18 जुलाई 2026
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पेट्रोल-डीजल महंगा होने से EV की मांग उछली: मई में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.4%, टाटा मोटर्स की बिक्री 85% बढ़ी

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पेट्रोल-डीजल महंगा होने से EV की मांग उछली: मई में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.4%, टाटा मोटर्स की बिक्री 85% बढ़ी

सारांश

पेट्रोल-डीजल में ₹8/लीटर की बढ़ोतरी और होर्मुज़ संकट ने भारतीय उपभोक्ताओं को EV की ओर धकेला — मई में यात्री EV हिस्सेदारी 4% से उछलकर 6.4% पर पहुँची। टाटा मोटर्स की बिक्री 85% बढ़ी, TVS 42,000 स्कूटर पंजीकरण के साथ दोपहिया बाज़ार में अग्रणी।

मुख्य बातें

मई 2026 में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.4% रही, जो वित्त वर्ष 2026 में 4% थी — नोमुरा के अनुसार।
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 8.9% हुई, जो पिछले वर्ष लगभग 6.5% थी।
टाटा मोटर्स की EV बिक्री सालाना 85% बढ़ी; पिछले दो महीनों में बुकिंग 2.5 गुना बढ़ी।
TVS मोटर ने मई में लगभग 42,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर पंजीकृत किए; एथर एनर्जी की बिक्री दोगुनी, बाज़ार हिस्सेदारी 16.5% ।
तेल कंपनियों ने अप्रैल में पेट्रोल-डीजल ₹8/लीटर महँगा किया; भारतीय क्रूड बास्केट तीन महीने से $100/बैरल से ऊपर।
भारतीय तेल कंपनियाँ पेट्रोलियम बिक्री पर प्रतिदिन ₹550 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं।

ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग मई 2026 में तेज़ी से बढ़ी है। नोमुरा और एचएसबीसी की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जिससे घरेलू बाज़ार में पेट्रोल-डीजल महँगे हुए और उपभोक्ता तेज़ी से इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर मुड़े। यह बदलाव भारतीय EV बाज़ार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

मई में EV बिक्री के आँकड़े

नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी कुल यात्री वाहन बिक्री में 6.4 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 4 प्रतिशत थी। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 8.9 प्रतिशत पर पहुँची, जो पिछले वर्ष के लगभग 6.5 प्रतिशत से काफ़ी अधिक है।

एचएसबीसी ने मई में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 9.3 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया, "ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों की इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की ओर रुझान बढ़ा है।"

टाटा मोटर्स को सबसे अधिक फ़ायदा

कार निर्माताओं में टाटा मोटर्स इस उछाल की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरी है। कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जबकि पिछले दो महीनों में EV बुकिंग में 2.5 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

नोमुरा के अनुसार, ₹15 लाख से कम कीमत वाले सेगमेंट में टाटा मोटर्स को विशेष रूप से मज़बूत माँग दिख रही है। इसके मद्देनज़र कंपनी अपनी EV उत्पादन क्षमता 10,000 यूनिट प्रति माह से बढ़ाकर 15,000 यूनिट प्रति माह करने की योजना बना रही है।

दोपहिया सेगमेंट: TVS अग्रणी, एथर की बिक्री दोगुनी

दोपहिया वाहन सेगमेंट में बदलाव और भी स्पष्ट रहा। मई 2026 में लगभग 42,000 इलेक्ट्रिक स्कूटरों के पंजीकरण के साथ TVS मोटर बाज़ार में अग्रणी बनी रही। उसके बाद बजाज ऑटो और एथर एनर्जी का स्थान रहा।

नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, एथर एनर्जी की बिक्री साल-दर-साल दोगुनी से अधिक बढ़ी, जिससे कंपनी को 16.5 प्रतिशत की बाज़ार हिस्सेदारी हासिल हुई।

ईंधन संकट की पृष्ठभूमि

तेल विपणन कंपनियों ने अप्रैल 2026 में दो सप्ताह की अवधि में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि की। भारतीय क्रूड बास्केट मई में लगातार तीन महीनों तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही।

इसकी मुख्य वजह मध्य पूर्व संकट का लंबा खिंचना और होर्मुज़ स्ट्रेट का बंद होना रहा, जिससे होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का पारगमन होता है। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में उतार-चढ़ाव और युद्धविराम के बार-बार उल्लंघन से अनिश्चितता और बढ़ी है।

गौरतलब है कि सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के कारण भारतीय तेल कंपनियाँ पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर प्रतिदिन ₹550 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं।

आगे क्या होगा

दोनों ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि EV की माँग में यह तेज़ी जारी रहने की संभावना है, हालाँकि बढ़ती कमोडिटी लागत निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। नोमुरा के अनुसार, अनुकूल नीतिगत उपायों और बढ़ती उपभोक्ता स्वीकृति के कारण भारतीय बाज़ार में EV एक निर्णायक मोड़ पर हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहीं, तो EV अपनाने की रफ़्तार और तेज़ होने का अनुमान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'मजबूरी' से उपजी है, और यह अंतर नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण है। टाटा मोटर्स की 85% वृद्धि प्रभावशाली है, पर ₹15 लाख से कम सेगमेंट में केंद्रित यह माँग दर्शाती है कि मध्यवर्ग ही सबसे अधिक ईंधन मूल्य-संवेदनशील है। असली परीक्षा यह है कि क्या चार्जिंग अवसंरचना और बैटरी आपूर्ति श्रृंखला इस अचानक उछाल को झेल सकती है — क्योंकि बढ़ती कमोडिटी लागत निर्माताओं के मार्जिन को दबा रही है और कीमतें स्थिर रखना कठिन होता जा रहा है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मई 2026 में भारत में EV की बिक्री क्यों बढ़ी?
नोमुरा और एचएसबीसी की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100/बैरल से ऊपर रहीं और तेल कंपनियों ने अप्रैल में पेट्रोल-डीजल ₹8/लीटर महँगा किया, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेज़ी से मुड़े।
मई 2026 में EV की बाज़ार हिस्सेदारी कितनी रही?
नोमुरा के अनुसार मई में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.4% और इलेक्ट्रिक दोपहिया की 8.9% रही। एचएसबीसी ने क्रमशः 6.6% और 9.3% का अनुमान लगाया है — दोनों वित्त वर्ष 2026 के औसत से काफ़ी अधिक हैं।
टाटा मोटर्स को EV बूम से कितना फ़ायदा हुआ?
टाटा मोटर्स ने EV बिक्री में सालाना 85% की वृद्धि दर्ज की और पिछले दो महीनों में बुकिंग 2.5 गुना बढ़ी। कंपनी उत्पादन क्षमता 10,000 से बढ़ाकर 15,000 यूनिट प्रति माह करने की योजना बना रही है।
इलेक्ट्रिक दोपहिया बाज़ार में कौन आगे है?
TVS मोटर मई में लगभग 42,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर पंजीकरण के साथ अग्रणी रही, उसके बाद बजाज ऑटो और एथर एनर्जी का स्थान रहा। एथर की बिक्री साल-दर-साल दोगुनी से अधिक बढ़ी और उसकी बाज़ार हिस्सेदारी 16.5% हो गई।
क्या भारत में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं?
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में उतार-चढ़ाव और होर्मुज़ स्ट्रेट की आंशिक बंदी के कारण अनिश्चितता बनी हुई है। भारतीय तेल कंपनियाँ पहले से प्रतिदिन ₹550 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं, इसलिए आगे और मूल्यवृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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