भारत का वस्तु निर्यात मई 2026 में 18% उछला, 45.2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड के करीब
सारांश
मुख्य बातें
भारत का वस्तु निर्यात मई 2026 में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी के साथ 45.2 अरब डॉलर पर पहुँच गया — जो अप्रैल 2026 के 43.56 अरब डॉलर से भी अधिक है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार, 15 जून को जारी आँकड़ों में यह जानकारी सामने आई। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे अब तक दर्ज की गई सर्वाधिक निर्यात वृद्धि दरों में से एक बताया।
मुख्य आँकड़े और प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों — अप्रैल-मई — में देश का कुल वस्तु निर्यात 88.91 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16.09 प्रतिशत अधिक है। तुलना के लिए, अप्रैल 2025 में वस्तु निर्यात 38.28 अरब डॉलर था — यानी एक वर्ष में उल्लेखनीय छलांग।
अग्रवाल ने मीडिया से कहा, 'अगर हम इसी रफ्तार को बनाए रखते हैं, तो वित्त वर्ष 27 व्यापार के लिहाज से एक अच्छा साल होगा।' उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत का निर्यात आधार लगभग दोगुना हो चुका है, जबकि सेवा निर्यात में तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आयात और व्यापार घाटे की स्थिति
मई में आयात 20.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 73.41 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर रहा — जो मई 2025 के 22.56 अरब डॉलर के घाटे से सालाना आधार पर 25.04 प्रतिशत अधिक है।
गौरतलब है कि व्यापार घाटे में यह बढ़ोतरी मुख्यतः पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की वजह से हुई है — जो आयात बिल को भारी बना रहा है।
पश्चिम एशिया निर्यात में सुधार
वाणिज्य सचिव के अनुसार, मध्य-पूर्व को होने वाले निर्यात — जो पहले भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्रभावित हुए थे — में मई में सुधार देखा गया। यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और यमन को निर्यात बढ़ने से पश्चिम एशिया को कुल निर्यात लगभग मई 2025 के स्तर पर वापस आ गया।
अग्रवाल ने यह भी संकेत दिया कि हाल ही में घोषित यूएस-ईरान शांति समझौता यदि 'लंबे समय तक टिकता है', तो 'हमारी कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा' — जो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम करने और व्यापार घाटे को नियंत्रित रखने के लिहाज से अहम होगा।
मुक्त व्यापार समझौतों की भूमिका
वाणिज्य सचिव ने कहा कि जैसे-जैसे नए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) लागू होंगे, निर्यात वृद्धि की यह गति और तेज़ होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि सभी एफटीए के आने से निर्यात में बढ़ोतरी की यह तेजी नए जोश के साथ जारी रहेगी।'
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बावजूद भारत अपने निर्यात बाज़ारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में FTA का विस्तार और ऊर्जा कीमतों का रुझान, व्यापार घाटे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।