भारत का चालू खाता घाटा अप्रैल-जून 2026 में GDP का 0.5%, RBI डेटा में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 सितंबर 2026 को जारी आँकड़ों में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) $4.2 अरब रहा, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 0.5 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आँकड़ा GDP का 0.4 प्रतिशत था, जो मामूली वृद्धि दर्शाता है।
घाटे की पृष्ठभूमि और वैश्विक संदर्भ
ये आँकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब भारतीय अर्थव्यवस्था मध्य पूर्व संघर्ष के कारण कच्चे तेल, एलपीजी और उर्वरकों की ऊँची अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सामना कर रही है। आयात पर बढ़ते दबाव के चलते 2026-27 की पहली तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा $86.1 अरब रहा। गौरतलब है कि यह 2025-26 की पहली तिमाही के $88.9 अरब से कम है, जो आयात प्रबंधन में कुछ सुधार का संकेत देता है।
सेवा निर्यात और प्राथमिक आय खाते में बदलाव
RBI के बयान के अनुसार, 2026-27 की पहली तिमाही में सेवाओं से होने वाली शुद्ध आय बढ़कर $51.6 अरब हो गई, जो 2025-26 की पहली तिमाही में $47.9 अरब थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से कंप्यूटर सेवाओं, अन्य व्यावसायिक सेवाओं और परिवहन सेवाओं के निर्यात में सालाना आधार पर हुई बढ़ोतरी के कारण रही।
निवेश आय के भुगतान को दर्शाने वाले प्राथमिक आय खाते पर शुद्ध बहिर्प्रवाह (net outflow) घटकर $10.5 अरब रह गया, जो 2025-26 की इसी तिमाही में $13.3 अरब था — यह सकारात्मक संकेत है।
प्रवासी भारतीयों के प्रेषण में उल्लेखनीय उछाल
द्वितीयक आय खाते के अंतर्गत व्यक्तिगत हस्तांतरण प्राप्तियाँ — जिनमें मुख्यतः विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजी गई राशि शामिल है — पहली तिमाही में बढ़कर $42.9 अरब हो गईं। 2025-26 की इसी अवधि में यह राशि $33.2 अरब थी, यानी सालाना आधार पर करीब 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
FDI, FPI और पूँजी प्रवाह का चित्र
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का शुद्ध अंतर्प्रवाह $6.1 अरब रहा, जो 2025-26 की पहली तिमाही के $5.2 अरब से अधिक है। हालाँकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के मोर्चे पर स्थिति चिंताजनक रही — शेयर बाज़ार में $9.6 अरब का शुद्ध बहिर्प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि 2025-26 की इसी तिमाही में $1.6 अरब का शुद्ध अंतर्प्रवाह था।
अनिवासी भारतीय (NRI) जमाराशियों का शुद्ध अंतर्प्रवाह $2.8 अरब रहा, जो एक साल पहले $3.6 अरब था। बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) के तहत शुद्ध अंतर्प्रवाह $3.3 अरब रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के $4.4 अरब से कम है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर असर
RBI के बयान के अनुसार, भुगतान संतुलन (Balance of Payments) के आधार पर विदेशी मुद्रा भंडार में $8.1 अरब की कमी आई। यह 2025-26 की पहली तिमाही के बिल्कुल विपरीत है, जब भंडार में $4.5 अरब की वृद्धि हुई थी। FPI बहिर्प्रवाह और आयात दबाव इस गिरावट के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। आगामी तिमाहियों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक पूँजी प्रवाह की दिशा पर नज़र रखना आवश्यक होगा।