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जून 2026 में भारत का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट 21% उछला, $11.48 अरब पर पहुंचा; ओमान को निर्यात 420% बढ़ा

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जून 2026 में भारत का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट 21% उछला, $11.48 अरब पर पहुंचा; ओमान को निर्यात 420% बढ़ा

सारांश

जून 2026 में भारत का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट 21% उछलकर $11.48 अरब पर पहुंचा। सबसे बड़ी चौंकाने वाली खबर ओमान से — एफटीए लागू होने के बाद वहां निर्यात 420% बढ़ा। अप्रैल-जून तिमाही में कुल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट $34.14 अरब रहा, जो पिछले साल से 18% अधिक है।

मुख्य बातें

जून 2026 में भारत का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 21% बढ़कर $11.48 अरब डॉलर पर पहुंचा।
ओमान को निर्यात 420% उछलकर $258.97 मिलियन डॉलर हुआ — भारत-ओमान एफटीए के बाद।
अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा ( $1.95 अरब डॉलर ); चीन को निर्यात 74% बढ़ा।
34 में से 27 इंजीनियरिंग पैनलों ने सालाना वृद्धि दर्ज की; यूएई और सऊदी अरब में गिरावट रही।
अप्रैल-जून 2026-27 तिमाही में कुल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट $34.14 अरब डॉलर — सालाना 18.09% की वृद्धि।
जून में इंजीनियरिंग उत्पादों की भारत के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी 28.4% रही।

भारत के इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट ने जून 2026 में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की मजबूत छलांग लगाई और यह $11.48 अरब डॉलर पर पहुंच गया — जो जून 2025 के $9.51 अरब डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। ईईपीसी इंडिया द्वारा 27 जुलाई 2026 को जारी बयान के अनुसार, इस उछाल में अमेरिका, जर्मनी, चीन, सिंगापुर और ओमान से आई मजबूत मांग का निर्णायक योगदान रहा।

मुख्य घटनाक्रम

जून 2026 में अमेरिका भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना रहा, जहां $1.95 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया। चीन को निर्यात 74 प्रतिशत की छलांग के साथ $361.47 मिलियन डॉलर तक पहुंचा।

सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन ओमान का रहा, जहां भारत का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 420 प्रतिशत — यानी पांच गुने से भी अधिक — बढ़कर $258.97 मिलियन डॉलर हो गया। ईईपीसी इंडिया के अनुसार, भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने के बाद यह उछाल आया है।

क्षेत्रवार प्रदर्शन

34 इंजीनियरिंग पैनलों में से 27 पैनलों ने जून में सालाना आधार पर निर्यात वृद्धि दर्ज की। हालांकि, यूएई और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई प्रमुख बाजारों में गिरावट देखी गई।

जिन सात पैनलों में नरमी रही, उनमें लेड और उससे जुड़े उत्पाद, आईसी इंजन, एटीएम के लिए मशीनरी, क्रेन, लिफ्ट और विंच, ऑफिस इक्विपमेंट तथा प्राइम माइका शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने क्षेत्रीय व्यापार प्रवाह को प्रभावित किया है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा, 'इंजीनियरिंग गुड्स सेक्टर ने बदले हुए वैश्विक व्यापारिक माहौल के अनुरूप खुद को ढाल लिया है और शानदार मजबूती दिखाई है। हालांकि, इंजीनियरिंग उद्योग को उभरती चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।'

चड्ढा ने यह भी रेखांकित किया कि 'पश्चिम एशिया और मिडिल ईस्ट संकट के कारण पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता और व्यापारिक व्यवधानों के बावजूद इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट सेक्टर ने शानदार मजबूती दिखाई है। चालू वित्त वर्ष के पिछले तीन महीनों में इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट लगातार $10 अरब डॉलर से ऊपर रहा है। इस विकास की गति बनाए रखने के लिए भारत सरकार से लगातार सहयोग की आवश्यकता होगी।'

समग्र व्यापार में हिस्सेदारी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी 28.4 प्रतिशत रही — जो क्षेत्र की बढ़ती रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।

गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत का कुल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट $34.14 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह $28.91 अरब डॉलर था — यानी तिमाही आधार पर 18.09 प्रतिशत की सालाना वृद्धि।

आगे की राह

भारत-ओमान एफटीए का सकारात्मक असर पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (वाना) क्षेत्र में भारत के कुल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट को सकारात्मक बनाए रखने में सहायक रहा है। यदि यूएई और सऊदी अरब में मांग में सुधार होता है और एफटीए का दायरा बढ़ता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 की शेष तिमाहियों में यह क्षेत्र और मजबूत प्रदर्शन कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह आंकड़ा तब तक अधूरा है जब तक यह स्पष्ट न हो कि यह कच्चे माल का पुनर्निर्यात है या मूल्य-वर्धित उत्पाद। तीन तिमाहियों से $10 अरब का स्तर बनाए रखना सेक्टर की परिपक्वता दर्शाता है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या यह गति यूएस टैरिफ अनिश्चितता और मध्य-पूर्व तनाव के बीच टिकी रहती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2026 में भारत का इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट कितना रहा?
जून 2026 में भारत का इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 21% बढ़कर $11.48 अरब डॉलर पर पहुंचा, जो जून 2025 में $9.51 अरब डॉलर था। यह वृद्धि अमेरिका, चीन, जर्मनी, सिंगापुर और ओमान से मजबूत मांग के कारण आई।
ओमान को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात इतना क्यों बढ़ा?
ईईपीसी इंडिया के अनुसार, भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने के बाद ओमान को निर्यात 420% उछलकर $258.97 मिलियन डॉलर हो गया। एफटीए से शुल्क बाधाएं कम होने के कारण भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी।
अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत का कुल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट कितना रहा?
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत का कुल इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट $34.14 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के $28.91 अरब डॉलर की तुलना में 18.09% अधिक है।
किन इंजीनियरिंग पैनलों में निर्यात में गिरावट आई?
34 में से 7 पैनलों में नरमी रही, जिनमें लेड और उससे जुड़े उत्पाद, आईसी इंजन, एटीएम के लिए मशीनरी, क्रेन, लिफ्ट और विंच, ऑफिस इक्विपमेंट तथा प्राइम माइका शामिल हैं। इसके अलावा यूएई और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई।
भारत के कुल निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी कितनी है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी 28.4% रही। यह आंकड़ा इंजीनियरिंग क्षेत्र को भारत के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात स्तंभों में से एक बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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