इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका सर्वोच्च: अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउचिनो का बयान
सारांश
मुख्य बातें
भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउचिनो ने 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई व्यापार एवं कूटनीतिक सम्मेलन में स्पष्ट रूप से कहा कि एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का वैश्विक महत्व निरंतर बढ़ रहा है और इस बदलते परिदृश्य में भारत दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में शुमार हो चुका है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के ऑडिटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन में काउचिनो ने भारत-अर्जेंटीना संबंधों की गहराई और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वैश्विक अनिश्चितता में भारत की उभरती भूमिका
काउचिनो ने कहा, 'आज दुनिया का हर राजनयिक संवाद बदलते वैश्विक हालात और अनिश्चितताओं से शुरू होता है, लेकिन इसके साथ ही कुछ नई वास्तविकताएं भी सामने आई हैं, जिनमें एशिया और इंडो-पैसिफिक की बढ़ती भूमिका सबसे प्रमुख है।' उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति और विशाल जनसंख्या ने उसे वैश्विक कूटनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। उनके अनुसार, 'भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसने उसे आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल कर दिया है।'
भारत-अर्जेंटीना संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
राजदूत ने दोनों देशों के दीर्घकालिक कूटनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि अर्जेंटीना ने वर्ष 1950 में नई दिल्ली में अपना दूतावास स्थापित किया था और ऐसा करने वाले शुरुआती लैटिन अमेरिकी देशों में वह शामिल था। इसके बाद 2009 में मुंबई में महावाणिज्य दूतावास खोला गया। वर्ष 2019 में दोनों देशों के संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा प्रदान किया गया और उसी वर्ष नई दिल्ली में अर्जेंटीना का कृषि कार्यालय भी स्थापित किया गया। यह ऐतिहासिक क्रम दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच संस्थागत संपर्क लगातार गहरा होता रहा है।
व्यापारिक साझेदारी और आर्थिक अवसर
काउचिनो ने बताया कि भारत अब अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। अर्जेंटीना भारत को सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, दालें और चमड़ा निर्यात करता है और इस समय भारत को खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। इसके अतिरिक्त, लिथियम और तांबा जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी दोनों देशों के बीच उभरते व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल हो रहे हैं, जो भविष्य की ऊर्जा और प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
विकसित भारत 2047 में अर्जेंटीना की भूमिका
राजदूत ने कहा कि अर्जेंटीना और व्यापक रूप से दक्षिण अमेरिका, भारत की विकास महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में सहायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में अर्थव्यवस्था को अधिक खुला और विविधतापूर्ण बनाने के प्रयासों में दक्षिण अमेरिकी देश सक्रिय भागीदार बन सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक स्तर पर बढ़ती भूमिका की भी सराहना की और भारत को दुनिया की पाँच सबसे बड़ी एवं सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया।
आगे की राह
काउचिनो ने विश्वास व्यक्त किया कि भले ही दोनों देश भौगोलिक दृष्टि से दूर हों, आपसी हितों और पूरक शक्तियों के आधार पर यह साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होगी। दोनों देशों के नीति-निर्माता और कूटनीतिक संस्थान वैश्विक मंच पर भारत के रणनीतिक महत्व को स्पष्ट रूप से पहचानते हैं। आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण खनिजों, कृषि व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संबंध नई ऊँचाइयाँ छूने की संभावना है।