17 अगस्त 2026
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हसदेव नदी में बाढ़: कोरबा के सीतामणि में घरों में घुसा पानी, बांगो डेम से 41 हजार क्यूसेक छोड़ा

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हसदेव नदी में बाढ़: कोरबा के सीतामणि में घरों में घुसा पानी, बांगो डेम से 41 हजार क्यूसेक छोड़ा

सारांश

छत्तीसगढ़ के कोरबा में हसदेव नदी उफान पर है — बांगो डेम से 41 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद सीतामणि के घरों में पानी घुस गया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में डिप्रेशन के झारखंड की ओर बढ़ने की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

मुख्य बातें

हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ने से कोरबा के सीतामणि क्षेत्र में कई घरों में पानी घुस गया।
बांगो डेम से करीब 41 हजार क्यूसेक और दर्री बराज के गेट खुलने से भी भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।
जिला प्रशासन और राहत-बचाव दल प्रभावित इलाकों में सक्रिय; निवासियों से नदी किनारे से दूर रहने की अपील।
मौसम विभाग के अनुसार 17 अगस्त सुबह 5:30 बजे IST तक कम दबाव का क्षेत्र 'डिप्रेशन' में बदल चुका था।
अगले 24 घंटों में यह डिप्रेशन पश्चिम बंगाल से झारखंड की ओर बढ़ने की संभावना, जिससे बारिश और तेज़ हो सकती है।

छत्तीसगढ़ के कोरबा में 17 अगस्त 2026 को हसदेव नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया, जिससे सीतामणि क्षेत्र के कई घरों में पानी घुस गया। लगातार हो रही भारी बारिश और बांगो डेम तथा दर्री बराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। प्रशासन और राहत-बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बांगो डेम से करीब 41 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा दर्री बराज के गेट खुलने के बाद भी भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर प्रवाहित किया जा रहा है। इन दोनों जलाशयों से एक साथ पानी छोड़े जाने के कारण हसदेव नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा और नदी के आसपास के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

कोरबा के सीतामणि क्षेत्र में कई घरों के आसपास और भीतर पानी पहुँचने से स्थानीय निवासियों की परेशानी बढ़ गई है। लोगों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

राहत और बचाव कार्य

जिला प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। राहत-बचाव दल को अलर्ट पर रखा गया है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता पहुँचाने की तैयारी की गई है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

बांगो और दर्री जलाशयों से लगातार पानी छोड़े जाने के मद्देनजर निचले इलाकों के निवासियों को विशेष रूप से सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, 17 अगस्त की सुबह 5:30 बजे IST तक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तटों पर बना कम दबाव का क्षेत्र एक 'डिप्रेशन' में तब्दील हो चुका था। यह डिप्रेशन तटीय पश्चिम बंगाल और उससे सटे बांग्लादेश व उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के इलाकों में केंद्रित था।

मौसम विभाग ने बताया है कि अगले 24 घंटों के दौरान यह डिप्रेशन गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल से होते हुए झारखंड की ओर उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की प्रबल संभावना है। इससे छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में वर्षा की स्थिति और बिगड़ सकती है।

आम जनता पर असर

सीतामणि क्षेत्र के निवासियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जहाँ घरों में पानी घुसने से दैनिक जीवन बाधित हो गया है। नदी किनारे के अन्य निचले इलाकों में भी जलभराव की आशंका बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सीजन में नदियाँ पहले से ही उफान पर हैं और जलाशयों में पानी का स्तर उच्च बना हुआ है।

क्या होगा आगे

मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर आने वाले दिनों में बारिश और बढ़ने की संभावना है, जिससे हसदेव नदी का जलस्तर और ऊपर जा सकता है। प्रशासन की टीम स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत उपाय किए जाने की तैयारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या निवासियों को तब पता चला जब पानी दरवाज़े तक पहुँच चुका था। मानसून हर साल आता है और हसदेव नदी का यह व्यवहार नया नहीं है — फिर भी निचले इलाकों में स्थायी राहत उपायों की कमी बार-बार उजागर होती है। मौसम विभाग की डिप्रेशन चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन के पास अभी भी तैयारी का वक्त है, और यही असली परीक्षा है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हसदेव नदी में बाढ़ क्यों आई?
लगातार भारी बारिश और बांगो डेम से करीब 41 हजार क्यूसेक तथा दर्री बराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण हसदेव नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा। इससे नदी किनारे के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए।
कोरबा में कौन-सा इलाका सबसे अधिक प्रभावित है?
कोरबा का सीतामणि क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ हसदेव नदी का पानी सीधे घरों में घुस गया है। नदी किनारे के अन्य निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन ने राहत के लिए क्या कदम उठाए हैं?
जिला प्रशासन और राहत-बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा आपात स्थिति में तुरंत अधिकारियों को सूचित करने की अपील की गई है।
मौसम विभाग ने क्या चेतावनी दी है?
मौसम विभाग के अनुसार 17 अगस्त की सुबह उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी का कम दबाव का क्षेत्र 'डिप्रेशन' में बदल गया। अगले 24 घंटों में यह पश्चिम बंगाल से झारखंड की ओर बढ़ सकता है, जिससे छत्तीसगढ़ में बारिश और तेज़ होने की आशंका है।
बांगो डेम और दर्री बराज से पानी छोड़ने का निचले इलाकों पर क्या असर पड़ता है?
जब बांगो डेम और दर्री बराज के गेट एक साथ खोले जाते हैं, तो हसदेव नदी में पानी का प्रवाह अचानक बढ़ जाता है और नदी किनारे के निचले इलाकों में जलभराव हो जाता है। इसीलिए प्रशासन ने निचले क्षेत्रों के निवासियों को विशेष रूप से सतर्क रहने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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