पश्चिम बंगाल: स्कूलों में मिड-डे मील राशि ₹6.78 से बढ़ाकर ₹10, अस्पताल भोजन खर्च ₹110 — 1 अगस्त से लागू
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 जुलाई 2026 को सरकारी विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में परोसे जाने वाले भोजन की पोषण गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। 1 अगस्त 2026 से प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की प्रति छात्र राशि ₹6.78 से बढ़ाकर ₹10 की जाएगी, जबकि सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के दैनिक भोजन का खर्च ₹56.64 से बढ़ाकर ₹110 किया जाएगा।
मुख्य घोषणाएँ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विकास भवन, कोलकाता में राज्य के शिक्षा मंत्रियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस्कॉन (ISKCON) 1 अगस्त 2026 से कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों के स्कूलों में दोपहर का भोजन उपलब्ध कराना शुरू करेगा। इस्कॉन की ओर से कुछ सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।
भोजन दरों में संशोधन: 9 साल का इंतज़ार खत्म
गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों की दरों में अंतिम संशोधन 2017 में हुआ था — यानी लगभग 9 वर्षों के बाद यह बदलाव किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण सरकारी सेवाओं में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया था। नई सरकार ने सत्ता संभालने के 2 महीनों के भीतर ही इस दिशा में कदम उठाया है।
प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की प्रति छात्र राशि में लगभग 47.5% की वृद्धि की गई है, जबकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के भोजन खर्च में करीब 94% की बढ़ोतरी की गई है।
अस्पताल मरीजों पर असर
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उपचाररत मरीजों को 1 अगस्त 2026 से प्रतिदिन ₹110 के खर्च पर संतुलित और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन मिलेगा। यह पहल विशेष रूप से उन वंचित और कमज़ोर वर्गों के लिए महत्वपूर्ण है जो सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं।
विद्यालयों में इस्कॉन की भूमिका
इस्कॉन, जो अपनी सामुदायिक रसोई और 'अक्षय पात्र' जैसी पहलों के लिए जाना जाता है, अब पश्चिम बंगाल के स्कूलों में उच्च गुणवत्ता का दोपहर का भोजन उपलब्ध कराएगा। इस साझेदारी से स्कूली बच्चों को पोषणयुक्त भोजन सुनिश्चित होने की उम्मीद है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक होगा।
आगे की राह
राज्य सरकार का कहना है कि पौष्टिक भोजन मरीजों के स्वास्थ्य सुधार और बच्चों के बौद्धिक विकास में प्रभावी भूमिका निभाएगा। 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाले इन बदलावों के क्रियान्वयन पर सभी की नज़रें टिकी हैं।