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भारत का इंजीनियरिंग निर्यात मई 2026 में पहली बार $12.31 अरब के पार, सालाना 24.48% की उछाल

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भारत का इंजीनियरिंग निर्यात मई 2026 में पहली बार $12.31 अरब के पार, सालाना 24.48% की उछाल

सारांश

भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने मई 2026 में पहली बार $12.31 अरब का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ — पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव के बीच 24.48% की उछाल। EEPC इंडिया के अनुसार, वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्गठन से भारत को 'चीन+1' का सीधा लाभ मिल रहा है और 2030 तक $250 अरब का लक्ष्य अब अधिक यथार्थवादी दिखने लगा है।

मुख्य बातें

भारत का इंजीनियरिंग निर्यात मई 2026 में पहली बार $12.31 अरब पर पहुँचा — मई 2025 के $9.89 अरब से 24.48% अधिक।
इंजीनियरिंग क्षेत्र की भारत के कुल माल निर्यात में हिस्सेदारी 27.2 प्रतिशत रही।
34 में से 28 निर्यात श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि; मुख्य चालक — इलेक्ट्रिक मशीनरी, जहाज, मोटर वाहन और लोहा-इस्पात।
उत्तर अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार ( 19.3% ), इसके बाद WANA ( 16.7% ) और EU ( 15.2% )।
भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद WANA क्षेत्र को निर्यात में मई में ~44% की वृद्धि।
EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने 2030 तक $250 अरब के निर्यात लक्ष्य का आह्वान किया।

भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात मई 2026 में ऐतिहासिक रूप से पहली बार 12 अरब डॉलर की सीमा लाँघ गया — सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह आंकड़ा 12.31 अरब डॉलर रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में व्यवधान के बीच भी इंजीनियरिंग निर्यात में साल-दर-साल 24.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जो मई 2025 के 9.89 अरब डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय है। यह जानकारी इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया ने 26 जून 2026 को जारी की।

मुख्य आंकड़े और क्षेत्रवार प्रदर्शन

मई 2026 में इंजीनियरिंग क्षेत्र ने भारत के कुल माल निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में 27.2 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। निर्यात की 34 में से 28 श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि देखी गई — यह व्यापक आधार पर हुई बढ़त का संकेत है।

इस उछाल के पीछे मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरण, जहाज एवं तैरते ढाँचे, मोटर वाहन, तथा लोहा-इस्पात उत्पाद रहे। इन उत्पाद श्रेणियों की वैश्विक माँग में आई तेज़ी ने भारतीय निर्यातकों को सीधा लाभ पहुँचाया।

प्रमुख बाज़ार: अमेरिका सबसे आगे

क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, मई में उत्तर अमेरिका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों का सबसे बड़ा गंतव्य रहा, जहाँ कुल निर्यात का 19.3 प्रतिशत भेजा गया। इसके बाद पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका (WANA) क्षेत्र की हिस्सेदारी 16.7 प्रतिशत और यूरोपीय संघ (EU) की 15.2 प्रतिशत रही।

उल्लेखनीय यह है कि भू-राजनीतिक संकट के बावजूद WANA क्षेत्र को होने वाले निर्यात में मई में लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अप्रैल-मई की संयुक्त अवधि में इस क्षेत्र को निर्यात में 14 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

उद्योग की प्रतिक्रिया और चिंताएँ

EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि वैश्विक कंपनियाँ अब अपनी सप्लाई चेन को पुनर्गठित कर रही हैं ताकि किसी एक देश — विशेषकर चीन — पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके। उन्होंने कहा, 'इससे भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।'

चड्ढा ने यह भी कहा कि इस गति को बनाए रखने के लिए वाणिज्य मंत्रालय से त्वरित नीतिगत राहत, सस्ता व्यापार वित्त और बेहतर जोखिम सुरक्षा का समर्थन अनिवार्य होगा। उनके अनुसार, सरकार के उचित मार्गदर्शन से भारत 2030 तक 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

व्यापक संदर्भ: चीन+1 रणनीति का लाभ

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार में पुनर्संरेखण तेज़ हो रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और पश्चिमी कंपनियों की 'चीन+1' सोर्सिंग नीति ने भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए एक संरचनात्मक अवसर उत्पन्न किया है। यह पहली बार नहीं है जब भारत ने इस अवसर का लाभ उठाने की कोशिश की है, लेकिन 12 अरब डॉलर का आंकड़ा इस बार की गति को पिछले प्रयासों से अलग करता है।

आगे की राह

EEPC इंडिया का 2030 तक 250 अरब डॉलर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है — इसके लिए मौजूदा वार्षिक दर से लगातार और तेज़ वृद्धि आवश्यक होगी। नीतिगत राहत, बंदरगाह अवसंरचना और व्यापार वित्त की उपलब्धता इस लक्ष्य की कुंजी मानी जा रही है। उद्योग की नज़रें अब वाणिज्य मंत्रालय की अगली नीतिगत घोषणाओं पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह एकमुश्त उछाल है या संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत। 'चीन+1' का लाभ तभी टिकाऊ होगा जब भारत बंदरगाह अवसंरचना, व्यापार वित्त और नीतिगत स्थिरता में ठोस सुधार करे — जो अभी तक अधूरे वादे बने हुए हैं। EEPC का 2030 तक $250 अरब का लक्ष्य मौजूदा वार्षिक दर से लगभग चार गुना छलाँग माँगता है, और वाणिज्य मंत्रालय की नीतिगत प्रतिक्रिया की गति उस महत्वाकांक्षा से अभी भी पीछे है। एक महीने का रिकॉर्ड उत्साहजनक है — पर दिशा तय करने के लिए तिमाही और वार्षिक रुझान देखने होंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मई 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात कितना रहा?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात $12.31 अरब रहा, जो मई 2025 के $9.89 अरब की तुलना में 24.48 प्रतिशत अधिक है। यह पहली बार है जब मासिक इंजीनियरिंग निर्यात $12 अरब की सीमा पार कर गया।
EEPC इंडिया क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया वाणिज्य मंत्रालय के तहत एक सरकार-समर्थित निकाय है जो भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देता है। यह नियमित रूप से क्षेत्रवार निर्यात आंकड़े जारी करता है और नीतिगत सिफारिशें करता है।
भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में किन उत्पादों ने सबसे अधिक योगदान दिया?
मई 2026 में इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरण, जहाज एवं तैरते ढाँचे, मोटर वाहन तथा लोहा-इस्पात उत्पाद मुख्य चालक रहे। 34 में से 28 निर्यात श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज हुई।
भारत का 2030 तक इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य क्या है?
EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा के अनुसार, सरकार के उचित नीतिगत समर्थन से भारत 2030 तक $250 अरब के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है। इसके लिए त्वरित नीतिगत राहत, सस्ता व्यापार वित्त और बेहतर जोखिम सुरक्षा आवश्यक बताई गई है।
पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद भारत का निर्यात कैसे बढ़ा?
EEPC के आंकड़ों के अनुसार, भू-राजनीतिक संकट के बावजूद WANA (पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका) क्षेत्र को मई में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्गठन और 'चीन+1' रणनीति ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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