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बेकी नदी खतरे के निशान से ऊपर: भूटान के कुरिशु बांध से पानी छोड़े जाने पर बरपेटा-बक्सा में हाई अलर्ट

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बेकी नदी खतरे के निशान से ऊपर: भूटान के कुरिशु बांध से पानी छोड़े जाने पर बरपेटा-बक्सा में हाई अलर्ट

सारांश

भूटान की कुरिशु जलविद्युत परियोजना से अचानक पानी छोड़े जाने के बाद असम की बेकी नदी उफान पर है। बरपेटा और बक्सा में हाई अलर्ट, नदी में हर गतिविधि पर रोक — और एक बार फिर सीमापारीय जल-प्रबंधन का सवाल सामने है।

मुख्य बातें

भूटान की कुरिशु जलविद्युत परियोजना से पानी छोड़े जाने के बाद बेकी नदी असम में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
बरपेटा और बक्सा जिलों में हाई अलर्ट जारी; तटीय गाँवों में दहशत का माहौल।
बरपेटा जिला आयुक्त ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया; 24 घंटे जलस्तर की निगरानी जारी।
बेकी नदी में मछली पकड़ना, नाव चलाना, स्नान सहित सभी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध अगले आदेश तक।
राहत एवं बचाव दल दोनों जिलों में तैनात; लाउडस्पीकर से लगातार चेतावनी प्रसारित।

असम में बेकी नदी का जलस्तर 1 सितंबर 2026 को खतरे के निशान से ऊपर पहुँच गया, जब भूटान की कुरिशु जलविद्युत परियोजना से भारी मात्रा में पानी अचानक छोड़ा गया। इस स्थिति के मद्देनज़र बरपेटा और बक्सा जिलों के तटीय इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है और दोनों जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सोमवार देर रात बेकी नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा, जिससे नदी किनारे बसे गाँवों में दहशत फैल गई। मंगलवार दिन में जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन अधिकारियों के अनुसार बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब असम पहले से ही मानसून सीज़न में बाढ़ की चुनौतियों से जूझ रहा है।

गौरतलब है कि भूटान के जलविद्युत बाँधों से पानी छोड़े जाने के कारण असम की नदियों में अचानक उफान आने की यह पहली घटना नहीं है। पिछले कई वर्षों में इस तरह की स्थितियाँ बार-बार सामने आई हैं, जिससे सीमापारीय जल-प्रबंधन समन्वय का मुद्दा फिर से चर्चा में है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

बरपेटा के जिला आयुक्त ने प्रभावित तटीय क्षेत्रों का व्यक्तिगत दौरा कर हालात का जायज़ा लिया और सभी अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन नदी के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी कर रहा है।

तटीय गाँवों में लाउडस्पीकर के ज़रिए लगातार चेतावनियाँ प्रसारित की जा रही हैं। प्रशासन ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक बेकी नदी या उसके जलक्षेत्र में मछली पकड़ना, नाव चलाना, बहती लकड़ी एकत्र करना या स्नान करना — किसी भी प्रकार की गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

आम जनता पर असर

नदी किनारे बसे गाँवों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफ़वाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

बरपेटा और बक्सा दोनों जिलों में राहत एवं बचाव दल किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखे गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने कहा कि स्थिति पर पैनी नज़र रखी जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

क्या होगा आगे

जलस्तर की निगरानी जारी है और अधिकारियों के अनुसार स्थिति में सुधार तभी होगा जब भूटान की ओर से पानी छोड़ने की मात्रा कम की जाए। तब तक हाई अलर्ट बरकरार रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और भूटान के बीच जल-प्रबंधन के लिए एक स्थायी पूर्व-सूचना तंत्र की आवश्यकता है, ताकि ऐसी आपात स्थितियों में नागरिकों को पर्याप्त समय मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी एक व्यवस्थित पूर्व-सूचना तंत्र अब तक नहीं बन सका है। बरपेटा और बक्सा के तटीय निवासी हर बार प्रशासनिक अलर्ट के भरोसे रहते हैं, जो अक्सर तब आता है जब नदी पहले ही खतरे के निशान को पार कर चुकी होती है। सीमापारीय जल-साझेदारी पर भारत-भूटान के बीच तकनीकी समन्वय की कमी इस आवर्ती संकट की असली जड़ है — और यही वह सवाल है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेकी नदी में अचानक बाढ़ क्यों आई?
भूटान की कुरिशु जलविद्युत परियोजना से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण बेकी नदी का जलस्तर अचानक खतरे के निशान से ऊपर चला गया। यह घटना 1 सितंबर 2026 को सोमवार देर रात हुई।
बरपेटा और बक्सा में हाई अलर्ट का क्या मतलब है?
हाई अलर्ट के तहत दोनों जिलों में राहत एवं बचाव दल तैनात किए गए हैं और जलस्तर की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। बेकी नदी में मछली पकड़ने, नाव चलाने और स्नान सहित सभी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
क्या बेकी नदी का जलस्तर कम हो रहा है?
मंगलवार दिन में जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन प्रशासन के अनुसार बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है। हाई अलर्ट अगले आदेश तक जारी रहेगा।
तटीय गाँवों के लोगों को क्या करना चाहिए?
प्रशासन ने नदी किनारे के निवासियों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। अफ़वाहों पर ध्यान न देने की भी हिदायत दी गई है।
भूटान के बाँधों से पानी छोड़े जाने पर असम को पहले सूचना क्यों नहीं मिलती?
भारत और भूटान के बीच जल-प्रबंधन के लिए कोई स्थायी और स्वचालित पूर्व-सूचना तंत्र अब तक नहीं बन पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कमी के कारण हर मानसून में असम के तटीय जिले अचानक बाढ़ के खतरे में पड़ जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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