पेट्रोल-डीजल महंगा होने से EV की मांग उछली: मई में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.4%, टाटा मोटर्स की बिक्री 85% बढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग मई 2026 में तेज़ी से बढ़ी है। नोमुरा और एचएसबीसी की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जिससे घरेलू बाज़ार में पेट्रोल-डीजल महँगे हुए और उपभोक्ता तेज़ी से इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर मुड़े। यह बदलाव भारतीय EV बाज़ार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
मई में EV बिक्री के आँकड़े
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी कुल यात्री वाहन बिक्री में 6.4 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 4 प्रतिशत थी। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 8.9 प्रतिशत पर पहुँची, जो पिछले वर्ष के लगभग 6.5 प्रतिशत से काफ़ी अधिक है।
एचएसबीसी ने मई में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 9.3 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया, "ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों की इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की ओर रुझान बढ़ा है।"
टाटा मोटर्स को सबसे अधिक फ़ायदा
कार निर्माताओं में टाटा मोटर्स इस उछाल की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरी है। कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जबकि पिछले दो महीनों में EV बुकिंग में 2.5 गुना की बढ़ोतरी हुई है।
नोमुरा के अनुसार, ₹15 लाख से कम कीमत वाले सेगमेंट में टाटा मोटर्स को विशेष रूप से मज़बूत माँग दिख रही है। इसके मद्देनज़र कंपनी अपनी EV उत्पादन क्षमता 10,000 यूनिट प्रति माह से बढ़ाकर 15,000 यूनिट प्रति माह करने की योजना बना रही है।
दोपहिया सेगमेंट: TVS अग्रणी, एथर की बिक्री दोगुनी
दोपहिया वाहन सेगमेंट में बदलाव और भी स्पष्ट रहा। मई 2026 में लगभग 42,000 इलेक्ट्रिक स्कूटरों के पंजीकरण के साथ TVS मोटर बाज़ार में अग्रणी बनी रही। उसके बाद बजाज ऑटो और एथर एनर्जी का स्थान रहा।
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, एथर एनर्जी की बिक्री साल-दर-साल दोगुनी से अधिक बढ़ी, जिससे कंपनी को 16.5 प्रतिशत की बाज़ार हिस्सेदारी हासिल हुई।
ईंधन संकट की पृष्ठभूमि
तेल विपणन कंपनियों ने अप्रैल 2026 में दो सप्ताह की अवधि में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि की। भारतीय क्रूड बास्केट मई में लगातार तीन महीनों तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही।
इसकी मुख्य वजह मध्य पूर्व संकट का लंबा खिंचना और होर्मुज़ स्ट्रेट का बंद होना रहा, जिससे होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का पारगमन होता है। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में उतार-चढ़ाव और युद्धविराम के बार-बार उल्लंघन से अनिश्चितता और बढ़ी है।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के कारण भारतीय तेल कंपनियाँ पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर प्रतिदिन ₹550 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं।
आगे क्या होगा
दोनों ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि EV की माँग में यह तेज़ी जारी रहने की संभावना है, हालाँकि बढ़ती कमोडिटी लागत निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। नोमुरा के अनुसार, अनुकूल नीतिगत उपायों और बढ़ती उपभोक्ता स्वीकृति के कारण भारतीय बाज़ार में EV एक निर्णायक मोड़ पर हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहीं, तो EV अपनाने की रफ़्तार और तेज़ होने का अनुमान है।