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भारत को वित्त वर्ष 2027 में 90-95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह संभव, BOP सरप्लस ₹64 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान

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भारत को वित्त वर्ष 2027 में 90-95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह संभव, BOP सरप्लस ₹64 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान

सारांश

केयरएज रेटिंग्स के अनुमान के अनुसार, RBI की स्वैप विंडो और FCNR-B जमाओं को निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है — 5 जून से 31 जुलाई के बीच अकेले 40.8 अरब डॉलर आए। वित्त वर्ष 2027 में 64 अरब डॉलर का BOP सरप्लस भारत की बाहरी स्थिति को नई मजबूती देगा।

मुख्य बातें

केयरएज रेटिंग्स के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में 90-95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह संभव।
FCNR-B प्रवाह का अनुमान संशोधित कर लगभग 80 अरब डॉलर किया गया; ECB और OFCB से 10-15 अरब डॉलर अतिरिक्त।
पूंजी खाते का सरप्लस लगभग 108 अरब डॉलर अनुमानित — पिछले वर्ष यह केवल 2 अरब डॉलर था।
5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच RBI नीतिगत उपायों से 40.8 अरब डॉलर आकर्षित हुए, जिसमें FCNR-B का हिस्सा 36.7 अरब डॉलर ।
बैंकिंग प्रणाली की तरलता जुलाई के ₹1.1 लाख करोड़ से बढ़कर अगस्त में ₹3 लाख करोड़ हो गई।
बड़े बैंक FCNR-B पर 6.0-6.5% , छोटे बैंक ~7% ब्याज दर दे रहे हैं।

केयरएज रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में 90 से 95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आने की प्रबल संभावना है। यह उछाल मुख्यतः फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक (FCNR-B) जमाओं में मजबूत निवेशक रुचि और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए 5 जून 2026 को घोषित नीतिगत उपायों से प्रेरित है। इन प्रवाहों के परिणामस्वरूप भारत का भुगतान संतुलन (BOP) 64 अरब डॉलर के सरप्लस में पहुँच सकता है।

FCNR-B प्रवाह और पूंजी खाते का अनुमान

केयरएज रेटिंग्स ने FCNR-B प्रवाह का अनुमान संशोधित कर लगभग 80 अरब डॉलर कर दिया है। इसके अतिरिक्त, बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेशी मुद्रा में बाहरी उधारी (OFCB) से 10 से 15 अरब डॉलर और आने की उम्मीद है। इन दोनों स्रोतों को मिलाकर भारत के पूंजी खाते का सरप्लस लगभग 108 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है — जबकि पिछले वर्ष यह केवल 2 अरब डॉलर था।

BOP में ऐतिहासिक बदलाव

रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत का BOP 5 अरब डॉलर के घाटे में था, जो वित्त वर्ष 2026 में 23.6 अरब डॉलर के सरप्लस में बदल गया। अब वित्त वर्ष 2027 में यह सरप्लस 64 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है — एक उल्लेखनीय ऊर्ध्वगामी प्रक्षेपवक्र। केयरएज रेटिंग्स ने कहा कि "यह भारत की बाहरी स्थिति में महत्वपूर्ण मजबूती को दर्शाएगा और वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।"

RBI के नीतिगत उपायों को मजबूत प्रतिक्रिया

5 जून 2026 को घोषित उपायों के तहत FCNR-B जमाओं, ECB और OFCB के लिए रियायती स्वैप विंडो खोली गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच इन उपायों के माध्यम से कुल 40.8 अरब डॉलर आकर्षित हुए। इनमें FCNR-B प्रवाह 36.7 अरब डॉलर रहा, जबकि ECB और OFCB ने मिलकर 4.1 अरब डॉलर का योगदान दिया।

ब्याज दरें और बैंकिंग तरलता पर असर

वर्तमान में बड़े बैंक FCNR-B जमाओं पर 6.0 से 6.5 प्रतिशत की ब्याज दर दे रहे हैं, जबकि कुछ छोटे और नए बैंक लगभग 7 प्रतिशत तक की दर की पेशकश कर रहे हैं। इस मजबूत पूंजी प्रवाह का सीधा असर घरेलू तरलता पर भी दिख रहा है — जुलाई में बैंकिंग प्रणाली की तरलता औसतन लगभग ₹1.1 लाख करोड़ थी, जो अगस्त में अब तक बढ़कर ₹3 लाख करोड़ हो गई है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी पलायन का जोखिम बरकरार है। भारत का मजबूत BOP सरप्लस रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार को और सुदृढ़ कर सकता है। गौरतलब है कि यह प्रवाह चालू खाते के घाटे की भरपाई में भी सहायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूलतः एक अल्पकालिक ऋण साधन है — जमाकर्ता परिपक्वता पर धन वापस ले जाएंगे, जिससे भविष्य में बाहरी दबाव बन सकता है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह प्रवाह दीर्घकालिक FDI और इक्विटी निवेश में बदलता है, या केवल ब्याज दर-संचालित अस्थायी पूंजी बना रहता है। BOP सरप्लस का आंकड़ा उत्साहजनक है, पर वैश्विक ब्याज दर चक्र पलटने पर यही प्रवाह उलटा भी हो सकता है — एक जोखिम जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2027 में भारत को कितना पूंजी प्रवाह मिलने का अनुमान है?
केयरएज रेटिंग्स के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में 90 से 95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आने की संभावना है। इसमें FCNR-B जमाओं से लगभग 80 अरब डॉलर और ECB व OFCB से 10-15 अरब डॉलर शामिल हैं।
FCNR-B जमा क्या होती है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
FCNR-B यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक जमा एक ऐसी योजना है जिसमें अनिवासी भारतीय (NRI) विदेशी मुद्रा में भारतीय बैंकों में जमा कर सकते हैं। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने और चालू खाते के घाटे की भरपाई करने का एक प्रमुख साधन है।
RBI ने 5 जून 2026 को कौन से नीतिगत उपाय घोषित किए थे?
5 जून 2026 को RBI ने FCNR-B जमाओं, ECB और OFCB के लिए रियायती स्वैप विंडो सहित कई उपाय घोषित किए थे। इन उपायों को निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली और 5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच कुल 40.8 अरब डॉलर आकर्षित हुए।
भारत का भुगतान संतुलन (BOP) वित्त वर्ष 2027 में कैसा रहने का अनुमान है?
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भारत का BOP 64 अरब डॉलर के सरप्लस में रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025 के 5 अरब डॉलर के घाटे और वित्त वर्ष 2026 के 23.6 अरब डॉलर के सरप्लस की तुलना में बड़ा सुधार है।
इस पूंजी प्रवाह का भारत की बैंकिंग तरलता पर क्या असर पड़ा है?
मजबूत पूंजी प्रवाह से घरेलू बैंकिंग तरलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जुलाई में बैंकिंग प्रणाली की तरलता औसतन लगभग ₹1.1 लाख करोड़ थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹3 लाख करोड़ हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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