1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत का वस्तु निर्यात मई 2026 में 18% उछला, 45.2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड के करीब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत का वस्तु निर्यात मई 2026 में 18% उछला, 45.2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड के करीब

सारांश

मई 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 18% उछलकर 45.2 अरब डॉलर पर पहुँचा — वाणिज्य सचिव ने इसे ऐतिहासिक वृद्धि दरों में से एक बताया। लेकिन कच्चे तेल की ऊँची कीमतों ने आयात को 73.41 अरब डॉलर तक धकेला और व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर पर पहुँच गया।

मुख्य बातें

भारत का वस्तु निर्यात मई 2026 में सालाना आधार पर 18% बढ़कर 45.2 अरब डॉलर रहा।
वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-मई में कुल निर्यात 88.91 अरब डॉलर — सालाना 16.09% की वृद्धि।
आयात 20.62% बढ़कर 73.41 अरब डॉलर ; व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर — सालाना 25.04% अधिक।
व्यापार घाटे में बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना।
यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और यमन को निर्यात बढ़ने से पश्चिम एशिया में सुधार।
पिछले 12 वर्षों में भारत का निर्यात लगभग दोगुना , सेवा निर्यात तीन गुना बढ़ा।

भारत का वस्तु निर्यात मई 2026 में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी के साथ 45.2 अरब डॉलर पर पहुँच गया — जो अप्रैल 2026 के 43.56 अरब डॉलर से भी अधिक है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार, 15 जून को जारी आँकड़ों में यह जानकारी सामने आई। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे अब तक दर्ज की गई सर्वाधिक निर्यात वृद्धि दरों में से एक बताया।

मुख्य आँकड़े और प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों — अप्रैल-मई — में देश का कुल वस्तु निर्यात 88.91 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16.09 प्रतिशत अधिक है। तुलना के लिए, अप्रैल 2025 में वस्तु निर्यात 38.28 अरब डॉलर था — यानी एक वर्ष में उल्लेखनीय छलांग।

अग्रवाल ने मीडिया से कहा, 'अगर हम इसी रफ्तार को बनाए रखते हैं, तो वित्त वर्ष 27 व्यापार के लिहाज से एक अच्छा साल होगा।' उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत का निर्यात आधार लगभग दोगुना हो चुका है, जबकि सेवा निर्यात में तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आयात और व्यापार घाटे की स्थिति

मई में आयात 20.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 73.41 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर रहा — जो मई 2025 के 22.56 अरब डॉलर के घाटे से सालाना आधार पर 25.04 प्रतिशत अधिक है।

गौरतलब है कि व्यापार घाटे में यह बढ़ोतरी मुख्यतः पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की वजह से हुई है — जो आयात बिल को भारी बना रहा है।

पश्चिम एशिया निर्यात में सुधार

वाणिज्य सचिव के अनुसार, मध्य-पूर्व को होने वाले निर्यात — जो पहले भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्रभावित हुए थे — में मई में सुधार देखा गया। यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और यमन को निर्यात बढ़ने से पश्चिम एशिया को कुल निर्यात लगभग मई 2025 के स्तर पर वापस आ गया।

अग्रवाल ने यह भी संकेत दिया कि हाल ही में घोषित यूएस-ईरान शांति समझौता यदि 'लंबे समय तक टिकता है', तो 'हमारी कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा' — जो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम करने और व्यापार घाटे को नियंत्रित रखने के लिहाज से अहम होगा।

मुक्त व्यापार समझौतों की भूमिका

वाणिज्य सचिव ने कहा कि जैसे-जैसे नए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) लागू होंगे, निर्यात वृद्धि की यह गति और तेज़ होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि सभी एफटीए के आने से निर्यात में बढ़ोतरी की यह तेजी नए जोश के साथ जारी रहेगी।'

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बावजूद भारत अपने निर्यात बाज़ारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में FTA का विस्तार और ऊर्जा कीमतों का रुझान, व्यापार घाटे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर व्यापार घाटे में छिपी है — जो एक साल में 22.56 से 28.21 अरब डॉलर पर पहुँच गया, यानी 25% की छलांग। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना भारत की ऊर्जा आयात-निर्भरता की पुरानी कमज़ोरी को फिर उजागर करता है। वाणिज्य सचिव का FTA पर भरोसा सही दिशा में है, लेकिन जब तक भारत ऊर्जा आयात बिल को नियंत्रित नहीं करता, निर्यात की हर बड़ी छलांग घाटे के बोझ तले दब सकती है। यूएस-ईरान शांति समझौते पर टिकी उम्मीदें भू-राजनीतिक अनिश्चितता के मद्देनज़र नाज़ुक आधार हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मई 2026 में भारत का वस्तु निर्यात कितना रहा?
मई 2026 में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.2 अरब डॉलर रहा। अप्रैल 2026 में यह 43.56 अरब डॉलर था। वाणिज्य मंत्रालय ने यह आँकड़े 15 जून को जारी किए।
मई 2026 में भारत का व्यापार घाटा क्यों बढ़ा?
मई 2026 में व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर रहा, जो मई 2025 के 22.56 अरब डॉलर से 25.04% अधिक है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना रही, जिससे आयात 73.41 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक भारत का कुल निर्यात कितना है?
वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-मई महीनों में भारत का कुल वस्तु निर्यात 88.91 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16.09 प्रतिशत अधिक है।
पश्चिम एशिया को भारत के निर्यात पर क्या असर पड़ा?
भू-राजनीतिक तनाव के कारण पहले प्रभावित हुए पश्चिम एशिया को निर्यात में मई में सुधार हुआ। यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और यमन को निर्यात बढ़ने से यह लगभग मई 2025 के स्तर पर वापस आ गया।
भारत के निर्यात में आगे और वृद्धि की क्या संभावना है?
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के लागू होने से निर्यात वृद्धि की गति और तेज़ होने की उम्मीद है। यूएस-ईरान शांति समझौते के स्थायी रहने पर कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है, जिससे व्यापार घाटा भी नियंत्रित हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले