13 जुलाई 2026
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भारत का इंजीनियरिंग निर्यात अप्रैल 2027 में 8.78% बढ़कर 10.35 अरब डॉलर, तांबे में 80% उछाल

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भारत का इंजीनियरिंग निर्यात अप्रैल 2027 में 8.78% बढ़कर 10.35 अरब डॉलर, तांबे में 80% उछाल

सारांश

पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने अप्रैल में 8.78% की वृद्धि दर्ज की। तांबे में 80% और एल्युमीनियम में 38% की उछाल ने रफ़्तार दी, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका मज़बूत बाज़ार बने रहे।

मुख्य बातें

इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात अप्रैल में सालाना आधार पर 8.78% बढ़कर 10.35 अरब डॉलर हुआ।
तांबा और संबंधित उत्पादों में 80% और एल्युमीनियम में 38% की वृद्धि दर्ज की गई।
34 पैनलों में से 28 ने अप्रैल में वार्षिक निर्यात वृद्धि दर्ज की।
चीन को निर्यात 81.7% उछलकर 30.1 करोड़ डॉलर हुआ; यूएई, सिंगापुर, सऊदी अरब में गिरावट।
कुल निर्यात में इंजीनियरिंग की हिस्सेदारी 24.9% से घटकर 23.8% रही।
भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार समझौते से WANA क्षेत्र में आंशिक राहत।

भारत के इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात वित्त वर्ष 2026-27 के पहले महीने अप्रैल में सालाना आधार पर 8.78 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आँकड़ा 9.52 अरब डॉलर था। उद्योग संगठन ईईपीसी इंडिया के आँकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण लॉजिस्टिक्स और उत्पादन चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

मुख्य उत्पाद सेगमेंट का प्रदर्शन

अप्रैल में वृद्धि की सबसे बड़ी वाहक तांबा और संबंधित उत्पाद रहे, जिनके निर्यात में 80 प्रतिशत की असाधारण बढ़त दर्ज की गई। एल्युमीनियम और संबंधित उत्पादों में 38 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि रही। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात में 36 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त आई, जबकि विद्युत मशीनरी और उपकरणों के निर्यात में 9.5 प्रतिशत और ऑटो कंपोनेंट्स व पार्ट्स में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

कुल 34 इंजीनियरिंग गुड्स पैनलों में से 28 ने अप्रैल के दौरान वार्षिक आधार पर निर्यात वृद्धि दर्ज की — यह व्यापक आधार वाली रिकवरी का संकेत है।

प्रमुख बाज़ार और क्षेत्रीय रुझान

अप्रैल में अमेरिका (यूएस), यूके और जर्मनी भारतीय इंजीनियरिंग गुड्स के सबसे बड़े बाज़ार रहे। क्षेत्रीय आधार पर उत्तरी अमेरिका में 7.1 प्रतिशत और यूरोपीय संघ (EU) में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

उल्लेखनीय रूप से, चीन को इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात सालाना आधार पर 81.7 प्रतिशत उछलकर 30.1 करोड़ डॉलर (301.08 मिलियन डॉलर) हो गया। हालाँकि, यूएई, सिंगापुर और सऊदी अरब को निर्यात में गिरावट आई। पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (WANA) तथा आसियान बाज़ारों में कम माँग और ऑटोमोबाइल शिपमेंट में कमज़ोरी के चलते निर्यात दबाव में रहा।

ओमान समझौते से नई उम्मीद

ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के बावजूद अधिकांश सेक्टर और क्षेत्रों में निर्यात वृद्धि दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार समझौते के चलते ओमान को निर्यात में बढ़त हुई है, जो WANA क्षेत्र की समग्र कमज़ोरी के बीच एक सकारात्मक संकेत है।

चड्ढा ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ कई मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, लेकिन इन समझौतों का पूरा लाभ उठाने के लिए उद्योग और नीति निर्माताओं को बाज़ार पहुँच संबंधी बाधाओं को दूर करना होगा।

कुल निर्यात में हिस्सेदारी

सरकारी अनुमानों के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं की हिस्सेदारी 23.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 24.9 प्रतिशत से कुछ कम है। यह मामूली गिरावट दर्शाती है कि समग्र निर्यात टोकरी में विविधता आ रही है, हालाँकि इंजीनियरिंग क्षेत्र अभी भी एक-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी के करीब बना हुआ है।

आने वाले महीनों में वैश्विक व्यापार नीति की दिशा और पश्चिम एशिया में स्थिरता इंजीनियरिंग निर्यात की रफ़्तार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कुल निर्यात में इंजीनियरिंग की हिस्सेदारी का 24.9% से 23.8% पर आना एक सूक्ष्म चेतावनी है। तांबे और एल्युमीनियम में असाधारण वृद्धि मुख्यतः वैश्विक कमोडिटी कीमतों से प्रेरित हो सकती है, न कि निर्यात क्षमता में संरचनात्मक सुधार से — इस अंतर को समझना ज़रूरी है। WANA और आसियान बाज़ारों में कमज़ोरी यह भी बताती है कि भारत के FTA नेटवर्क का लाभ अभी तक पूरी तरह ज़मीन पर नहीं उतरा है। जब तक बाज़ार पहुँच की बाधाएँ दूर नहीं होतीं, ये समझौते कागज़ी उपलब्धि से अधिक नहीं बन पाएँगे।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अप्रैल 2027 में भारत का इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात कितना रहा?
ईईपीसी इंडिया के आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2027 में भारत का इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात सालाना आधार पर 8.78 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 9.52 अरब डॉलर था।
किन उत्पादों ने इंजीनियरिंग निर्यात में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की?
तांबा और संबंधित उत्पादों में 80 प्रतिशत और एल्युमीनियम व संबंधित उत्पादों में 38 प्रतिशत की वृद्धि सबसे उल्लेखनीय रही। दोपहिया और तिपहिया वाहनों में 36 प्रतिशत, विद्युत मशीनरी में 9.5 प्रतिशत और ऑटो कंपोनेंट्स में 7.2 प्रतिशत की बढ़त भी दर्ज हुई।
पश्चिम एशिया के तनाव का इंजीनियरिंग निर्यात पर क्या असर पड़ा?
पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्र को निर्यात पर दबाव बना रहा और यूएई, सऊदी अरब को निर्यात में गिरावट आई। हालाँकि, भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार समझौते के चलते ओमान को निर्यात में वृद्धि हुई, जिसने आंशिक राहत दी।
अप्रैल में चीन को इंजीनियरिंग निर्यात कितना बढ़ा?
अप्रैल में चीन को इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात सालाना आधार पर 81.7 प्रतिशत उछलकर 301.08 मिलियन डॉलर (लगभग 30.1 करोड़ डॉलर) हो गया, जो इस अवधि की सबसे बड़ी द्विपक्षीय वृद्धि रही।
कुल निर्यात में इंजीनियरिंग गुड्स की हिस्सेदारी क्या रही?
सरकारी अनुमानों के अनुसार, अप्रैल 2026 में कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं की हिस्सेदारी 23.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 24.9 प्रतिशत से कुछ कम है।
राष्ट्र प्रेस
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