लॉस एंजिल्स में भारतीय महावाणिज्य दूतावास बना रणनीतिक केंद्र, AI से लेकर रक्षा तक साझेदारी का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
लॉस एंजिल्स स्थित भारत का महावाणिज्य दूतावास — अमेरिका में भारत का सबसे नया राजनयिक मिशन — खुद को अमेरिकी प्रशांत दक्षिणपश्चिम क्षेत्र में व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और जन-संपर्क के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। लॉस एंजिल्स में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. के.जे. श्रीनिवास ने कहा कि यह क्षेत्र भारत-अमेरिका की विस्तारित साझेदारी के लिए असाधारण संभावनाएं प्रस्तुत करता है। स्थापना के एक वर्ष से भी कम समय में यह मिशन पारंपरिक वाणिज्यिक सेवाओं की सीमाओं से आगे निकलकर एक रणनीतिक साझेदारी केंद्र की भूमिका में ढल चुका है।
मिशन का दायरा और स्थापना
यह महावाणिज्य दूतावास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के अनुरूप खोला गया था, जिसमें उन्होंने बोस्टन और लॉस एंजिल्स में दो नए भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करने का ऐलान किया था। डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, यह निर्णय भारतीय प्रवासी समुदाय की दीर्घकालिक मांग और इस क्षेत्र में उपलब्ध अपार अवसरों को देखते हुए लिया गया।
मिशन ने पिछले वर्ष के अंत में कार्य प्रारंभ किया, जनवरी में अपने स्थायी परिसर में स्थानांतरित हुआ और अप्रैल से वीज़ा, भारतीय विदेशी नागरिकता (OCI) कार्ड तथा अन्य कॉन्सुलर सेवाओं की पूरी श्रृंखला प्रदान कर रहा है।
क्षेत्राधिकार और प्रवासी समुदाय
लॉस एंजिल्स मिशन का क्षेत्राधिकार दक्षिणी कैलिफोर्निया, एरिजोना, नेवाडा और न्यू मैक्सिको तक फैला है। इस व्यवस्था के साथ कैलिफोर्निया अमेरिका का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है जहाँ — सैन फ्रांसिस्को के साथ मिलकर — दो भारतीय वाणिज्य दूतावास कार्यरत हैं।
इस कॉन्सुलर क्षेत्राधिकार में भारतीय मूल के लगभग 5.5 लाख से 6 लाख लोग निवास करते हैं — जिनमें भारतीय पासपोर्ट धारक और भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक दोनों शामिल हैं। ये लोग सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, एयरोस्पेस, मनोरंजन, स्वास्थ्य सेवा, जैव प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। महावाणिज्य दूतावास इन्हें भविष्य में भारत-अमेरिका सहयोग का मुख्य चालक मानता है।
रणनीतिक और व्यापारिक प्राथमिकताएँ
मिशन का उद्देश्य अमेरिका के सबसे गतिशील आर्थिक क्षेत्रों में से एक को भारत की महत्वाकांक्षाओं से जोड़ना है — जिसमें उन्नत विनिर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा और नवाचार शामिल हैं।
डॉ. श्रीनिवास ने कहा, 'हम विभिन्न व्यावसायिक और सांस्कृतिक पहलों पर काम कर रहे हैं और उन सभी हितधारकों को जोड़ रहे हैं जो सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक हैं।' मिशन नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट पुनर्चक्रण में भी सहयोग विस्तार पर ध्यान दे रहा है।
मुंबई-लॉस एंजिल्स सिस्टर-सिटी संबंध
मिशन की प्रमुख प्राथमिकताओं में मुंबई और लॉस एंजिल्स के बीच सिस्टर-सिटी संबंधों को पुनर्जीवित करना है — यह समझौता 1972 में हस्ताक्षरित हुआ था लेकिन वर्षों से काफी हद तक निष्क्रिय पड़ा है। डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि उन्होंने लॉस एंजिल्स नगर प्रशासन और मेयर के कार्यालय से संपर्क किया है तथा महाराष्ट्र सरकार से भी बातचीत जारी है।
उन्होंने कहा, 'पोर्ट ऑफ एलए और पोर्ट ऑफ लॉन्ग बीच शायद अमेरिका के पश्चिमी तट के सबसे बड़े बंदरगाह हैं। मुंबई खुद एक व्यावसायिक केंद्र है। हम भारतीय निवेशकों में लॉस एंजिल्स आने की बढ़ती रुचि देख रहे हैं।' यह साझेदारी केवल मनोरंजन उद्योग तक सीमित न रहकर लॉजिस्टिक्स, वित्त पोषण, व्यापार और निवेश को भी समेटेगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह मिशन ऐसे समय में विस्तार कर रहा है जब भारत-अमेरिका संबंध प्रौद्योगिकी, रक्षा और व्यापार के मोर्चों पर नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, कैलिफोर्निया की विशेषज्ञता और एरिजोना का जल प्रबंधन अनुभव भारत के लिए अद्वितीय अवसर प्रस्तुत करते हैं। उनका विश्वास है कि यह मिशन न केवल प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएगा, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई गति देगा।