भारत का भुगतान संतुलन वित्त वर्ष 27 में 75 अरब डॉलर तक संभव, RBI के उपायों से मजबूत स्थिति: बैंक ऑफ बड़ौदा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा उठाए गए विशेष उपायों के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का भुगतान संतुलन (Balance of Payment) अधिशेष 65 से 75 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान है। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक ताज़ा रिपोर्ट में यह आकलन प्रस्तुत किया गया है, जो भारत की बाहरी वित्तीय स्थिरता के लिहाज़ से सकारात्मक संकेत देती है।
चालू खाता घाटे का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंस में निरंतर मज़बूती के चलते चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1 से 1.25 प्रतिशत के बीच सीमित रहने की संभावना है। यह स्तर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए प्रबंधनीय माना जाता है।
RBI की विशेष योजनाओं से रिकॉर्ड इनफ्लो
RBI द्वारा विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के लिए शुरू की गई विशेष योजनाओं के तहत कुल 136.4 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया है। इसमें सर्वाधिक योगदान विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) — FCNR(B) जमा का रहा, जिसके ज़रिये 127.2 अरब डॉलर जुटाए गए — यह कुल इनफ्लो का 90 प्रतिशत से अधिक है।
इसके अतिरिक्त, विदेशी मुद्रा में विदेशी कर्ज (OFCB) के माध्यम से 5.3 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्य उधारी (ECB) के ज़रिये 3.9 अरब डॉलर प्राप्त हुए। कई बैंकों ने 3 से 5 वर्ष की FCNR(B) जमा पर ब्याज दरें 2-4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6-7 प्रतिशत कर दीं, जिससे ये जमाएँ अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए अधिक आकर्षक बन गईं।
विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊँचाई पर
इन उपायों का प्रत्यक्ष असर विदेशी मुद्रा भंडार पर दिखा। भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति में 47.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिससे कुल विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.3 अरब डॉलर पर पहुँच गया। यह भंडार रुपये के अवमूल्यन को रोकने और बाहरी दबावों से निपटने में सुरक्षा कवच का काम कर रहा है।
इसके साथ ही, RBI ने 6 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुल ₹53.5 लाख करोड़ की परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी की घोषणा कर अतिरिक्त तरलता को सक्रिय रूप से सोखा है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की स्थिति
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में कहा गया है, 'अर्थव्यवस्था का भविष्य अच्छा दिख रहा है। भले ही मध्य पूर्व के हालात को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन भारत अब बाहरी झटकों का सामना करने के लिए मजबूत स्थिति में है।'
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लगातार आउटफ्लो ने भारत की बाहरी स्थिरता पर दबाव बना दिया था और डॉलर के मुकाबले रुपये पर भी असर पड़ रहा था। गौरतलब है कि RBI और सरकार ने इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष इनफ्लो योजनाएँ शुरू की थीं।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक तेल कीमतें स्थिर रहती हैं और FPI प्रवाह सामान्य होता है, तो भारत का भुगतान संतुलन और मज़बूत हो सकता है। रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार और RBI की सक्रिय तरलता प्रबंधन नीति भारत को आने वाले वित्त वर्ष में एक स्थिर व्यापक आर्थिक स्थिति में रखने की दिशा में काम कर रही है।