13 जुलाई 2026
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भारत का कुल निर्यात अप्रैल-जून 2026-27 में 11.37% बढ़कर 232.73 अरब डॉलर पहुंचा, वस्तु-सेवा दोनों में उछाल

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भारत का कुल निर्यात अप्रैल-जून 2026-27 में 11.37% बढ़कर 232.73 अरब डॉलर पहुंचा, वस्तु-सेवा दोनों में उछाल

सारांश

वैश्विक व्यापार दबावों के बावजूद भारत की निर्यात मशीनरी ने पहली तिमाही में दमदार प्रदर्शन किया। वस्तु निर्यात में 15.9% और नॉन-पेट्रोलियम निर्यात में 12.44% की बढ़त, रत्न-आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की अगुवाई में — यह संकेत देती है कि भारत का निर्यात आधार विविध और लचीला हो रहा है।

मुख्य बातें

भारत का कुल निर्यात (वस्तु + सेवा) अप्रैल-जून 2026-27 में 11.37% बढ़कर 232.73 अरब डॉलर पहुंचा।
वस्तु निर्यात 129.32 अरब डॉलर ; वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 86.86 अरब डॉलर हुआ।
सेवा निर्यात 103.41 अरब डॉलर ; सेवा व्यापार अधिशेष 49.43 अरब डॉलर रहा।
नॉन-पेट्रोलियम निर्यात 12.44% बढ़कर 106.30 अरब डॉलर पहुंचा।
जून 2026 में रत्न-आभूषण निर्यात 34.64% , इंजीनियरिंग उत्पाद 20.74% और इलेक्ट्रॉनिक सामान 18.93% बढ़ा।

वाणिज्य मंत्रालय के 13 जुलाई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवा मिलाकर) 11.37 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि के साथ 232.73 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्शाता है और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच भारतीय निर्यात की लचीलापन को रेखांकित करता है।

वस्तु निर्यात में तेज़ उछाल

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026-27 के दौरान वस्तु (मर्चेंडाइज) निर्यात 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह 111.57 अरब डॉलर था — यानी सालाना आधार पर करीब 15.9 प्रतिशत की वृद्धि। हालांकि, इस अवधि में वस्तु व्यापार घाटा भी बढ़कर 86.86 अरब डॉलर हो गया, जो एक वर्ष पहले 68.75 अरब डॉलर था। यह बढ़ता घाटा आयात में भी तेज़ी का संकेत देता है, जो घरेलू मांग में विस्तार से जुड़ा हो सकता है।

अकेले जून 2026 में वस्तु निर्यात 40.41 अरब डॉलर रहा, जो जून 2025 के 34.98 अरब डॉलर की तुलना में काफी अधिक है।

सेवा निर्यात और अधिशेष में भी बढ़त

अप्रैल-जून 2026-27 में सेवा निर्यात का अनुमानित मूल्य 103.41 अरब डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही के 97.41 अरब डॉलर से अधिक है। सेवा व्यापार अधिशेष (सर्विसेज ट्रेड सरप्लस) बढ़कर 49.43 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 47.90 अरब डॉलर था। जून 2026 में सेवा निर्यात 33.03 अरब डॉलर रहा, जो जून 2025 के 32.11 अरब डॉलर से अधिक है। सेवा क्षेत्र का यह मज़बूत प्रदर्शन वस्तु व्यापार घाटे की भरपाई में अहम भूमिका निभाता है।

नॉन-पेट्रोलियम निर्यात में भी मज़बूती

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026-27 में नॉन-पेट्रोलियम निर्यात 106.30 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 94.54 अरब डॉलर की तुलना में 12.44 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि निर्यात वृद्धि केवल ऊर्जा मूल्यों पर निर्भर नहीं, बल्कि विविध क्षेत्रों में फैली हुई है।

जून 2026 के शीर्ष निर्यात क्षेत्र

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में वस्तु निर्यात में वृद्धि के प्रमुख क्षेत्र रहे:

रत्न एवं आभूषण का निर्यात 34.64 प्रतिशत बढ़कर जून 2025 के 1.79 अरब डॉलर से जून 2026 में 2.41 अरब डॉलर पहुंचा। इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 20.74 प्रतिशत उछलकर 9.51 अरब डॉलर से 11.48 अरब डॉलर हो गया। जैविक और अकार्बनिक रसायनों में 19.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ निर्यात 2.32 अरब डॉलर से 2.77 अरब डॉलर पहुंचा।

इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 18.93 प्रतिशत बढ़कर 4.14 अरब डॉलर से 4.93 अरब डॉलर हो गया, जबकि चावल निर्यात 16.48 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 0.86 अरब डॉलर से 1.00 अरब डॉलर पर पहुंचा।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार पर अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों का दबाव बना हुआ है। गौरतलब है कि भारत का निर्यात विविधीकरण — विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग क्षेत्र में — इस तिमाही के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखता है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह गति बनी रहती है, खासकर जब वैश्विक मांग के संकेत मिले-जुले हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बढ़ता वस्तु व्यापार घाटा — जो एक साल में 68.75 से 86.86 अरब डॉलर पहुंच गया — चिंता का विषय है। सेवा अधिशेष इस घाटे की आंशिक भरपाई करता है, पर यह निर्भरता दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं। इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग में वृद्धि सकारात्मक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह गति वैश्विक मंदी और अमेरिकी टैरिफ दबावों के बीच अगली दो तिमाहियों में भी बनी रहती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अप्रैल-जून 2026-27 में भारत का कुल निर्यात कितना रहा?
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारत का कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवा) 11.37 प्रतिशत बढ़कर 232.73 अरब डॉलर पहुंचा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा इससे कम था।
वस्तु निर्यात और व्यापार घाटे में क्या बदलाव आया?
अप्रैल-जून 2026-27 में वस्तु निर्यात 129.32 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 111.57 अरब डॉलर से अधिक है। हालांकि, वस्तु व्यापार घाटा भी बढ़कर 86.86 अरब डॉलर हो गया, जो एक वर्ष पहले 68.75 अरब डॉलर था।
जून 2026 में किन क्षेत्रों ने सबसे अधिक निर्यात वृद्धि दर्ज की?
जून 2026 में रत्न एवं आभूषण (34.64%), इंजीनियरिंग उत्पाद (20.74%), जैविक-अकार्बनिक रसायन (19.42%), इलेक्ट्रॉनिक सामान (18.93%) और चावल (16.48%) शीर्ष वृद्धि वाले क्षेत्र रहे।
भारत का सेवा निर्यात इस तिमाही में कैसा रहा?
अप्रैल-जून 2026-27 में सेवा निर्यात का अनुमानित मूल्य 103.41 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 97.41 अरब डॉलर से अधिक है। सेवा व्यापार अधिशेष बढ़कर 49.43 अरब डॉलर हो गया।
नॉन-पेट्रोलियम निर्यात में कितनी वृद्धि दर्ज हुई?
अप्रैल-जून 2026-27 में नॉन-पेट्रोलियम निर्यात 12.44 प्रतिशत बढ़कर 106.30 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 94.54 अरब डॉलर था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि निर्यात वृद्धि व्यापक आधार पर है।
राष्ट्र प्रेस
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