भारत का ईवी बाज़ार 2034 तक $191 अरब का होगा, सालाना 55% CAGR की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाज़ार अभूतपूर्व रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, देश में ईवी बिक्री 2016 में मात्र 50,000 यूनिट से उछलकर 2025 में 23 लाख यूनिट पर पहुँच गई — यानी नौ वर्षों में करीब 46 गुना की वृद्धि। अनुमानों के अनुसार 2034 तक भारत का ईवी बाज़ार $191.04 अरब का हो जाएगा, जिसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 54.94 प्रतिशत रहने की संभावना है।
वैश्विक औसत से कहीं आगे भारत की रफ़्तार
सरकारी बयान के अनुसार, भारत की ईवी वृद्धि वैश्विक रुझानों को भी पीछे छोड़ रही है। दुनिया भर में ईवी बिक्री 2016 में 9.18 लाख यूनिट से बढ़कर 2024 में 1.878 करोड़ यूनिट हुई — लगभग 20 गुना की वृद्धि। इसकी तुलना में भारत की 46 गुना की वृद्धि दर उल्लेखनीय रूप से अधिक है।
ईवी पैठ के मामले में भी भारत ने तेज़ी से अंतर पाटा है। 2020 में भारत की ईवी पैठ वैश्विक औसत के लगभग पाँचवें हिस्से के बराबर थी, जो 2024 तक बढ़कर वैश्विक औसत के दो-पाँचवें से अधिक हो गई।
दोपहिया और तिपहिया वाहनों का सबसे बड़ा योगदान
2025 में ईवी बिक्री में सबसे अधिक हिस्सेदारी 12.8 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 8 लाख इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की रही। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की शहरी आबादी के बड़े वर्ग के लिए दोपहिया और तिपहिया वाहन दैनिक परिवहन की रीढ़ हैं — जो ईवी अपनाने की इस लहर को टिकाऊ बनाता है।
ईवी बैटरी बाज़ार भी समानांतर विस्तार की राह पर है। आँकड़ों के अनुसार यह बाज़ार 2025 में $2.71 अरब से बढ़कर 2034 तक $15.90 अरब तक पहुँच सकता है, जिसकी CAGR 21.70 प्रतिशत अनुमानित है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात में उछाल
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के अनुसार, जुलाई 2026 तक देश में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं, जिनमें से 16,561 पर फास्ट चार्जिंग की सुविधा है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक यह संख्या 13.2 लाख तक ले जाना है, ताकि ईवी इकोसिस्टम को मज़बूत आधार मिले।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी भारतीय ईवी अपनी पहचान बना रहे हैं। ईवी निर्यात 2020 में $12 लाख से बढ़कर 2024 में $8.4 करोड़ तक पहुँच गया। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में नेपाल, इंडोनेशिया और जापान शामिल हैं।
निवेश और सरकारी नीतियाँ
ईवी क्षेत्र में निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र ने करीब $1.4 अरब का निवेश आकर्षित किया, जो 2024 की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत अधिक है। इसमें से $1.2 अरब ईवी निर्माताओं को प्राप्त हुआ। नई दिल्ली ईवी निवेश के लिए देश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है।
सरकार 2015 से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए फेम योजना, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) PLI योजना और बैटरी लोकलाइज़ेशन जैसी नीतिगत पहलें चला रही है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक कुल वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत करना है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन की गति तेज़ हो रही है और भारत इस दौड़ में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरने की स्थिति में है।