10 दिन में तीसरी बार पेट्रोल-डीजल महंगा, दिल्ली में पेट्रोल ₹99.51 प्रति लीटर पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत शनिवार, 23 मई को बढ़कर ₹99.51 प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल ₹92.49 प्रति लीटर पर पहुँच गया। सरकारी तेल कंपनियों ने इस बार पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है — पिछले 10 दिनों में यह तीसरी वृद्धि है, जिससे कुल इजाफा लगभग ₹5 प्रति लीटर हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
15 मई को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की शुरुआत हुई थी, जब कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि की गई। इसके बाद 19 मई को 80 पैसे से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जिससे दिल्ली में पेट्रोल ₹98.64 और डीजल ₹91.58 प्रति लीटर पर पहुँचा था। अब 23 मई की तीसरी बढ़ोतरी के बाद कीमतें नए उच्च स्तर पर हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जिसका सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ा।
प्रमुख शहरों में ईंधन के ताज़ा भाव
नई बढ़ोतरी के बाद देश के चार महानगरों में पेट्रोल के भाव इस प्रकार हैं — दिल्ली: ₹99.51, मुंबई: ₹108.49, कोलकाता: ₹110.64, और चेन्नई: ₹105.31 प्रति लीटर।
डीजल की कीमतें भी इन शहरों में बढ़ी हैं — दिल्ली: ₹92.49, मुंबई: ₹95.02, चेन्नई: ₹96.98, और कोलकाता: ₹97.02 प्रति लीटर।
सरकार की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने कीमत वृद्धि का बचाव करते हुए तर्क दिया कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत वह देश रहा है जहाँ आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा है। BJP नेताओं ने भारत और अन्य देशों में तेल कीमतों की तुलना भी प्रस्तुत की।
BJP नेता अमित मालवीय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन 'भारत इस पूरी तस्वीर में एक अलग और उल्लेखनीय अपवाद बनकर उभरा है।'
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब महँगाई पहले से ही घरेलू बजट पर दबाव बना रही है। परिवहन लागत में वृद्धि का असर सब्जियों, दूध और रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है। गौरतलब है कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹100 के करीब पहुँच गई है — एक मनोवैज्ञानिक सीमा जो उपभोक्ता भावना को प्रभावित करती है।
क्या होगा आगे
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें यदि ऊँची बनी रहीं, तो आगामी हफ्तों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने तक घरेलू ईंधन बाज़ार में स्थिरता की उम्मीद सीमित है।