीय अमेरिकी कंपनियों के बीच व्यावसायिक बैठकों की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
डॉ. श्रीनिवास ने कहा, "यह भारतीय प्रवासी समुदाय का लंबे समय से संजोया हुआ सपना था।" दूतावास ने दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ) और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) से जुड़े हितधारकों के साथ भी संवाद आरंभ किया है — ऐसे समय में जब भारत और अमेरिका, दोनों मजबूत एवं भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएँ विकसित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बदलती छवि: 'सिर्फ बॉलीवुड' से 'सीरियस बिज़नेस' तक
इस क्षेत्र में भारत की बदलती धारणा के बारे में पूछे जाने पर डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि पहले भारत की पहचान मुख्यतः बॉलीवुड, योग और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित थी, लेकिन अब यह "सीरियस व्यवसाय — उद्यमिता, इनोवेशन और निवेश" का पर्याय बन चुका है।
उन्होंने हाल ही में आयोजित बीआईओ इंटरनेशनल कन्वेंशन का उदाहरण दिया, जिसमें 52 से अधिक भारतीय कंपनियों ने भागीदारी की। उन्होंने कहा, "आप भारतीय कंपनियों में आने वाले ट्रैफिक की मात्रा देखकर हैरान रह जाएंगे। इससे पता चलता है कि भारत ग्लोबल सीन पर आ गया है।"
डॉ. श्रीनिवास ने यह भी बताया कि अमेरिकी राज्यों के गवर्नरों, कांग्रेस सदस्यों, राज्य विधायकों और मेयरों के साथ उनकी बैठकों से भारत के प्रति गहरे सहयोग का उत्साह स्पष्ट रूप से उभर कर आया है।
शिक्षा और शोध में बढ़ती साझेदारी
शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। डॉ. श्रीनिवास ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो, एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया और यूसीएलए जैसे प्रतिष्ठित अमेरिकी विश्वविद्यालयों तथा भारतीय संस्थानों के बीच विकसित हो रही साझेदारियों का उल्लेख किया।
उनके अनुसार, इन सहयोगों से छात्रों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, "आने वाले समय में दोनों देशों के बीच पूंजी, प्रौद्योगिकी और नवाचार का आदान-प्रदान तेजी से बढ़ेगा। वे भारत को एक स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं।"
2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक और क्रिकेट की वापसी
2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारियाँ भी महावाणिज्य दूतावास की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। दूतावास पहले से ही भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, लॉस एंजिल्स मेयर कार्यालय और आयोजन समिति के साथ समन्वय कर रहा है।
डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि अगस्त में एक प्रतिनिधिमंडल के आने की उम्मीद है, जो प्रतियोगिता स्थलों, प्रशिक्षण केंद्रों और लॉजिस्टिक्स व्यवस्थाओं का जायज़ा लेगा। एक सदी से अधिक समय बाद ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी ने तैयारियों को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने पोमोना में बने नए क्रिकेट स्टेडियम का उल्लेख करते हुए कहा कि विस्तार के बाद यहाँ ओलंपिक क्रिकेट मुकाबलों की मेज़बानी होने की उम्मीद है।
रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार
डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, प्रशांत दक्षिणपश्चिम क्षेत्र रक्षा, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य सेवा, बायोटेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग के लिहाज़ से भारत-अमेरिका संबंधों का एक अहम स्तंभ बनता जाएगा। यह क्षेत्र वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, वेंचर कैपिटल फर्मों, बड़े विश्वविद्यालयों, एयरोस्पेस उद्योग और उन्नत विनिर्माण केंद्रों का गढ़ है, जो भारत को व्यावसायिक और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का बड़ा अवसर देता है।
गौरतलब है कि पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका ने रणनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच आपसी संपर्क को लगातार मजबूत किया है। लॉस एंजिल्स महावाणिज्य दूतावास की स्थापना इस दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगी।