क्या नवंबर में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने 11 अरब डॉलर का रिकॉर्ड आंकड़ा छुआ?

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क्या नवंबर में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने 11 अरब डॉलर का रिकॉर्ड आंकड़ा छुआ?

सारांश

नवंबर में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने एक नया मील का पत्थर पार किया है, जो 11 अरब डॉलर को छू गया है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार में तेजी का प्रमुख योगदान है। जानें इस वृद्धि के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।

Key Takeaways

  • नवंबर में इंजीनियरिंग निर्यात 11 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
  • यूरोपीय संघ को 39% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • इंजीनियरिंग निर्यात में 23.76% की बढ़ोतरी हुई।
  • निर्यातकों ने तेजी से वापसी की है।
  • भविष्य में मुक्त व्यापार समझौते के संभावित लाभ।

नई दिल्ली, 25 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। नवंबर में भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात इस वित्त वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। उद्योग से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में इंजीनियरिंग निर्यात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया। इसकी मुख्य वजह पिछले वर्ष की तुलना का प्रभाव और अमेरिका तथा यूरोपीय संघ (ईयू) को भेजे गए सामान में तेज वृद्धि रही।

भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका और यूरोपीय संघ को इंजीनियरिंग सामान की सप्लाई नवंबर में काफी बढ़ी। यूरोपीय संघ को निर्यात में 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इससे पहले के दो महीनों में इसमें गिरावट देखी गई थी।

ईईपीसी इंडिया के अनुसार, इस वर्ष नवंबर में इंजीनियरिंग निर्यात में 23.76 प्रतिशत की वृद्धि हुई। नवंबर 2024 में यह आंकड़ा 8.90 अरब डॉलर था, जो इस साल बढ़कर 11 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया।

ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में पहली बार इंजीनियरिंग निर्यात 11 अरब डॉलर के पार पहुंचा है। अक्टूबर 2025 में 17 प्रतिशत की गिरावट के बाद निर्यातकों ने तेजी से वापसी की है, जो उनकी मेहनत को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि इंजीनियरिंग निर्यात में यह वृद्धि वैश्विक व्यापार की स्थिति में सुधार को भी दर्शाती है। पंकज चड्ढा ने केंद्र सरकार द्वारा एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (ईपीएम) को मंजूरी देने की सराहना की।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में ओमान और न्यूजीलैंड के साथ हुए व्यापार समझौते इंजीनियरिंग निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होंगे। इसके साथ ही, भविष्य में यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) भी निर्यात के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। उन्होंने निर्यातकों को सावधान रहने की सलाह दी, क्योंकि वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव बढ़ रहा है।

नवंबर 2025 में कुल 34 उत्पाद श्रेणियों में से 32 श्रेणियों में निर्यात बढ़ा। मोटर वाहन/कारें, जहाज और नावें, कृषि और डेयरी के लिए मशीनरी, बिजली से चलने वाले उपकरण, तांबा और तांबे से बने उत्पादों का निर्यात विशेष रूप से अच्छा रहा।

नवंबर में अमेरिका को इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 1.58 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी महीने में 1.42 अरब डॉलर था। वहीं, यूरोपीय संघ को निर्यात बढ़कर 2.02 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल 1.46 अरब डॉलर था।

क्षेत्रों के अनुसार, उत्तर अमेरिका और यूरोपीय संघ भारत के इंजीनियरिंग निर्यात के सबसे बड़े बाजार बने रहे। नवंबर में सभी क्षेत्रों में निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।

पूरे वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों यानी अप्रैल से नवंबर 2025-26 के दौरान इंजीनियरिंग निर्यात 4.25 प्रतिशत बढ़कर 79.74 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 76.49 अरब डॉलर था।

Point of View

बल्कि यह व्यापार की स्थिति में सुधार और निर्यातकों की मेहनत का परिणाम है। हमें इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रखने की आवश्यकता है ताकि हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में वृद्धि के मुख्य कारण क्या हैं?
इस वृद्धि के मुख्य कारण पिछले साल की तुलना में सुधार और अमेरिका व यूरोपीय संघ में बढ़ी हुई मांग हैं।
कौन से उत्पाद श्रेणियाँ सबसे अधिक निर्यात की गईं?
मोटर वाहन, जहाज, कृषि मशीनरी और बिजली से चलने वाले उपकरण प्रमुख उत्पाद श्रेणियाँ रही हैं।
क्या भविष्य में निर्यात में और वृद्धि की संभावना है?
हां, हालिया व्यापार समझौतों और संभावित मुक्त व्यापार समझौतों के कारण निर्यात में और वृद्धि की संभावना है।
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