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राजस्थान में मातृ मृत्यु पर एनएचआरसी सख्त: भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में 8 महिलाओं की मौत, मुख्य सचिव को 2 हफ्ते में रिपोर्ट तलब

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राजस्थान में मातृ मृत्यु पर एनएचआरसी सख्त: भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में 8 महिलाओं की मौत, मुख्य सचिव को 2 हफ्ते में रिपोर्ट तलब

सारांश

राजस्थान के दो सरकारी अस्पतालों में एक सप्ताह में 8 महिलाओं की प्रसव-संबंधी मौत ने एनएचआरसी को सुओ मोटू कार्रवाई पर मजबूर किया। भीलवाड़ा में 6 दिनों में 5 और बांसवाड़ा में कई मौतें — गंभीर एनीमिया संभावित कारण। मुख्य सचिव को 2 हफ्ते में रिपोर्ट देनी होगी।

मुख्य बातें

एनएचआरसी ने राजस्थान के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच सी-सेक्शन के बाद 5 महिलाओं की मौत हुई।
बांसवाड़ा में हाल के दिनों में 6 प्रसूता महिलाओं और 3 नवजात शिशुओं की मौत की खबर है।
प्रारंभिक जाँच में गंभीर एनीमिया को कई मौतों का संभावित कारण माना गया है।
भीलवाड़ा अस्पताल के एक ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण पाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
अरुण गौर ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान या उसके बाद हुई महिलाओं की मौतों का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर आठ महिलाओं — जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है — की मौत हुई, जिसने राज्य की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

एनएचआरसी ने यह कदम मीडिया में प्रकाशित उन रिपोर्टों के आधार पर उठाया, जिनमें दोनों जिलों के सरकारी अस्पतालों में प्रसव संबंधी उपचार के बाद महिलाओं की मौत का विवरण सामने आया था। आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य सही हैं, तो यह सुरक्षित मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच से जुड़े मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

आयोग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार से इन मौतों की परिस्थितियाँ, चल रही जाँच की स्थिति और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी माँगी है।

भीलवाड़ा: छह दिनों में पाँच मौतें

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच सीजेरियन (सी-सेक्शन) प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत हुई। मृतकों की पहचान शिमला गुर्जर (5 जुलाई), फोरी देवी (7 जुलाई), ईशा पांडे (8 जुलाई), दिव्या (9 जुलाई) और संगीता जिनागर (10 जुलाई) के रूप में हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, सभी महिलाओं की हालत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (एमआईसीयू) में भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

गौरतलब है कि अस्पताल के एक ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जाँच में संक्रमण पाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसके बाद मामले की जाँच और तेज कर दी गई है। हालाँकि, महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौर ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि सभी मौतें गंभीर प्रसूति संबंधी जटिलताओं के कारण हुई हैं।

बांसवाड़ा: मौतों का सिलसिला जारी

बांसवाड़ा जिला अस्पताल में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में छह प्रसूता महिलाओं और तीन नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी है। जिन महिलाओं की मौत की जानकारी सामने आई है, उनमें रेखा (29), रेशमा (23), लक्ष्मी (21), लीला (32) और लक्ष्मी (32) शामिल हैं।

ताज़ा मामले में सज्जनगढ़ ब्लॉक के कलाखूंटा गाँव की 20 वर्षीया शिल्पा ने अस्पताल पहुँचने से पहले मृत शिशु को जन्म दिया था। अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर स्थिति के कारण उसे पहले ग्रामीण अस्पताल से बांसवाड़ा जिला अस्पताल और फिर उदयपुर रेफर किया गया, जहाँ 15 जुलाई को उसकी मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वयं जिले के दौरे पर थे।

गंभीर एनीमिया: संभावित कारण

प्रारंभिक जाँच में कई मामलों में गंभीर एनीमिया (खून की कमी) को मातृ मृत्यु का संभावित कारण माना गया है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण की कमी और प्रसव-पूर्व देखभाल की अपर्याप्तता पहले से ही चिंता का विषय रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं में प्रसव के दौरान जटिलताओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

आगे क्या होगा

एनएचआरसी अब मुख्य सचिव की रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार की कार्रवाई और जवाबदेही की समीक्षा करेगा। आयोग के इस हस्तक्षेप से राजस्थान सरकार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को दुरुस्त करने का दबाव बढ़ गया है। यह देखना अहम होगा कि सरकार अगले दो हफ्तों में आयोग के सामने क्या जवाब पेश करती है और मृत महिलाओं के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रणालीगत विफलता है। गंभीर एनीमिया को कारण बताना सुविधाजनक तो है, लेकिन असली सवाल यह है कि प्रसव-पूर्व देखभाल में इतनी कमी क्यों रही कि महिलाएँ इस हालत में अस्पताल पहुँचीं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार के लिए यह केवल एनएचआरसी को रिपोर्ट सौंपने का मामला नहीं — यह जवाबदेही की परीक्षा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचआरसी ने राजस्थान मातृ मृत्यु मामले में क्या कार्रवाई की है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत का स्वतः संज्ञान लेते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर मौतों की परिस्थितियों, जाँच की स्थिति और रोकथाम के उपायों की विस्तृत रिपोर्ट माँगी है।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में कितनी महिलाओं की मौत हुई और कब?
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच छह दिनों में सी-सेक्शन प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत हुई। मृतकों में शिमला गुर्जर, फोरी देवी, ईशा पांडे, दिव्या और संगीता जिनागर शामिल हैं।
बांसवाड़ा में मातृ मृत्यु के क्या कारण बताए जा रहे हैं?
प्रारंभिक जाँच में गंभीर एनीमिया (खून की कमी) को कई मौतों का संभावित कारण माना गया है। एक मामले में 20 वर्षीया शिल्पा को अत्यधिक रक्तस्राव के कारण बांसवाड़ा से उदयपुर रेफर किया गया, जहाँ 15 जुलाई को उनकी मौत हो गई।
क्या भीलवाड़ा अस्पताल में संक्रमण की पुष्टि हुई है?
रिपोर्टों के अनुसार, महात्मा गांधी अस्पताल के एक ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जाँच में संक्रमण पाए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद मामले की जाँच तेज कर दी गई है। हालाँकि, अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरुण गौर ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।
राजस्थान सरकार को एनएचआरसी को कब तक रिपोर्ट देनी है?
एनएचआरसी ने राजस्थान के मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग राज्य सरकार की कार्रवाई और जवाबदेही की समीक्षा करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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