जून में भारत का वस्तु निर्यात 15.5% बढ़ा, कृषि और रत्न क्षेत्र ने दिखाई मज़बूती: क्रिसिल
सारांश
मुख्य बातें
क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत बढ़ा, हालाँकि मासिक आधार पर इसमें कुछ नरमी देखी गई — मई में यह वृद्धि दर 18 प्रतिशत थी। 17 जुलाई को जारी इस रिपोर्ट में पेट्रोलियम निर्यात में तेज़ गिरावट को वस्तु व्यापार घाटे के बढ़ने की मुख्य वजह बताया गया है।
कृषि निर्यात में उल्लेखनीय उछाल
जून में कृषि निर्यात का प्रदर्शन विशेष रूप से मज़बूत रहा, जिसकी प्रमुख वजह अनुकूल आधार प्रभाव रहा। सालाना आधार पर चावल निर्यात 16.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में 54.6 प्रतिशत और समुद्री उत्पादों में 14.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सबसे तेज़ रफ़्तार 'अन्य अनाज' श्रेणी में देखी गई, जहाँ निर्यात 244.2 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि के साथ उछला।
रत्न-आभूषण और मुख्य निर्यात की भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक, रत्न एवं आभूषण निर्यात जून में 34.6 प्रतिशत बढ़ा। मुख्य निर्यात (core exports) में 15.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे पेट्रोलियम निर्यात में आई गिरावट की आंशिक भरपाई संभव हो सकी। इस वृद्धि का नेतृत्व ऑर्गेनिक एवं इनऑर्गेनिक केमिकल (19.4 प्रतिशत), इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ (18.9 प्रतिशत) और फार्मास्यूटिकल्स (7.1 प्रतिशत) ने किया। इंजीनियरिंग वस्तुओं की वृद्धि दर घटकर 20.7 प्रतिशत रही, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह अब भी मज़बूत स्तर पर है।
पेट्रोलियम निर्यात में तेज़ गिरावट
अंतरिम शांति समझौते के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते जून में पेट्रोलियम निर्यात घटकर 4.9 अरब डॉलर रह गया, जो मई में 8.4 अरब डॉलर था। जून में ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत 85.4 डॉलर प्रति बैरल रही, जो पहले के 107.1 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में 20.3 प्रतिशत कम है। यह गिरावट वस्तु व्यापार घाटे के बढ़ने की केंद्रीय वजह बनी।
आयात और व्यापार घाटे पर दबाव
जून में वस्तु आयात 31 प्रतिशत बढ़कर 70.8 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इसकी मुख्य वजह मुख्य आयात में तेज़ बढ़ोतरी के साथ-साथ तेल और सोने की अधिक खरीद रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि वस्तु व्यापार घाटे का प्रमुख कारण तेल है और आगाह किया गया है कि कच्चे तेल एवं अन्य जिंसों की ऊँची कीमतें चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव डालती रहेंगी।
चालू खाते के घाटे का अनुमान और आगे की राह
क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 0.6 प्रतिशत था। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, अगले एक वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 82-87 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती है। हालाँकि, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों को इस अनुमान के लिए प्रमुख अनिश्चितता बताया गया है। कृषि और मुख्य निर्यात की गति बनाए रखना आने वाले महीनों में व्यापार संतुलन के लिए निर्णायक होगा।