जुलाई 2026 में भारत का निर्यात 13.31% उछला, $80.14 अरब का नया रिकॉर्ड: वाणिज्य मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य मंत्रालय के 13 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 13.31 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ $80.14 अरब डॉलर पर पहुँच गया — जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यात क्षेत्र की उल्लेखनीय मजबूती को दर्शाता है। इसी अवधि में कुल आयात 15.83 प्रतिशत बढ़कर $95.16 अरब डॉलर रहा।
वस्तु निर्यात में मजबूत उछाल
जुलाई 2026 में मर्चेंडाइज (वस्तु) निर्यात $44.24 अरब डॉलर रहा, जो जुलाई 2025 के $36.98 अरब डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इस वृद्धि में पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन और वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख भूमिका रही।
सर्वाधिक वृद्धि पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में दर्ज हुई, जो 67.64 प्रतिशत उछलकर $6.92 अरब डॉलर पर पहुँचा। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात 57.4 प्रतिशत बढ़कर $5.92 अरब डॉलर हो गया, जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का संकेत है।
इंजीनियरिंग, रसायन और वस्त्र क्षेत्र का योगदान
इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 17.71 प्रतिशत की वृद्धि के साथ $12.24 अरब डॉलर रहा, जो इस श्रेणी में सबसे बड़ा एकल-माह योगदान है। कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों का निर्यात 14.39 प्रतिशत बढ़कर $2.80 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्र — जिसमें कॉटन यार्न, फैब्रिक, मेड-अप्स और हैंडलूम उत्पाद शामिल हैं — का निर्यात 8.4 प्रतिशत बढ़कर $1.02 अरब डॉलर रहा। यह वृद्धि ग्रामीण और रोज़गार-सृजन से जुड़े उद्योगों के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
सेवा निर्यात की स्थिति
जुलाई 2026 में सेवाओं का अनुमानित निर्यात $35.89 अरब डॉलर रहा, जो जुलाई 2025 के $33.74 अरब डॉलर से अधिक है। सेवाओं का आयात इसी अवधि में $18.94 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के $17.30 अरब डॉलर से ऊपर है।
चालू वित्त वर्ष में संचयी प्रदर्शन
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जुलाई अवधि में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात $316.42 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के $279.63 अरब डॉलर की तुलना में 13.16 प्रतिशत अधिक है। इसी दौरान वस्तु निर्यात का संचयी मूल्य $173.78 अरब डॉलर रहा — वार्षिक आधार पर 17.04 प्रतिशत की बढ़त।
गौरतलब है कि यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार में अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है। आँकड़े संकेत देते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारतीय उत्पादों और सेवाओं की माँग स्थिर बनी हुई है और आगे भी सकारात्मक रुझान जारी रहने की संभावना है।