भारत में पेट्रोल ₹102.12, डीजल ₹95.20 प्रति लीटर; तेल आयातक देशों में सबसे कम वृद्धि
सारांश
मुख्य बातें
मध्य पूर्व संकट के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन वैश्विक तेल आयातक देशों की तुलना में यह वृद्धि सबसे कम बनी हुई है। 28 फरवरी से हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने 15, 19, 23 और 25 मई को चार चरणों में ईंधन के दाम में कुल करीब 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जबकि बाकी दुनिया में यह वृद्धि 10 से 90 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है।
मुख्य मूल्य वृद्धि
नई दिल्ली में पेट्रोल का दाम ₹7.35 प्रति लीटर बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गया है, जो पहले ₹94.77 प्रति लीटर था। डीजल ₹7.53 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुँच गया है, जो पहले ₹87.67 प्रति लीटर था। यह चार चरणों में की गई वृद्धि का संचित असर है।
वैश्विक तुलना
दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल की खुदरा कीमत ₹150 प्रति लीटर से अधिक है और अधिकांश देशों में यह ₹180 प्रति लीटर को पार कर चुकी है। यूरोपीय संघ के 27 देशों में औसत पेट्रोल की कीमत ₹179 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹184 प्रति लीटर है।
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और नेपाल में — कम प्रति व्यक्ति आय के बावजूद — पेट्रोल ₹135 प्रति लीटर से काफी ऊपर जा चुका है। श्रीलंका, म्यांमार और फिलीपींस में भी यह कीमत ₹130 प्रति लीटर से अधिक है।
भारत की स्थिति क्यों अलग है
आँकड़ों के अनुसार, केवल संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मलेशिया और अमेरिका जैसी अर्थव्यवस्थाएँ — जहाँ या तो प्रत्यक्ष सब्सिडी दी जाती है या कर संरचनात्मक रूप से कम है — भारत से कम पेट्रोल कीमत बनाए रखने में सफल रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अन्य सभी प्रमुख आयातक अर्थव्यवस्थाओं ने लागत का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल दिया है।
गौरतलब है कि कई देशों में पिछले 48 महीनों में पेट्रोल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत विकासशील देशों के अधिकांश देशों के बराबर या उससे कम है और यूरोपीय पंप मूल्य से लगभग आधी है।
हॉर्मुज स्ट्रेट का संकट और भारत पर असर
कच्चे तेल के वैश्विक निर्यात के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट 28 फरवरी से बंद है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला बाधित हुई है। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए यह व्यवधान सीधे घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण को प्रभावित करता है।
आगे क्या
मध्य पूर्व संकट के जारी रहने की स्थिति में आगे और मूल्य समायोजन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालाँकि, यदि हॉर्मुज स्ट्रेट खुलता है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तो घरेलू ईंधन दरों में राहत मिल सकती है।