6 अगस्त 2026
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भारत का ईवी बाज़ार 2034 तक $191 अरब का होगा, सालाना 55% CAGR से बढ़ेगी बिक्री

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भारत का ईवी बाज़ार 2034 तक $191 अरब का होगा, सालाना 55% CAGR से बढ़ेगी बिक्री

सारांश

2016 में 50,000 यूनिट से 2025 में 23 लाख यूनिट — भारत की ईवी यात्रा महज़ एक दशक में 46 गुना की छलाँग लगा चुकी है। 2034 तक $191 अरब के बाज़ार और 55% CAGR के अनुमान के साथ, यह क्षेत्र अब भारत की हरित अर्थव्यवस्था का सबसे तेज़ इंजन बनता दिख रहा है।

मुख्य बातें

भारत में ईवी बिक्री 2016 में 50,000 यूनिट से बढ़कर 2025 में 23 लाख यूनिट — लगभग 46 गुना वृद्धि।
भारत का ईवी बाज़ार 2034 तक $191.04 अरब का होने का अनुमान, CAGR 54.94% ।
ईवी बैटरी बाज़ार 2025 में $2.71 अरब से बढ़कर 2034 तक $15.90 अरब होने की संभावना।
2025 में 12.8 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 8 लाख इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन बिके।
ईवी निर्यात 2020 में $12 लाख से बढ़कर 2024 में $8.4 करोड़ ; नेपाल, इंडोनेशिया, जापान प्रमुख गंतव्य।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 30% ईवी हिस्सेदारी और 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाज़ार अभूतपूर्व रफ़्तार से विस्तार कर रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, देश में ईवी बिक्री 2016 में मात्र 50,000 यूनिट से उछलकर 2025 में 23 लाख यूनिट तक पहुँच गई — यानी लगभग 46 गुना की असाधारण वृद्धि। अनुमान है कि 2034 तक भारत का ईवी बाज़ार $191.04 अरब का हो जाएगा और इस अवधि में चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 54.94 प्रतिशत रहेगी।

वैश्विक रुझानों से भी तेज़ है भारत की रफ़्तार

सरकारी बयान के मुताबिक़, भारत की ईवी वृद्धि वैश्विक औसत को पीछे छोड़ रही है। दुनिया भर में ईवी बिक्री 2016 में 9.18 लाख यूनिट से बढ़कर 2024 में 1.878 करोड़ यूनिट हुई — लगभग 20 गुना की वृद्धि। इसके मुकाबले भारत में यही वृद्धि 46 गुना से अधिक रही, जो देश के ईवी बाज़ार की असाधारण गति को रेखांकित करती है।

ईवी पैठ के मामले में भी भारत ने तेज़ी दिखाई है। 2020 में जहाँ भारत की ईवी पैठ वैश्विक औसत के लगभग पाँचवें हिस्से के बराबर थी, वहीं 2024 तक यह बढ़कर वैश्विक औसत के दो-पाँचवें से अधिक हो गई।

दोपहिया और तिपहिया वाहनों की अगुवाई

2025 में ईवी वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान 12.8 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 8 लाख इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की बिक्री का रहा। यह आँकड़ा दर्शाता है कि भारत में ईवी क्रांति मुख्यतः निम्न-मध्यम वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप, किफ़ायती और छोटे वाहनों के ज़रिए आगे बढ़ रही है।

बैटरी बाज़ार भी इस विस्तार का हिस्सा है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत का ईवी बैटरी बाज़ार 2025 में $2.71 अरब से बढ़कर 2034 तक $15.90 अरब तक पहुँचने का अनुमान है, जिसकी CAGR 21.70 प्रतिशत रहने की संभावना है।

निर्यात और निवेश में उछाल

भारतीय ईवी अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी दस्तक दे रहे हैं। ईवी निर्यात 2020 में $12 लाख से बढ़कर 2024 में $8.4 करोड़ तक पहुँच गया। नेपाल, इंडोनेशिया और जापान भारत के प्रमुख ईवी निर्यात गंतव्य हैं।

निवेश के मोर्चे पर, वित्त वर्ष 2024-25 में ईवी क्षेत्र ने लगभग $1.4 अरब का निवेश आकर्षित किया, जो 2024 की तुलना में करीब 27 प्रतिशत अधिक है। इसमें से $1.2 अरब अकेले ईवी निर्माताओं को मिला। नई दिल्ली इस निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश में बिकने वाले कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करना है। इसके लिए 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के अनुसार, जुलाई 2026 तक देश में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं, जिनमें से 16,561 पर फास्ट चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है।

नीतिगत मोर्चे पर सरकार 2015 से FAME योजना, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) के लिए PLI योजना और बैटरी लोकलाइज़ेशन जैसी पहलों के ज़रिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहन दे रही है। आने वाले वर्षों में यह नीतिगत ढाँचा भारत को वैश्विक ईवी मानचित्र पर और मज़बूती से स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह रफ़्तार टिकाऊ है — विशेषकर जब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का लक्ष्य 13.2 लाख स्टेशनों का है और अभी तक सिर्फ 52,718 ही स्थापित हो पाए हैं। दोपहिया और तिपहिया वाहनों की अगुवाई बताती है कि ईवी क्रांति अभी प्रीमियम कार सेगमेंट में नहीं, बल्कि निम्न-मध्यम वर्ग में हो रही है — जो नीति-निर्माताओं के लिए एक अलग तरह की चुनौती है। FAME और PLI जैसी योजनाओं ने माँग तो जगाई, पर घरेलू बैटरी उत्पादन अभी भी आयात पर निर्भर है, जो दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में ईवी बिक्री 2034 तक कितनी बढ़ेगी?
सरकारी अनुमानों के अनुसार, भारत का ईवी बाज़ार 2034 तक $191.04 अरब का हो जाएगा और इस दौरान CAGR 54.94 प्रतिशत रहेगी। 2025 में देश में 23 लाख ईवी यूनिट बिक चुकी हैं, जो 2016 की तुलना में 46 गुना अधिक है।
भारत में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की क्या स्थिति है?
BHEL के अनुसार, जुलाई 2026 तक देश में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन हैं, जिनमें से 16,561 पर फास्ट चार्जिंग उपलब्ध है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना है।
भारत सरकार का 2030 तक ईवी के लिए क्या लक्ष्य है?
सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश में बिकने वाले कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करना है। इसके लिए FAME योजना, ACC के लिए PLI योजना और बैटरी लोकलाइज़ेशन जैसी पहलें चलाई जा रही हैं।
भारत के ईवी निर्यात की स्थिति कैसी है?
भारत का ईवी निर्यात 2020 में $12 लाख से बढ़कर 2024 में $8.4 करोड़ तक पहुँच गया है। नेपाल, इंडोनेशिया और जापान भारत के प्रमुख ईवी निर्यात गंतव्य हैं।
भारत में ईवी क्षेत्र में निवेश कितना है?
वित्त वर्ष 2024-25 में ईवी क्षेत्र ने लगभग $1.4 अरब का निवेश आकर्षित किया, जो 2024 की तुलना में करीब 27 प्रतिशत अधिक है। इसमें से $1.2 अरब ईवी निर्माताओं को मिला और नई दिल्ली इस निवेश का प्रमुख केंद्र रही।
राष्ट्र प्रेस
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