2030 तक ईवी हिस्सेदारी 20% होने पर ₹1 लाख करोड़ घटेगा आयात बिल: SBI रिसर्च रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
SBI रिसर्च की 2 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, यदि 2030 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बाज़ार हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुँच जाती है, तो देश का कच्चे तेल का आयात बिल ₹1 लाख करोड़ तक कम हो सकता है। पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय उपभोक्ताओं का ईवी की ओर रुझान तेज़ी से बढ़ा है, जिससे यह लक्ष्य अब पहले से अधिक संभव दिखने लगा है।
मौजूदा ईवी बाज़ार की स्थिति
फिलहाल भारतीय बाज़ार में ईवी की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ईवी पंजीकरण में उल्लेखनीय उछाल आया है। मार्च से जून 2026 के बीच देश में औसतन 2.3 लाख ईवी प्रति माह पंजीकृत हुए, जबकि 2025 में यह औसत केवल 1.3 लाख प्रति माह था।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि मौजूदा गति को देखते हुए 2026 में कुल ईवी पंजीकरण 25 लाख का आँकड़ा पार कर सकते हैं।
पूर्ण ईवी की हिस्सेदारी में तेज़ उछाल
कुल पंजीकरण में पूर्ण ईवी (बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन) की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। 2024 में यह 2 प्रतिशत से भी कम थी, जो 2026 में अब तक बढ़कर 8 प्रतिशत से अधिक हो गई है। कुछ राज्यों में यह आँकड़ा 10 प्रतिशत से भी ऊपर जा चुका है, जो राज्य-स्तरीय नीतिगत प्रोत्साहन की भूमिका को रेखांकित करता है।
भारत में 2025 तक कुल 2.86 करोड़ गाड़ियाँ पंजीकृत थीं और यह संख्या 2030 तक 4 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, जिनमें से 20 प्रतिशत ईवी होने की उम्मीद है।
चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर: बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में 29,151 चार्जिंग स्टेशन हैं। इनमें से 35 प्रतिशत केवल दो राज्यों — कर्नाटक और महाराष्ट्र — में केंद्रित हैं, जो देश भर में असमान वितरण की समस्या को उजागर करता है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 'ईवी की सफलता काफी हद तक चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।' यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ईवी अपनाने की रफ्तार इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार से कहीं आगे निकल रही है।
दिल्ली की नई ईवी नीति: एक मॉडल
दिल्ली सरकार अपनी नई ईवी नीति के तहत अगले चार वर्षों में 32,000 चार्जिंग पॉइंट का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बना रही है। SBI रिसर्च ने इस नीति की सराहना की है।
नीति के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार, पहले तीन वर्षों में दो-पहिया ईवी खरीदारों को कुल ₹60,000 का प्रोत्साहन दिया जाएगा। तीन-पहिया ईवी के लिए यह राशि ₹1,20,000 है। N1 श्रेणी के कमर्शियल ट्रकों को पहले वर्ष में ₹1 लाख की सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा, दिल्ली में ईवी पर रोड टैक्स और एकमुश्त पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी गई है।
आगे की राह
ईवी पंजीकरण में यह तेज़ी और राज्य-स्तरीय नीतिगत सक्रियता भारत के ऊर्जा आयात निर्भरता को कम करने के दीर्घकालिक लक्ष्य से सीधे जुड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार समान गति से हो, तो 2030 का 20 प्रतिशत ईवी हिस्सेदारी का लक्ष्य व्यावहारिक रूप से प्राप्त किया जा सकता है।