1 जुलाई 2026
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पैसेंजर ईवी रजिस्ट्रेशन 90% उछला, Q1 FY2027 में 82,737 यूनिट; टाटा मोटर्स की बिक्री दोगुनी

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पैसेंजर ईवी रजिस्ट्रेशन 90% उछला, Q1 FY2027 में 82,737 यूनिट; टाटा मोटर्स की बिक्री दोगुनी

सारांश

पश्चिम एशिया संकट में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने ईवी को आकर्षक बनाया — और नतीजा सामने है। Q1 FY2027 में पैसेंजर ईवी पंजीकरण 90% उछलकर 82,737 यूनिट पर पहुँचा। टाटा मोटर्स ने 104% और महिंद्रा ने करीब दोगुनी बिक्री दर्ज की, जबकि हुंडई पिछड़ी।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में पैसेंजर ईवी पंजीकरण लगभग 90% बढ़कर 82,737 यूनिट पर पहुँचा, जो पिछले वर्ष 43,710 यूनिट था।
माह-दर-माह वृद्धि: अप्रैल में 24,963 , मई में 27,320 और जून में 30,454 यूनिट पंजीकृत।
टाटा मोटर्स की ईवी बिक्री तिमाही में 112% बढ़कर 34,467 यूनिट ; कुल पैसेंजर वाहन बिक्री 46% बढ़कर 1,82,574 यूनिट ।
महिंद्रा एंड महिंद्रा की ईवी पंजीकरण लगभग दोगुनी होकर 20,112 यूनिट ; हुंडई की ईवी पंजीकरण 2,142 से घटकर 1,386 यूनिट ।
1 जुलाई से टाटा मोटर्स ने पैसेंजर वाहनों में 1.5% और कमर्शियल वाहनों में 2.5% तक मूल्य वृद्धि की; मारुति सुजुकी ने ₹30,000 तक की बढ़ोतरी की।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान पारंपरिक ईंधन की बढ़ती कीमतों और ईवी की स्थिर परिचालन लागत ने माँग को बल दिया।

भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन (ईवी) बाज़ार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। वाहन पोर्टल के पंजीकरण आँकड़ों के अनुसार, इस अवधि में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का कुल पंजीकरण लगभग 90 प्रतिशत बढ़कर 82,737 यूनिट पर पहुँच गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह आँकड़ा 43,710 यूनिट था। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के मुकाबले ईवी की अपेक्षाकृत स्थिर परिचालन लागत ने उपभोक्ताओं को बैटरी चालित वाहनों की ओर आकर्षित किया।

तिमाही में माह-दर-माह वृद्धि

पूरी तिमाही में ईवी माँग की रफ्तार लगातार बढ़ती रही। अप्रैल में 24,963 यूनिट, मई में 27,320 यूनिट और जून में 30,454 यूनिट पंजीकृत हुईं — यानी तीन महीनों में क्रमिक और निरंतर उछाल। यह प्रवृत्ति बताती है कि ईवी माँग महज एकमुश्त उछाल नहीं, बल्कि एक टिकाऊ वृद्धि की ओर इशारा कर रही है।

टाटा मोटर्स और महिंद्रा का शानदार प्रदर्शन

टाटा मोटर्स ने इस तिमाही में 32,283 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन पंजीकृत किए — पिछले वर्ष की समान अवधि के 15,794 यूनिट की तुलना में 104 प्रतिशत की वृद्धि। अकेले जून में कंपनी की ईवी बिक्री 14,800 यूनिट रही, जो पिछले साल जून के 5,228 यूनिट से दोगुने से भी अधिक है। पूरी तिमाही में कंपनी की ईवी बिक्री 112 प्रतिशत बढ़कर 34,467 यूनिट पर पहुँची।

टाटा मोटर्स की कुल पैसेंजर वाहन बिक्री भी 46 प्रतिशत बढ़कर 1,82,574 यूनिट हो गई, जबकि जून में कुल पैसेंजर वाहन बिक्री 63,083 यूनिट रही — पिछले साल जून के 37,237 यूनिट से 69 प्रतिशत अधिक।

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन पंजीकरण लगभग दोगुने होकर 20,112 यूनिट पर पहुँचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 10,144 यूनिट थे।

