26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जुलाई 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 18% उछला, $12.24 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जुलाई 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 18% उछला, $12.24 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

सारांश

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने जुलाई 2026 में 18% की छलांग लगाई और $12.24 अरब डॉलर का आंकड़ा छुआ। अप्रैल–जुलाई में $46.38 अरब डॉलर के साथ यह क्षेत्र कुल वस्तु निर्यात का 26.7% बन चुका है — और अमेरिका व चीन दोनों बाज़ारों में मांग तेज है।

मुख्य बातें

जुलाई 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 18 प्रतिशत बढ़कर $12.24 अरब डॉलर पर पहुंचा, जो जुलाई 2025 के $10.40 अरब डॉलर से अधिक है।
अप्रैल–जुलाई 2026-27 में संचयी इंजीनियरिंग निर्यात $46.38 अरब डॉलर रहा — पिछले वर्ष की तुलना में 18.21 प्रतिशत अधिक।
कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग की हिस्सेदारी जुलाई में 27.7 प्रतिशत और अप्रैल–जुलाई में 26.7 प्रतिशत रही।
अमेरिका को निर्यात जुलाई में 20 प्रतिशत बढ़कर $2.18 अरब डॉलर ; चीन को 32 प्रतिशत उछाल के साथ $349 मिलियन डॉलर ।
34 में से 27 उत्पाद समूहों में सालाना वृद्धि; सऊदी अरब को निर्यात में गिरावट, होर्मुज लॉजिस्टिक संकट का असर।

भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने जुलाई 2026 में जोरदार छलांग लगाई — ईईपीसी इंडिया द्वारा 26 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, मासिक निर्यात 18 प्रतिशत बढ़कर $12.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो जुलाई 2025 के $10.40 अरब डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई जब वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया के प्रमुख व्यापारिक मार्गों में गंभीर व्यवधान बने हुए थे।

कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग की बढ़ती हिस्सेदारी

जुलाई 2026 में देश के कुल माल निर्यात में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि इंजीनियरिंग क्षेत्र ने 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ दिया। सरकारी त्वरित अनुमान के अनुसार, जुलाई 2026 में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी कुल वस्तु निर्यात में 27.7 प्रतिशत रही — जो इस क्षेत्र की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करती है।

गौरतलब है कि यह वृद्धि किसी एक महीने तक सीमित नहीं है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों — अप्रैल से जुलाई — में प्रत्येक माह इंजीनियरिंग निर्यात $10 अरब डॉलर से ऊपर बना रहा।

अप्रैल–जुलाई: चार महीनों में 18% से अधिक की छलांग

अप्रैल से जुलाई 2026-27 के दौरान कुल इंजीनियरिंग निर्यात $46.38 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह $39.24 अरब डॉलर था। इस प्रकार चार महीनों में 18.21 प्रतिशत की संचित वृद्धि दर्ज हुई। इस अवधि में कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी 26.7 प्रतिशत रही।

प्रमुख बाज़ार: अमेरिका शीर्ष पर, चीन में मांग उछली

भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है। जुलाई 2026 में अमेरिका को निर्यात 20 प्रतिशत बढ़कर $2.18 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल–जुलाई की संचयी अवधि में अमेरिका को निर्यात $7.78 अरब डॉलर रहा — पिछले वर्ष की तुलना में 11.8 प्रतिशत अधिक।

चीन में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय उछाल देखा गया — जुलाई में चीन को निर्यात 32 प्रतिशत बढ़कर $349 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया। इसके अतिरिक्त जर्मनी, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे प्रमुख बाज़ारों में भी अप्रैल–जुलाई अवधि के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज हुई।

भू-राजनीतिक चुनौतियों का असर: सऊदी अरब में गिरावट

हालांकि समग्र तस्वीर उत्साहजनक है, कुछ बाज़ारों में चुनौतियाँ भी सामने आईं। सऊदी अरब को इंजीनियरिंग निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। ईईपीसी इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न लॉजिस्टिक संकट ने व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। क्षेत्रीय संघर्षों के कारण सऊदी अरब में कई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी हुई, जिससे इंजीनियरिंग उत्पादों की स्थानीय मांग पर असर पड़ा।

उत्पाद विविधता: 34 में से 27 समूहों में वृद्धि

ईईपीसी इंडिया के अनुसार, इस सुधार का आधार काफी व्यापक रहा है — 34 इंजीनियरिंग उत्पाद समूहों में से 27 समूहों ने जुलाई में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की। हालांकि लौह एवं इस्पात उत्पाद, सीसा और उससे जुड़े उत्पाद, मशीन टूल्स, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, क्रेन, लिफ्ट और विन्च तथा कार्यालय उपकरण सहित सात उत्पाद समूहों के निर्यात में गिरावट रही।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में लॉजिस्टिक स्थिरता और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति इस रफ्तार को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह रफ्तार टिकाऊ है — खासकर तब जब होर्मुज जलडमरूमध्य में लॉजिस्टिक संकट और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अभी थमे नहीं हैं। सऊदी अरब जैसे बड़े बाज़ार में गिरावट यह याद दिलाती है कि निर्यात वृद्धि का यह ढांचा अभी भी कुछ कमज़ोर कड़ियों पर टिका है। अमेरिका और चीन में एक साथ मांग बढ़ना दुर्लभ और सकारात्मक संकेत है, पर लौह-इस्पात और मशीन टूल्स जैसे कोर क्षेत्रों में गिरावट बताती है कि विविधीकरण की यात्रा अभी अधूरी है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुलाई 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात कितना रहा?
ईईपीसी इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 18 प्रतिशत बढ़कर $12.24 अरब डॉलर पर पहुंचा, जो जुलाई 2025 के $10.40 अरब डॉलर से अधिक है। यह वृद्धि देश के कुल वस्तु निर्यात की 17 प्रतिशत वृद्धि दर से भी अधिक रही।
अप्रैल–जुलाई 2026-27 में इंजीनियरिंग निर्यात का कुल आंकड़ा क्या रहा?
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल–जुलाई) में कुल इंजीनियरिंग निर्यात $46.38 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के $39.24 अरब डॉलर की तुलना में 18.21 प्रतिशत अधिक है। इस पूरी अवधि में प्रत्येक माह निर्यात $10 अरब डॉलर से ऊपर बना रहा।
भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का सबसे बड़ा बाज़ार कौन सा है?
अमेरिका भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार बना हुआ है। जुलाई 2026 में अमेरिका को निर्यात 20 प्रतिशत बढ़कर $2.18 अरब डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल–जुलाई की संचयी अवधि में यह $7.78 अरब डॉलर रहा।
सऊदी अरब को इंजीनियरिंग निर्यात में गिरावट क्यों आई?
ईईपीसी इंडिया के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न लॉजिस्टिक संकट और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण सऊदी अरब में कई परियोजनाओं की गति धीमी हुई। इससे इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग प्रभावित हुई और निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।
किन उत्पाद समूहों में निर्यात में कमी आई?
जुलाई 2026 में 34 इंजीनियरिंग उत्पाद समूहों में से 7 समूहों के निर्यात में गिरावट रही — इनमें लौह एवं इस्पात उत्पाद, सीसा और उससे जुड़े उत्पाद, मशीन टूल्स, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, क्रेन, लिफ्ट और विन्च, तथा कार्यालय उपकरण शामिल हैं। शेष 27 समूहों ने सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले