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भारत का निर्यात 12 वर्षों में 85% उछला, वित्त वर्ष 2025-26 में $863 अरब के पार

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भारत का निर्यात 12 वर्षों में 85% उछला, वित्त वर्ष 2025-26 में $863 अरब के पार

सारांश

12 वर्षों में भारत का निर्यात 468 अरब से 863 अरब डॉलर — 85% की छलांग। लेकिन असली कहानी यह है कि सेवा क्षेत्र अब कुल निर्यात का 48.8% है, जो 2014-15 में 33.8% था। IT, GCC और डिजिटल सेवाओं ने भारत के निर्यात का चेहरा बदल दिया है।

मुख्य बातें

भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 863 अरब डॉलर पर पहुँचा, जो 2014-15 में 468 अरब डॉलर था — 85% की वृद्धि।
वार्षिक निर्यात वृद्धि दर 5.7% ; सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9% सालाना रही।
वस्तु निर्यात 310 अरब से बढ़कर 442 अरब डॉलर ; इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख चालक।
सेवा निर्यात 158.1 अरब से 421.3 अरब डॉलर ; कुल निर्यात में हिस्सेदारी 33.8% से बढ़कर 48.8% ।
सॉफ्टवेयर सेवाएँ कुल सेवा निर्यात में 40%+ हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर।
मई 2026 में वस्तु निर्यात सालाना 18% बढ़कर 45.2 अरब डॉलर रहा।

भारत का कुल वार्षिक निर्यात बीते 12 वर्षों में 85 प्रतिशत की छलांग लगाकर वित्त वर्ष 2025-26 में 863 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह आँकड़ा 468 अरब डॉलर था। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 16 जून को यह जानकारी सार्वजनिक की। इस अवधि में देश की वार्षिक निर्यात वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही, जो वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती साख को दर्शाती है।

वस्तु निर्यात में उछाल

समीक्षा अवधि में वस्तुओं (Goods) का निर्यात 310 अरब डॉलर से बढ़कर 442 अरब डॉलर हो गया। मंत्रालय के अनुसार, इस वृद्धि में इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की भूमिका सबसे उल्लेखनीय रही है। यह संकेत देता है कि भारत का निर्यात आधार परंपरागत कच्चे माल से हटकर उच्च-मूल्य (High-Value) उत्पादों की ओर तेज़ी से स्थानांतरित हो रहा है। मई 2026 में अकेले वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.2 अरब डॉलर रहा।

सेवा क्षेत्र बना निर्यात का नया इंजन

सर्विसेज निर्यात इस दौरान 158.1 अरब डॉलर से लगभग तीन गुना बढ़कर 421.3 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जिसकी सालाना वृद्धि दर 9 प्रतिशत रही। इसके परिणामस्वरूप कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 33.8 प्रतिशत से बढ़कर 48.8 प्रतिशत हो गई है — यानी अब भारत के हर दो डॉलर के निर्यात में लगभग एक डॉलर सेवाओं से आता है।

इस तीव्र वृद्धि के पीछे देश के आईटी क्षेत्र का विस्तार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की बढ़ती संख्या और कोविड महामारी के बाद डिजिटल सेवाओं की वैश्विक माँग में आई उछाल प्रमुख कारण रहे हैं। सॉफ्टवेयर सेवाएँ कुल सेवा निर्यात में 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी योगदानकर्ता बनी हुई हैं, जबकि प्रोफेशनल और मैनेजमेंट कंसल्टिंग दूसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरी हैं।

नीतिगत सुधारों की भूमिका

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि निर्यात को सुगम बनाने के लिए पिछले वर्षों में कई संरचनात्मक सुधार किए गए। इनमें 47 व्यापार प्रक्रियाओं का सरलीकरण, स्वचालित विदेश व्यापार नीति (FTP) प्रक्रियाएँ, ऑटो-वैलिडेटेड आयातक-निर्यातक कोड (IEC) जारी करना और एक समर्पित निर्यात संवर्धन मिशन की शुरुआत शामिल हैं। गौरतलब है कि ये सुधार वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन के उस दौर में आए, जब अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ 'चाइना-प्लस-वन' रणनीति के तहत भारत को विकल्प के रूप में देख रही थीं।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी गति बरकरार

पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न वैश्विक बाज़ार की अनिश्चितताओं के बावजूद, मंत्रालय के अनुसार मज़बूत मैन्युफैक्चरिंग इंटीग्रेशन और उन्नत डिजिटल क्षमताओं के बल पर चालू वित्त वर्ष में भी निर्यात की रफ़्तार बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार पर अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों का दबाव बढ़ रहा है।

आगे की राह

आँकड़ों के अनुसार, भारत के निर्यात की संरचना में यह बदलाव दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेवा निर्यात में GCC की भूमिका और इलेक्ट्रॉनिक्स में घरेलू विनिर्माण की मज़बूती आने वाले वर्षों में $1 ट्रिलियन निर्यात लक्ष्य की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह वृद्धि टिकाऊ है। सेवा निर्यात में IT और GCC की बढ़ती निर्भरता एक संरचनात्मक जोखिम भी है — वैश्विक मंदी या अमेरिकी वीज़ा नीतियों में बदलाव इस वृद्धि को तेज़ी से प्रभावित कर सकते हैं। वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़त उत्साहजनक है, पर $1 ट्रिलियन के लक्ष्य के लिए मैन्युफैक्चरिंग को और गहरी जड़ें जमानी होंगी। 47 प्रक्रियाओं के सरलीकरण जैसे सुधार दिशा सही है, लेकिन जब तक लॉजिस्टिक्स लागत और बंदरगाह दक्षता में मूलभूत सुधार नहीं होते, प्रतिस्पर्धात्मकता की असली बाधाएँ बनी रहेंगी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का निर्यात 12 वर्षों में कितना बढ़ा?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 के 468 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 863 अरब डॉलर हो गया — यानी 85 प्रतिशत की वृद्धि। इस दौरान वार्षिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही।
भारत के निर्यात में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी कितनी है?
वित्त वर्ष 2025-26 में सेवा निर्यात की हिस्सेदारी कुल निर्यात में 48.8 प्रतिशत हो गई है, जो 2014-15 में 33.8 प्रतिशत थी। सेवा निर्यात 158.1 अरब डॉलर से बढ़कर 421.3 अरब डॉलर पर पहुँचा, जिसमें सॉफ्टवेयर सेवाओं की 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है।
भारत के वस्तु निर्यात में कौन-से क्षेत्र सबसे तेज़ी से बढ़े?
मंत्रालय के अनुसार, इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स के निर्यात में सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। वस्तु निर्यात कुल मिलाकर 310 अरब डॉलर से बढ़कर 442 अरब डॉलर पर पहुँचा, जो उच्च-मूल्य उत्पादों की ओर भारत के निर्यात के स्थानांतरण को दर्शाता है।
सेवा निर्यात में इतनी तेज़ वृद्धि के क्या कारण हैं?
मंत्रालय ने इसके तीन प्रमुख कारण बताए हैं — देश के आईटी क्षेत्र का विस्तार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की बढ़ती संख्या और कोविड महामारी के बाद डिजिटल सेवाओं की वैश्विक माँग में उछाल। सॉफ्टवेयर सेवाएँ और प्रोफेशनल कंसल्टिंग इस वृद्धि के मुख्य आधार रहे हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यात बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए?
मंत्रालय ने 47 व्यापार प्रक्रियाओं का सरलीकरण, स्वचालित विदेश व्यापार नीति (FTP) प्रक्रियाएँ, ऑटो-वैलिडेटेड आयातक-निर्यातक कोड (IEC) और एक निर्यात संवर्धन मिशन शुरू किया है। इन सुधारों का उद्देश्य व्यापार को सुगम बनाना और नए निर्यातकों की बाज़ार तक पहुँच आसान करना है।
राष्ट्र प्रेस
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