इसके विपरीत, हुंडई मोटर इंडिया के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन पंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई — 2,142 यूनिट से घटकर 1,386 यूनिट रह गए।

ईवी माँग में उछाल के पीछे क्या है

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं को ईवी की ओर धकेला। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की परिचालन लागत अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही, जिसने खरीदारों के निर्णय को प्रभावित किया। गौरतलब है कि यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब कई वाहन कंपनियों ने उत्पादन लागत, कच्चे माल और परिचालन खर्च बढ़ने का हवाला देते हुए अपने वाहनों की कीमतें बढ़ाई हैं।

वाहन कंपनियों ने बढ़ाए दाम

1 जुलाई 2025 से टाटा मोटर्स ने अपने पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है, जबकि कमर्शियल वाहनों में 2.5 प्रतिशत तक का इजाफा किया गया है।

हुंडई मोटर इंडिया ने अपने वाहनों की कीमतों में ₹12,800 तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। मारुति सुजुकी इंडिया ने विभिन्न मॉडलों में ₹30,000 तक की वृद्धि की है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी एसयूवी और कमर्शियल वाहनों में 2.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है, जबकि विभिन्न मॉडलों में औसत वृद्धि करीब 1.6 प्रतिशत रही।

आँकड़ों के अनुसार, पारंपरिक ईंधन वाहनों की बढ़ती कीमतें और ईवी की स्थिर परिचालन लागत — दोनों मिलकर इलेक्ट्रिक वाहन बाज़ार को और मज़बूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाली तिमाहियों में यह रुझान और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

737 यूनिट का यह आँकड़ा प्रभावशाली ज़रूर है, लेकिन इसे संदर्भ में रखना ज़रूरी है — कुल पैसेंजर वाहन बाज़ार में ईवी की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है, और यह उछाल काफी हद तक पश्चिम एशिया संकट जैसी बाहरी परिस्थितियों से प्रेरित है, न कि केवल नीतिगत या बुनियादी ढाँचागत सुधारों से। हुंडई की गिरावट यह भी बताती है कि बाज़ार में प्रतिस्पर्धा तीखी है और हर खिलाड़ी इस लहर का फायदा नहीं उठा पा रहा। असली परीक्षा यह होगी कि जब ईंधन कीमतें स्थिर हों, तब भी क्या ईवी माँग इसी रफ्तार से बढ़ती रहती है — और इसके लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर व बैटरी लागत में सुधार अनिवार्य है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1 FY2027 में भारत में पैसेंजर ईवी पंजीकरण कितना बढ़ा?
वाहन पोर्टल के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में पैसेंजर ईवी पंजीकरण लगभग 90 प्रतिशत बढ़कर 82,737 यूनिट पर पहुँचा, जबकि पिछले वर्ष यह 43,710 यूनिट था।
टाटा मोटर्स की ईवी बिक्री इस तिमाही में कैसी रही?
टाटा मोटर्स ने Q1 FY2027 में 32,283 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन पंजीकृत किए — पिछले वर्ष की तुलना में 104 प्रतिशत अधिक। पूरी तिमाही में कंपनी की ईवी बिक्री 112 प्रतिशत बढ़कर 34,467 यूनिट रही।
भारत में ईवी की माँग अचानक क्यों बढ़ी?
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी और ईवी की अपेक्षाकृत स्थिर परिचालन लागत ने उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित किया।
महिंद्रा और हुंडई का ईवी प्रदर्शन कैसा रहा?
महिंद्रा एंड महिंद्रा की ईवी पंजीकरण लगभग दोगुनी होकर 20,112 यूनिट पर पहुँची। इसके विपरीत, हुंडई मोटर इंडिया की ईवी पंजीकरण 2,142 यूनिट से घटकर 1,386 यूनिट रह गई।
1 जुलाई से वाहन कंपनियों ने कीमतें कितनी बढ़ाईं?
1 जुलाई से टाटा मोटर्स ने पैसेंजर वाहनों में 1.5 प्रतिशत और कमर्शियल वाहनों में 2.5 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि की। मारुति सुजुकी ने ₹30,000 तक, हुंडई ने ₹12,800 तक और महिंद्रा ने औसतन 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।
राष्ट्र प्रेस
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