पश्चिम बंगाल सरकार ने 4 जिलों में अक्षय पात्र फाउंडेशन की मिड-डे मील मंजूरी वापस ली
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 15 सितंबर 2026 को चार जिलों — उत्तर 24 परगना, हावड़ा, पुरुलिया और पूर्वी मिदनापुर — के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील परोसने हेतु अक्षय पात्र फाउंडेशन को दी गई मंजूरी अचानक वापस ले ली। यह निर्णय ऐसे समय में आया जब कार्यक्रम अभी शुरू भी नहीं हुआ था और सरकार की ओर से इस कदम का कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
अक्षय पात्र फाउंडेशन और इस्कॉन का संबंध
अक्षय पात्र फाउंडेशन, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) का एक अंग है, जो देश के कई राज्यों में स्कूली बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराता है। उल्लेखनीय है कि इस्कॉन का ही एक अन्य घटक, अन्नमृत फाउंडेशन, कोलकाता नगर निगम (KMC) के अधिकार क्षेत्र वाले सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाना और परोसना अब भी जारी रखेगा।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य सचिवालय 'नबन्ना' के एक अधिकारी ने बताया कि मंजूरी वापस लेने के बाद इन चार जिलों के स्कूलों में स्कूल परिसर के भीतर ही मिड-डे मील पकाने और परोसने की पुरानी व्यवस्था फिर से लागू की जाएगी। गौरतलब है कि पूर्वी मिदनापुर विपक्ष के प्रमुख नेता सुवेंदु अधिकारी का गृह जिला भी है, जो इस निर्णय को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मिड-डे मील की गुणवत्ता और वितरण को लेकर लंबे समय से विमर्श जारी है। यह निर्णय कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व ही लिया गया, जिससे प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कैसे मिली थी मंजूरी
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद इस्कॉन को स्कूली बच्चों को मिड-डे मील देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शुरुआत में KMC क्षेत्र के स्कूलों में यह प्रयोग किया गया और सफलता के आधार पर इसे अन्य जिलों तक फैलाने की योजना बनाई गई थी। इसी के तहत हावड़ा, पुरुलिया, उत्तर 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर के लिए अक्षय पात्र फाउंडेशन को मंजूरी दी गई थी।
विपक्ष और नागरिक समाज की प्रतिक्रिया
शुरुआत में जब इस्कॉन को मिड-डे मील परोसने की ज़िम्मेदारी दी गई थी, तब विपक्षी दलों और नागरिक समाज ने कड़ी आपत्ति जताई थी। आलोचकों का कहना था कि इस्कॉन के शाकाहारी भोजन की वजह से बच्चे अंडे जैसे प्रोटीन-युक्त आहार से वंचित रह जाएंगे। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि शाकाहारी भोजन के साथ अलग से अंडे भी दिए जाएंगे, जिसके बाद आलोचनाएँ कम हो गई थीं। साथ ही, मिड-डे मील योजना का बजट आवंटन भी बढ़ाया गया था।
आगे क्या होगा
फिलहाल सरकार की ओर से इस फैसले का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। चारों जिलों में विद्यार्थियों को मिड-डे मील की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्कूल-स्तरीय पाक व्यवस्था फिर से शुरू की जाएगी। इस विवाद के राजनीतिक और प्रशासनिक निहितार्थ आने वाले दिनों में और स्पष्ट होने की संभावना है।