भारत बना अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार, द्विपक्षीय व्यापार $6 अरब के पार
सारांश
मुख्य बातें
अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कॉसिनो ने गुरुवार को कहा कि भारत अब अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बन चुका है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में बढ़कर करीब $6 अरब तक पहुँच गया है। 17 जुलाई को मुंबई में अर्जेंटीना के कॉन्सुल जनरल डेनियल क्वेर कॉन्फलोनिएरी ने भी इस बढ़ते सहयोग की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देश कई क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
राजदूत कॉसिनो ने बताया कि पिछले चार से छह वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब $6 अरब तक पहुँच गया है और यह लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की बढ़ती अहमियत के साथ यह आर्थिक साझेदारी और मजबूत होती जा रही है। कॉन्सुल जनरल कॉन्फलोनिएरी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत, अर्जेंटीना में लिथियम क्षेत्र में निवेश कर रहा है — जो ऊर्जा संक्रमण के युग में एक रणनीतिक कदम है।
राजनयिक संबंधों की पृष्ठभूमि
भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों देशों के संबंध साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। साल 2024 में भारत और अर्जेंटीना ने अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे किए। फरवरी 2019 में अर्जेंटीना के तत्कालीन राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। गौरतलब है कि भारत की आज़ादी के बाद से पिछले करीब आठ दशकों में यह रिश्ता लगातार आगे बढ़ा है।
सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव
कॉन्फलोनिएरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अर्जेंटीना के अलग-अलग हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लोग अब केवल लियोनेल मेसी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरे फुटबॉल खेल को भी पसंद करने लगे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि मुंबई में अर्जेंटीना के लोगों द्वारा संचालित एक फुटबॉल स्कूल भी चल रहा है, जो दोनों समाजों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है।
ग्लोबल साउथ में साझा भूमिका
कॉन्फलोनिएरी ने इस बात पर जोर दिया कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देश ग्लोबल साउथ के सदस्य के रूप में साझा हितों और दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों समाज एक-दूसरे के और करीब आ रहे हैं और आने वाले समय में यह रिश्ता और मजबूत होगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और विकासशील देश अपनी बहुपक्षीय साझेदारियाँ मज़बूत कर रहे हैं।