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भारत का चालू खाता अधिशेष अप्रैल 2026 में $4.7 अरब, सर्विसेज निर्यात और प्रेषण से मिली मज़बूती

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भारत का चालू खाता अधिशेष अप्रैल 2026 में $4.7 अरब, सर्विसेज निर्यात और प्रेषण से मिली मज़बूती

सारांश

एक साल पहले 4.8 अरब डॉलर के घाटे में रहा भारत का चालू खाता अप्रैल 2026 में 4.7 अरब डॉलर के अधिशेष में आ गया — सर्विसेज निर्यात 37 अरब डॉलर और प्रेषण 16 अरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊँचाई से यह उलटफेर संभव हुआ।

मुख्य बातें

भारत का चालू खाता अप्रैल 2026 में 4.7 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा; एक साल पहले 4.8 अरब डॉलर का घाटा था।
सर्विसेज निर्यात अधिशेष 18.6 अरब डॉलर — अप्रैल 2025 के 15.9 अरब डॉलर से अधिक।
विदेशी प्रेषण 16 अरब डॉलर — पिछले वर्ष के 9.4 अरब डॉलर से लगभग 70% अधिक।
शुद्ध FDI 7.4 अरब डॉलर ; कुल FDI अंतर्प्रवाह 11.4 अरब डॉलर — दोगुने से ज़्यादा।
FPI में 8.7 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी; बैंकिंग पूँजी में 3.7 अरब डॉलर का बहिर्प्रवाह।
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में चालू खाता अधिशेष 7.1 अरब डॉलर अर्थात GDP का 0.7% ।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सोमवार, 15 जून 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत का चालू खाता अप्रैल 2026 में 4.7 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा — जबकि ठीक एक साल पहले यही खाता 4.8 अरब डॉलर के घाटे में था। यह उलटफेर मुख्यतः सर्विसेज निर्यात में उछाल और विदेशों में कार्यरत भारतीयों के बढ़े हुए प्रेषण की वजह से संभव हुआ।

सर्विसेज निर्यात में तेज़ उछाल

आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत का सर्विसेज निर्यात 37 अरब डॉलर रहा, जबकि सर्विसेज आयात 18.4 अरब डॉलर पर रहा। इससे सर्विसेज का शुद्ध अधिशेष 18.6 अरब डॉलर हो गया, जो अप्रैल 2025 के 15.9 अरब डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। IT और बिज़नेस प्रोसेस सेवाओं की वैश्विक माँग इस बढ़त का प्रमुख आधार मानी जा रही है।

प्रेषण में ऐतिहासिक उछाल

विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजा गया प्रेषण अप्रैल 2026 में 16 अरब डॉलर रहा — अप्रैल 2025 के 9.4 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 70% की बढ़त। इसके साथ ही शुद्ध आय घाटा भी घटकर 1.9 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 3 अरब डॉलर था। गौरतलब है कि प्रेषण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का एक स्थिर और भरोसेमंद स्रोत माना जाता है।

FDI में उल्लेखनीय वृद्धि, FPI में बड़ी निकासी

अप्रैल 2026 में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़कर 7.4 अरब डॉलर हो गया, जो अप्रैल 2025 में महज़ 1.6 अरब डॉलर था। कुल FDI अंतर्प्रवाह 5 अरब डॉलर से अधिक बढ़कर 11.4 अरब डॉलर पर पहुँचा — यानी दोगुने से भी ज़्यादा। हालाँकि, इसी महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में 8.7 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी दर्ज की गई, जबकि अप्रैल 2025 में FPI अंतर्प्रवाह 2.1 अरब डॉलर था। बैंकिंग पूँजी भी नकारात्मक रही — एक वर्ष पूर्व 3.3 अरब डॉलर के अंतर्प्रवाह के मुकाबले 3.7 अरब डॉलर का शुद्ध बहिर्प्रवाह दर्ज हुआ।

जनवरी-मार्च तिमाही का प्रदर्शन

RBI के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत का चालू खाता अधिशेष 7.1 अरब डॉलर अर्थात GDP का 0.7% रहा। हालाँकि, उसी तिमाही में FPI का शुद्ध बहिर्प्रवाह 12 अरब डॉलर रहा, जो पूँजी खाते पर दबाव का संकेत देता है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितता और डॉलर की मज़बूती भारत के बाह्य क्षेत्र पर असर डाल रही है। विश्लेषकों के अनुसार, सर्विसेज निर्यात और प्रेषण की निरंतर बढ़त भारत की बाह्य स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन FPI बहिर्प्रवाह और बैंकिंग पूँजी में कमी पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। आगामी तिमाहियों में व्यापारिक घाटे की दिशा और वैश्विक माँग का रुख निर्णायक भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी नींव की जाँच ज़रूरी है — 16 अरब डॉलर का प्रेषण एकल महीने के लिए असाधारण रूप से ऊँचा है और इसमें आधार प्रभाव तथा मौसमी कारकों की भूमिका हो सकती है। दूसरी तरफ, FPI से 8.7 अरब डॉलर की निकासी और बैंकिंग पूँजी में 3.7 अरब डॉलर का बहिर्प्रवाह यह बताता है कि पूँजी खाते पर दबाव बना हुआ है। चालू खाते की मज़बूती और पूँजी खाते की कमज़ोरी का यह अंतर्विरोध भारत के विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन के लिए आने वाली तिमाहियों में असली चुनौती होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का चालू खाता अधिशेष अप्रैल 2026 में कितना रहा?
RBI के आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत का चालू खाता 4.7 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा। यह पिछले साल अप्रैल 2025 के 4.8 अरब डॉलर के घाटे के मुकाबले बड़ा उलटफेर है।
चालू खाता अधिशेष में आने की मुख्य वजह क्या रही?
दो प्रमुख कारण रहे — सर्विसेज निर्यात अधिशेष 15.9 अरब डॉलर से बढ़कर 18.6 अरब डॉलर हुआ, और विदेशी प्रेषण 9.4 अरब डॉलर से उछलकर 16 अरब डॉलर पर पहुँचा। इन दोनों ने मिलकर व्यापारिक घाटे की भरपाई की।
अप्रैल 2026 में भारत में FDI और FPI का क्या हाल रहा?
शुद्ध FDI 1.6 अरब डॉलर से बढ़कर 7.4 अरब डॉलर हो गया और कुल FDI अंतर्प्रवाह 11.4 अरब डॉलर रहा। दूसरी तरफ, FPI में 8.7 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी हुई जो पूँजी खाते पर दबाव का संकेत है।
वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में चालू खाते की स्थिति कैसी रही?
RBI के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में चालू खाता अधिशेष 7.1 अरब डॉलर अर्थात GDP का 0.7% रहा। हालाँकि, उसी तिमाही में FPI का शुद्ध बहिर्प्रवाह 12 अरब डॉलर रहा।
चालू खाता अधिशेष भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
चालू खाता अधिशेष यह दर्शाता है कि देश विदेश से जितना खर्च करता है, उससे अधिक कमाता है — जो रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए सकारात्मक है। यह वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत की बाह्य वित्तीय स्थिति को मज़बूत बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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