झारखंड रिमांड होम में 19 वर्षीय महिला की मौत: एनएचआरसी ने देवघर प्रशासन से दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब की
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव और देवघर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर चरखी पहाड़ी स्थित रिमांड होम में एक 19 वर्षीय महिला कैदी की संदिग्ध मौत के मामले में दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। आयोग ने 2 मई 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की, जबकि महिला की मौत का कारण अभी तक आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया है।
मुख्य घटनाक्रम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब महिला कैदी की तबीयत अचानक बिगड़ी तो रिमांड होम के कर्मचारी उसे देवघर सदर अस्पताल ले गए, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। अधिकारियों के अनुसार मौत की परिस्थितियाँ अभी भी संदिग्ध बनी हुई हैं और जाँच जारी है।
कथित तौर पर 1 जनवरी 2026 से अब तक इसी रिमांड होम में पाँच कैदियों की मौत हो चुकी है, जिससे इस संस्था की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में कही गई बातें सत्य पाई जाती हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का अत्यंत गंभीर मामला होगा।
एनएचआरसी की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव और देवघर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने माँग की है कि रिपोर्ट में मौत की परिस्थितियों, रिमांड होम की सुरक्षा व्यवस्था और वहाँ पहले हुई मौतों की जाँच की स्थिति का विस्तृत विवरण शामिल हो।
हरियाणा में सफाईकर्मियों की मौत का मामला भी संज्ञान में
एक अलग मामले में, आयोग ने 2 मई 2026 को हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद स्थित पुरी प्राणायाम सोसाइटी में सीवर सफाई के दौरान दो सफाईकर्मियों की मौत का भी स्वतः संज्ञान लिया। रिपोर्टों के अनुसार, भवन के एस्टेट मैनेजर के निर्देश पर श्रमिकों ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण या गैस मास्क के मैनहोल में प्रवेश किया था।
आयोग ने नगर निगम आयुक्त और पुलिस आयुक्त, फरीदाबाद को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में रिपोर्ट माँगी है, जिसमें जाँच की स्थिति और मृतकों के परिजनों को दिए गए मुआवजे का विवरण अनिवार्य रूप से शामिल होना चाहिए।
आम जनता पर असर और व्यापक चिंता
नोटिस जारी करते हुए एनएचआरसी ने गहरी चिंता व्यक्त की है कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों और आयोग की पूर्व सलाह के बावजूद देश में हिरासत में मौतें और सफाईकर्मियों की दुर्घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब मानवाधिकार संगठन लगातार हिरासत में मृत्यु के मामलों में जवाबदेही की माँग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि रिमांड होम जैसे संस्थानों में बंद व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। दोनों मामलों में आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अगली कार्रवाई तय की जाएगी।