17 जुलाई 2026
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जून में भारत का वस्तु निर्यात 15.5% बढ़ा, कृषि और रत्न क्षेत्र ने दिखाई मज़बूती: क्रिसिल

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जून में भारत का वस्तु निर्यात 15.5% बढ़ा, कृषि और रत्न क्षेत्र ने दिखाई मज़बूती: क्रिसिल

सारांश

जून में भारत का वस्तु निर्यात 15.5% बढ़ा, लेकिन पेट्रोलियम निर्यात मई के 8.4 अरब डॉलर से घटकर 4.9 अरब डॉलर पर आ गया। कृषि और रत्न-आभूषण क्षेत्र ने राहत दी, पर बढ़ता आयात और कच्चे तेल की कीमतें वित्त वर्ष 2027 में CAD को GDP के 1.5% तक ले जा सकती हैं।

मुख्य बातें

जून 2026 में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत बढ़ा, मई की 18 प्रतिशत वृद्धि से कुछ कम।
पेट्रोलियम निर्यात मई के 8.4 अरब डॉलर से घटकर जून में 4.9 अरब डॉलर रह गया।
अन्य अनाज श्रेणी में निर्यात 244.2 प्रतिशत , मांस-डेयरी-पोल्ट्री में 54.6 प्रतिशत और रत्न-आभूषण में 34.6 प्रतिशत की वृद्धि।
वस्तु आयात 31 प्रतिशत बढ़कर 70.8 अरब डॉलर पर पहुँचा।
क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान: वित्त वर्ष 2027 में CAD जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक बढ़ेगा, जो वित्त वर्ष 2026 में 0.6 प्रतिशत था।
कच्चे तेल की कीमत अगले एक वर्ष में 82-87 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान; पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक जोखिम प्रमुख अनिश्चितता।

क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत बढ़ा, हालाँकि मासिक आधार पर इसमें कुछ नरमी देखी गई — मई में यह वृद्धि दर 18 प्रतिशत थी। 17 जुलाई को जारी इस रिपोर्ट में पेट्रोलियम निर्यात में तेज़ गिरावट को वस्तु व्यापार घाटे के बढ़ने की मुख्य वजह बताया गया है।

कृषि निर्यात में उल्लेखनीय उछाल

जून में कृषि निर्यात का प्रदर्शन विशेष रूप से मज़बूत रहा, जिसकी प्रमुख वजह अनुकूल आधार प्रभाव रहा। सालाना आधार पर चावल निर्यात 16.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में 54.6 प्रतिशत और समुद्री उत्पादों में 14.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सबसे तेज़ रफ़्तार 'अन्य अनाज' श्रेणी में देखी गई, जहाँ निर्यात 244.2 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि के साथ उछला।

रत्न-आभूषण और मुख्य निर्यात की भूमिका

रिपोर्ट के मुताबिक, रत्न एवं आभूषण निर्यात जून में 34.6 प्रतिशत बढ़ा। मुख्य निर्यात (core exports) में 15.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे पेट्रोलियम निर्यात में आई गिरावट की आंशिक भरपाई संभव हो सकी। इस वृद्धि का नेतृत्व ऑर्गेनिक एवं इनऑर्गेनिक केमिकल (19.4 प्रतिशत), इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ (18.9 प्रतिशत) और फार्मास्यूटिकल्स (7.1 प्रतिशत) ने किया। इंजीनियरिंग वस्तुओं की वृद्धि दर घटकर 20.7 प्रतिशत रही, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह अब भी मज़बूत स्तर पर है।

पेट्रोलियम निर्यात में तेज़ गिरावट

अंतरिम शांति समझौते के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते जून में पेट्रोलियम निर्यात घटकर 4.9 अरब डॉलर रह गया, जो मई में 8.4 अरब डॉलर था। जून में ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत 85.4 डॉलर प्रति बैरल रही, जो पहले के 107.1 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में 20.3 प्रतिशत कम है। यह गिरावट वस्तु व्यापार घाटे के बढ़ने की केंद्रीय वजह बनी।

आयात और व्यापार घाटे पर दबाव

जून में वस्तु आयात 31 प्रतिशत बढ़कर 70.8 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इसकी मुख्य वजह मुख्य आयात में तेज़ बढ़ोतरी के साथ-साथ तेल और सोने की अधिक खरीद रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि वस्तु व्यापार घाटे का प्रमुख कारण तेल है और आगाह किया गया है कि कच्चे तेल एवं अन्य जिंसों की ऊँची कीमतें चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव डालती रहेंगी।

चालू खाते के घाटे का अनुमान और आगे की राह

क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 0.6 प्रतिशत था। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, अगले एक वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 82-87 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती है। हालाँकि, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों को इस अनुमान के लिए प्रमुख अनिश्चितता बताया गया है। कृषि और मुख्य निर्यात की गति बनाए रखना आने वाले महीनों में व्यापार संतुलन के लिए निर्णायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर पेट्रोलियम निर्यात में एक महीने में ही 4 अरब डॉलर से ज़्यादा की गिरावट में छिपी है — यह एकल जिंस की कीमत पर भारत की निर्यात संरचना की निर्भरता को उजागर करती है। कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की मज़बूती उत्साहजनक है, लेकिन जब तक विविधीकरण की यह रफ़्तार तेल के झटकों को सोखने लायक नहीं बनती, CAD का जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक पहुँचना रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बनाए रखेगा। पश्चिम एशिया में तनाव किसी भी दिशा में जा सकता है — यह अनुमान नहीं, बल्कि नीति-निर्माताओं के लिए एक सक्रिय जोखिम प्रबंधन की माँग है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2026 में भारत के वस्तु निर्यात की वृद्धि दर कितनी रही?
जून 2026 में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत बढ़ा। यह मई 2026 की 18 प्रतिशत वृद्धि दर से कुछ कम है, और मासिक आधार पर भी नरमी देखी गई।
पेट्रोलियम निर्यात में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
अंतरिम शांति समझौते के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 107.1 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 85.4 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, यानी 20.3 प्रतिशत की गिरावट। इसी वजह से पेट्रोलियम निर्यात मई के 8.4 अरब डॉलर से घटकर जून में 4.9 अरब डॉलर रह गया।
जून में कौन-से क्षेत्रों का निर्यात सबसे तेज़ बढ़ा?
'अन्य अनाज' श्रेणी में 244.2 प्रतिशत, मांस-डेयरी-पोल्ट्री में 54.6 प्रतिशत और रत्न एवं आभूषण में 34.6 प्रतिशत की वृद्धि सबसे उल्लेखनीय रही। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ (18.9 प्रतिशत) और ऑर्गेनिक-इनऑर्गेनिक केमिकल (19.4 प्रतिशत) भी तेज़ वृद्धि में रहे।
भारत का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2027 में कितना रह सकता है?
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 0.6 प्रतिशत था। बढ़ता आयात और तेल की ऊँची कीमतें इसकी मुख्य वजह बताई गई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों को लेकर क्रिसिल का क्या अनुमान है?
क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि अगले एक वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 82-87 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती है। हालाँकि, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों को इस अनुमान के लिए प्रमुख अनिश्चितता बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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