भारत-अर्जेंटीना संबंध नई ऊंचाई पर: राजदूत कॉसिनो ने गिनाए रणनीतिक साझेदारी के फायदे
सारांश
मुख्य बातें
अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो ने 5 जून 2025 को नई दिल्ली स्थित भारत अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका और कैरेबियन राउंडटेबल में कहा कि भारत और अर्जेंटीना के द्विपक्षीय संबंध अब 'साझा हितों, समान मूल्यों और मजबूत आर्थिक पूरकता' की बुनियाद पर खड़े हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत आज अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है — एक उपलब्धि जो दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी को देखते हुए उल्लेखनीय है।
मुख्य घटनाक्रम
राजदूत कॉसिनो ने राउंडटेबल में बताया कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अर्जेंटीना यात्रा 57 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय अर्जेंटीना यात्रा थी, जिसे उन्होंने दोनों देशों के संबंधों में 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' बताया। गौरतलब है कि 2019 में ही दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2009 में अर्जेंटीना ने मुंबई में अपना महावाणिज्य दूतावास खोला था, और 2019 में नई दिल्ली में एग्री दूतावास अधिकारी कार्यालय की स्थापना की गई, जिसके बाद से अर्जेंटीना भारत को खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।
व्यापार और आर्थिक पूरकता
कॉसिनो ने बताया कि अर्जेंटीना मुख्य रूप से सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, दालें, चमड़ा और हाल के वर्षों में लिथियम तथा तांबे जैसे महत्वपूर्ण खनिज भारत को निर्यात करता है। दूसरी ओर, भारत अर्जेंटीना को दवाइयाँ, रसायन, मशीनरी, मोटरसाइकिलें, ऑटो पार्ट्स और अन्य औद्योगिक उत्पाद निर्यात करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की विविध और सुरक्षित आपूर्ति शृंखला बनाने पर ज़ोर दे रहा है। राजदूत ने बताया कि कैटामार्का प्रांत में भारतीय खनन कंपनियाँ न केवल लिथियम, बल्कि तांबे और सोने की खोज में भी सक्रिय हैं।
भू-राजनीतिक संदर्भ
कॉसिनो ने कहा, "एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दुनिया में लगातार अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत आबादी इसी क्षेत्र में रहती है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत अब दुनिया की पाँच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
राजदूत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लिए निवेश, खुलेपन और अधिक उदारीकरण की आवश्यकता है — और इस दिशा में भारत-लैटिन अमेरिका सहयोग की भूमिका अहम होगी।
साझा मूल्य और आगे की राह
कॉसिनो ने दोहराया कि दोनों देश "लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानव गरिमा के सम्मान" जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस विचार से सहमति जताई कि सरकारों को निजी पहल में न्यूनतम हस्तक्षेप करना चाहिए, लेकिन ज़रूरतमंद लोगों को अधिकतम सहायता प्रदान करनी चाहिए।
दोनों देशों के बीच बढ़ता निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग और उच्च-स्तरीय राजनयिक संपर्क यह संकेत देते हैं कि भारत-अर्जेंटीना साझेदारी आने वाले वर्षों में और गहरी होगी।